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साइबर ठगों का सुराग लगाने में जुटी पुलिस
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सोनीपत। बहालगढ़ रोड स्थित बिजली उपकरण बनाने वाली एक कंपनी के बैंक खाते को हैक कर 1.89 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में साइबर टीम ने जांच तेज कर दी है। पुलिस के लिए यह मामला चुनौती बना हुआ है। मामले में ठगों तक पहुंचने के लिए तीन टीमें बनाई गई हैं। टीम एटीएम बूथ के सीसीटीवी के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस ने पैसे ट्रांसफर करने में प्रयुक्त हुए बैंक खातों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इसमें अभी तक करीब दो दर्जन बैंक खातों का प्रयोग हो चुका है।
ट्रांसफार्मर बनाने वाली कंपनी ईसीई के साथ हुई ठगी साइबर अपराध का बड़ा मामला है। इसको लेकर कंपनी के सीनियर मैनेजर प्रदीप रस्तोगी ने मुकदमा दर्ज कराया है। कंपनी प्रबंधन के अनुसार साइबर ठगों ने उनके किसी अधिकारी-कर्मचारी से संपर्क ही नहीं किया है और 1.89 करोड़ रुपये कंपनी के खाते से ट्रांसफर कर लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने ठगी के साथ ही आईटी एक्ट की धारा भी जोड़ी है। जिले में साइबर थाना बनने के बाद यह साइबर ठगी का यह सबसे बड़ा मामला है। एसपी हिमांशु गर्ग भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। साइबर थाना पुलिस से इस मामले में लगातार अपडेट लिया जा रहा है। पुलिस को जांच में साइबर ठगों की संख्या कई होने की जानकारी मिली है। प्रारंभिक जांच से लगता है कि पहले से ही षड्यंत्र कर किया गया था। साइबर ठगी को शाम को पांच बजे के बाद अंजाम दिया गया, जब बैंकों के बंद होने का समय था। इसके साथ ही ठगी के पैसे पश्चिमी बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र के दर्जनभर से ज्यादा खातों में ट्रांसफर किए गए। जिससे एक ही खाते में बड़ी राशि पहुंचने पर सिस्टम उसको सीज न कर दे। साइबर ठगों के साथी तीनों राज्यों में पहले से ही तैयार थे। उन्होंने दर्जनभर एटीएम का प्रयोग कर काफी राशि निकाल ली। उसके बाद बचे हुए पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए थे। पुलिस पता लगा रही है कि तीनों राज्यों में एक ही साइबर गैंग काम कर रहा था या वहां पर दूसरे गैंग के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।
वर्जन
साइबर ठगों द्वारा जिन खातों में ठगी के पैसे भेजे गए उनको तुरंत खाली कर लिया गया। बड़ी धनराशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली गई। मामले में तीन टीम लगी है। अलग-अलग प्रदेशों में छापे मारे जा रहे हैं। जल्द ही साइबर गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी शुरू कर दी जाएगी।
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-इंस्पेक्टर राजीव कुमार, प्रभारी साइबर थाना, सोनीपत
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ट्रांसफार्मर बनाने वाली कंपनी ईसीई के साथ हुई ठगी साइबर अपराध का बड़ा मामला है। इसको लेकर कंपनी के सीनियर मैनेजर प्रदीप रस्तोगी ने मुकदमा दर्ज कराया है। कंपनी प्रबंधन के अनुसार साइबर ठगों ने उनके किसी अधिकारी-कर्मचारी से संपर्क ही नहीं किया है और 1.89 करोड़ रुपये कंपनी के खाते से ट्रांसफर कर लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने ठगी के साथ ही आईटी एक्ट की धारा भी जोड़ी है। जिले में साइबर थाना बनने के बाद यह साइबर ठगी का यह सबसे बड़ा मामला है। एसपी हिमांशु गर्ग भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। साइबर थाना पुलिस से इस मामले में लगातार अपडेट लिया जा रहा है। पुलिस को जांच में साइबर ठगों की संख्या कई होने की जानकारी मिली है। प्रारंभिक जांच से लगता है कि पहले से ही षड्यंत्र कर किया गया था। साइबर ठगी को शाम को पांच बजे के बाद अंजाम दिया गया, जब बैंकों के बंद होने का समय था। इसके साथ ही ठगी के पैसे पश्चिमी बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र के दर्जनभर से ज्यादा खातों में ट्रांसफर किए गए। जिससे एक ही खाते में बड़ी राशि पहुंचने पर सिस्टम उसको सीज न कर दे। साइबर ठगों के साथी तीनों राज्यों में पहले से ही तैयार थे। उन्होंने दर्जनभर एटीएम का प्रयोग कर काफी राशि निकाल ली। उसके बाद बचे हुए पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए थे। पुलिस पता लगा रही है कि तीनों राज्यों में एक ही साइबर गैंग काम कर रहा था या वहां पर दूसरे गैंग के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।
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साइबर ठगों द्वारा जिन खातों में ठगी के पैसे भेजे गए उनको तुरंत खाली कर लिया गया। बड़ी धनराशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली गई। मामले में तीन टीम लगी है। अलग-अलग प्रदेशों में छापे मारे जा रहे हैं। जल्द ही साइबर गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी शुरू कर दी जाएगी।
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-इंस्पेक्टर राजीव कुमार, प्रभारी साइबर थाना, सोनीपत