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Sonipat News: प्रदूषण का स्तर बढ़ा, अस्पताल में पहुंचने लगे सांस के मरीज

Sat, 25 Oct 2025 02:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sat, 25 Oct 2025 02:34 AM IST
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Pollution levels rise, respiratory patients begin arriving at hospitals
सोनीपत। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप)-2 की पाबंदियां लागू होने के बाद भी हवा की सेहत में सुधार नहीं हो रहा है। वायु प्रदूषण के चलते जिला नागरिक अस्पताल में सांस, दमा, छाती रोग के मरीज बढ़े हैं। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 220 दर्ज किया गया।
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अस्थमा, सांस की गंभीर बीमारियों में से एक है। इसके कारण कुछ स्थितियों में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। प्रदूषण के कारण दमा पीड़ित मरीज की श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। जिन लोगों को सांस की दिक्कत होती है उन्हें अपने आहार और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
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प्रदूषण से प्रभावित होकर लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सांस व छाती में जकड़न के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में अन्य बीमारियों की तुलना में खांसी, जुकाम, गले में खराश के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं।
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अस्पताल की ओपीडी में पहले एलर्जी, सांस-दमा पीड़ितों की संख्या 50 से कम थे। अब प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद 80-100 मरीज उपचार कराने पहुंच रहे है। चिकित्सकों की ओर से मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वह उच्च प्रदूषण वाले घंटों में बाहर न निकलें और प्रदूषण के संपर्क में कम से कम आएं। जो लोग पहले से ही सांस की दवा ले रहे हैं, उन्हें दवा जारी रखने की जरूरत है।

छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएस पूनिया ने कहा कि जितनी अपने आसपास सफाई होगी, उतना ही प्रदूषण कम होगा। एलर्जी और जुकाम-खांसी पीड़ित को अनिवार्य रूप से मास्क लगाना चाहिए। खांसी, जुकाम, गला खराब, बुखार है तो तुरंत चिकित्सक से दवा लें। सड़क पर सैर न करें। विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में लें।


यह एहतियात बरतें

घर से बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं। 60 से अधिक उम्र के सांस-दमा के गंभीर मरीजों को फ्लू वैक्सीन लगवा सकते हैं। एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-सी का इस्तेमाल जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में संतरा-आंवला व रेशेदार फल का सेवन करें।नियमित रूप से हाथ धोएं।
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