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माइनस 16 डिग्री तापमान में 12500 फुट ऊंची चोटी पर 280 फुट का तिरंगा लहराकर बनाया रिकॉर्ड
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केदार कांटा चोटी पर पहुंचने के बाद सोनीपत के युवाओं सहित टीम के सदस्य 280 फुट लंबा तिरंगा फहराते हु?
- फोटो : Sonipat
हौसला बुलंद हो तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। इस इसे सत्य कर दिखाया है न्यू ब्रह्म कॉलोनी निवासी सोहन पिंडारी, मनीषा आंतिल व रविंद्र आंतिल ने। इन्होंने देहरादून से 200 किलोमीटर दूर स्थित सकरी में 12500 फुट ऊंची केदार कांटा चोटी पर 280 फुट का तिरंगा लहराकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। विशेष बात यह है कि इन ट्रैकर्स ने बर्फ से ढकी चोटी पर माइनस 16 डिग्री तापमान में यह कारनामा कर नई पहचान बनाई है।
इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के तत्वावधान में दूसरी बार राष्ट्रीय केदार कांटा विंटर ट्रैक का आयोजन किया गया। उत्तराखंड के देहरादून जिले से 200 किलोमीटर दूर सकरी में 29 दिसंबर से 4 जनवरी तक शिविर का आयोजन किया गया। इसमें भारत व साउथ के ट्रैकर ने भाग लिया। इंडिया एडवेंचर फाउंडेशन के एक ग्रुप में सोनीपत के ब्रह्म कॉलोनी निवासी सोहन पिंडारी, मनीषा आंतिल व रविंद्र आंतिल समेत 8 राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के 26 ट्रैकर शामिल हुए। इस ग्रुप का नेतृत्व पर्वतारोही रोहित कुमार झा ने किया। 2 जनवरी को 12500 फुट ऊंची चोटी केदार कांटा पर माइनस 16 डिग्री में 280 फुट का तिरंगा लहराकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया। इस साहसिक कार्य के लिए इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के अध्यक्ष इफरीम अहमद, प्रबंधक रिहाना अहमद, सीईओ गयस अहमद व टीम लीडर पर्वतारोही रोहित कुमार झा ने हरियाणा टीम सहित सभी को इसके लिए बधाई दी।
बर्फ पर जूतों में हो रही थी फिसलन, फिर भी पीछे नहीं हटे कदम
न्यू ब्रह्म कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय सोहन पिंडारी ने बताया कि 12500 फुट ऊंची चोटी केदार कांटा पर पहुंचने का सफर बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था। 29 दिसंबर की रात 3 बजे हमारे ग्रुप ने ट्रैकिंग शुरू की। अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में चलना बेहद मुश्किल हो रहा था। यही नहीं बर्फ पर जूतों में फिसलन हो रही थी, हमारे कदम पीछे नहीं हटे और निरंतर दुर्गम रास्ते पर आगे बढ़ते रहे। 23 ट्रैकर्स के साथ हमने 280 फुट लंबा तिरंगा लहराया। यह क्षण हमारे लिए गौरव भरे थे। यह कारनामा हमारे लिए किसी सपने से कम नहीं था, क्योंकि यह ट्रैक बर्फीले रास्तों व घिरा हुआ था।
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हाथ-पैर ने बंद कर दिया था काम करना
सोहन ने बताया कि हमारी टीम ने रात के अंधेरे में चढ़ाई शुरू की थी। माइनस 16 डिग्री तापमान में चढ़ाई शुरू करने के बाद टीम के सदस्यों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जैसे-जैसे ऊपर चढ़ते जा रहे थे, ऑक्सीजन का लेवल भी कम होता जा रहा था। कई बार ऐसी परिस्थितियां भी बनीं कि हिम्मत जवाब देने लगी थी। फिर भी बुलंद हौसले से लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमने हिम्मत नहीं हारी। हालांकि सांस फूलने पर ग्रुप के तीन साथियों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा। ग्रुप के 23 युवक-युवतियों ने दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प और विश्वास के साथ लगातार चढ़ाई कर लक्ष्य हासिल किया।
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इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के तत्वावधान में दूसरी बार राष्ट्रीय केदार कांटा विंटर ट्रैक का आयोजन किया गया। उत्तराखंड के देहरादून जिले से 200 किलोमीटर दूर सकरी में 29 दिसंबर से 4 जनवरी तक शिविर का आयोजन किया गया। इसमें भारत व साउथ के ट्रैकर ने भाग लिया। इंडिया एडवेंचर फाउंडेशन के एक ग्रुप में सोनीपत के ब्रह्म कॉलोनी निवासी सोहन पिंडारी, मनीषा आंतिल व रविंद्र आंतिल समेत 8 राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के 26 ट्रैकर शामिल हुए। इस ग्रुप का नेतृत्व पर्वतारोही रोहित कुमार झा ने किया। 2 जनवरी को 12500 फुट ऊंची चोटी केदार कांटा पर माइनस 16 डिग्री में 280 फुट का तिरंगा लहराकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया। इस साहसिक कार्य के लिए इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के अध्यक्ष इफरीम अहमद, प्रबंधक रिहाना अहमद, सीईओ गयस अहमद व टीम लीडर पर्वतारोही रोहित कुमार झा ने हरियाणा टीम सहित सभी को इसके लिए बधाई दी।
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बर्फ पर जूतों में हो रही थी फिसलन, फिर भी पीछे नहीं हटे कदम
न्यू ब्रह्म कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय सोहन पिंडारी ने बताया कि 12500 फुट ऊंची चोटी केदार कांटा पर पहुंचने का सफर बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था। 29 दिसंबर की रात 3 बजे हमारे ग्रुप ने ट्रैकिंग शुरू की। अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में चलना बेहद मुश्किल हो रहा था। यही नहीं बर्फ पर जूतों में फिसलन हो रही थी, हमारे कदम पीछे नहीं हटे और निरंतर दुर्गम रास्ते पर आगे बढ़ते रहे। 23 ट्रैकर्स के साथ हमने 280 फुट लंबा तिरंगा लहराया। यह क्षण हमारे लिए गौरव भरे थे। यह कारनामा हमारे लिए किसी सपने से कम नहीं था, क्योंकि यह ट्रैक बर्फीले रास्तों व घिरा हुआ था।
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हाथ-पैर ने बंद कर दिया था काम करना
सोहन ने बताया कि हमारी टीम ने रात के अंधेरे में चढ़ाई शुरू की थी। माइनस 16 डिग्री तापमान में चढ़ाई शुरू करने के बाद टीम के सदस्यों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जैसे-जैसे ऊपर चढ़ते जा रहे थे, ऑक्सीजन का लेवल भी कम होता जा रहा था। कई बार ऐसी परिस्थितियां भी बनीं कि हिम्मत जवाब देने लगी थी। फिर भी बुलंद हौसले से लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमने हिम्मत नहीं हारी। हालांकि सांस फूलने पर ग्रुप के तीन साथियों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा। ग्रुप के 23 युवक-युवतियों ने दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प और विश्वास के साथ लगातार चढ़ाई कर लक्ष्य हासिल किया।