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मौसम की मार से घटा उत्पादन : गेहूं-सरसों की पैदावार में गिरावट, क्रॉप कटिंग पूरी

Sat, 02 May 2026 03:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sat, 02 May 2026 03:04 AM IST
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Production Hit by Adverse Weather: Decline in Wheat and Mustard Yields; Crop Cutting Completed
सोनीपत। रबी सीजन के अंतिम चरण में बदले मौसम के मिजाज का असर इस बार फसलों के उत्पादन पर साफ तौर पर दिखाई दिया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कृषि विभाग की तरफ से कराई गई क्रॉप कटिंग प्रक्रिया में गेहूं और सरसों दोनों की पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज की गई है।
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विभाग अब अंतिम रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजने की प्रक्रिया में जुटा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जहां गेहूं का उत्पादन 4937 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया था वहीं इस बार यह घटकर करीब 4850 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गया है।
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इसी तरह सरसों की पैदावार भी 2142 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर लगभग 2100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। हालांकि गिरावट बहुत अधिक नहीं है लेकिन मौसम के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
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कृषि विभाग के अनुसार रबी सीजन की शुरुआत में मौसम अनुकूल रहा जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही थी। मार्च के अंतिम दिनों और अप्रैल के शुरुआती सप्ताह में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ और बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा।

क्रॉप कटिंग प्रक्रिया के तहत गेहूं के लिए 1388 सैंपल लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जिसमें से 1337 सैंपल दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं सरसों के लिए भी 1388 सैंपल का लक्ष्य था लेकिन कम रकबे के चलते 1108 सैंपल ही लिए गए। प्रत्येक गांव से औसतन चार सैंपल लेकर उत्पादन का आकलन किया गया है।

जिले में इस बार सरसों की खेती करीब 10,600 एकड़ में की गई थी। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी सीजन में कुल 7107 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले जहां 20 से 30 हजार किसान बीमा करवाते थे अब यह संख्या घटकर काफी कम हो गई है जो चिंता का विषय है।



क्रॉप कटिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है और रिपोर्ट जल्द ही मुख्यालय भेज दी जाएगी। इसी आधार पर बीमा कंपनियां मुआवजे का निर्धारण करेंगी। खरीफ सीजन के लिए फसल बीमा योजना की नई गाइडलाइन भी शीघ्र जारी की जाएगी ताकि किसानों को समय रहते योजना का लाभ मिल सके।
- डॉ. पीके गुलिया, कृषि उपनिदेशक
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