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CWG 2022: बर्मिंघम में रवि दहिया ने मचाया धमाल, फिर भी जश्न नहीं मना पाया गांव नाहरी

Sun, 07 Aug 2022 10:44 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 07 Aug 2022 10:44 PM IST
सार

रवि दहिया के पिता ने कहा कि रवि के गांव पहुंचने पर शानदार स्वागत होगा। पूरा गांव इसमें शामिल होगा। रवि 6 साल की उम्र से ही खेत में जाकर कुश्ती सीखता था, प्रतिभा दिखी तो परिजनों ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में पहुंचाया था।

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Ravi Dahiya won gold medal in Commonwealth Games, could not celebrate in village Nahari
रवि दहिया - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा के सोनीपत के गांव नाहरी के लाडले रवि दहिया ने इंग्लैंड के बर्मिंघम में भी धमाल मचा दिया। जापान के टोक्यो में रजत पदक जीतकर सुर्खियों में आए रवि दहिया का उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रहा। हालांकि बेटे के सोना जीतने के बाद भी नाहरी में ओलंपिक की तरह जश्न नहीं मनाया गया। गांव के एक युवक की असामयिक मौत के चलते जश्न का कार्यक्रम नहीं हो किया गया। हालांकि पिता राकेश दहिया ने कहा कि रवि के लौटने पर उसका शानदार स्वागत किया जाएगा। 

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रवि दहिया शानदार प्रदर्शन पर यूं तो पूरे देश में जश्न का माहौल हैं। लेकिन उनके गांव नाहरी में इस बार उत्साह फीका ही रहा। रवि के चाचा राजेश ने बताया कि भतीजे रवि दहिया ने पूरी दुनिया में उनके परिवार व गांव का नाम रोशन किया है। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उन्होंने कहा कि रवि ने पूरे मुकाबले में बचाव का सहारा नहीं लिया, बल्कि सीधे अटैक को अपनाया और अपने सभी मुकाबले एक तरफा जीत दर्ज की। 
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रवि के पिता राकेश दहिया ने बताया कि रवि 6 साल की उम्र से ही खेत में जाकर वहां बने अखाड़े में जोर आजमाइश करने लगा था। वह कच्ची मिट्टी में खूब कलाबाजियां खाता था। उसकी फुर्ती देख गांव के मशहूर पहलवान व कोच हसंराज ने उसे कुश्ती सिखाने शुरू कर दिया। धीरे-धीरे रवि ने गांव के दूसरे बच्चों को पछाड़ना शुरू कर दिया। रवि में कुश्ती के प्रति लालसा को देखते हुए उसके परिजनों ने उसे दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में अभ्यास शुरू करा दिया।
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जहां पर नामी खिलाड़ी पहले से ही मौजूद थे। ऐसे में रवि के लिए तैयारी करना आसान हो गया। वह योगेश्वर दत्त व सुशील कुमार जैसे बड़े खिलाड़ियों के मैच बहुत ध्यान से देखता था और मन ही मन वैसे ही खेल खेलने की ठान लेता था।पिता राकेश ने बताया कि रवि के खेल को देखकर उसके गुरु महाबली सतपाल ने उस पर खास ध्यान देने शुरू कर दिए थे। जब रवि 14 साल का था तो सतपाल महाबली ने कह दिया था कि यह लड़का एक दिन विश्व चैंपियन बनेगा।

Ravi Dahiya won gold medal in Commonwealth Games, could not celebrate in village Nahari
गांव नाहरी में रवि दहिया के पिता राकेश दहिया का मुंह मीठा कराते खेल प्रेमी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

वर्ल्ड और एशियन चैंपियनशिप में जीत चुके हैं पदक
रवि दहिया ने हमेशा अपनी पहलवानी से सभी को प्रभावित किया है। राष्ट्रमंडल के अपने स्वर्ण व ओलंपिक में रजत के अलावा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप व एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में विरोधियों को पटखनी दे चुके हैं। वर्ष 2019 में रवि ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। रवि ने जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। वर्ष 2017 में सीनियर नेशनल में रवि को चोट के कारण करीब एक साल तक मैट से दूर रहना पड़ा था। लेकिन इसका उनके प्रदर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह एशियन चैंपियनशिप में लगातार वर्ष 2020, 2021 व 2022 में पदक जीत चुके हैं।

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