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Sonipat News: पौष अमावस्या आज, पितृदोष से पा सकते हैं मुक्ति
Wed, 10 Jan 2024 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 10 Jan 2024 11:53 PM IST
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पंडित अमित शौनक।
सोनीपत। साल 2024 की पहली अमावस्या यानी पौष अमावस्या वीरवार को है। इस दिन सूर्य उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर करेंगे और शनि शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण में गोचर करेंगे। इसका सभी राशियों पर शुभ और अशुभ प्रभाव रहने वाला है। पौष माह की अमावस्या तिथि 10 जनवरी को रात 8:11 बजे से शुरू होगी और 11 जनवरी शाम 5:27 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदय तिथि के अनुसार अमावस्या वीरवार को मनाई जाएगी।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि पौष माह को पितरों को समर्पित माह माना जाता है। इसे छोटा श्राद्ध पक्ष भी कहते है। जिसमें पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के अगले दिन अमावस्या तिथि पड़ती है। इस साल 2024 की पहली अमावस्या 11 जनवरी को है। इस दिन साधक गंगा में स्नान-दान करने के बाद भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर पितरों का तर्पण करें। ऐसा करने से इंसान को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पंडित अमित शौनक ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार स्नान व दान-दक्षिणा का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। पितरों के तर्पण के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
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पितरों की तृप्ति के लिए करें यह उपाय
अमावस्या तिथि पितरों की तृप्ति के लिए अहम मानी जाती है। कुंडली में पितृ दोष होने से अमावस्या के दिन पितरों के तर्पण और पिंडदान करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। शाम के समय पीपल के वृक्ष के पास दीपक जलाकर रखें। तुलसी के पौधे की परिक्रमा करनी चाहिए।
इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करना बेहद श्रेष्ठ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर अर्घ्य दें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और उपवास करें। इस दिन पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि पौष माह को पितरों को समर्पित माह माना जाता है। इसे छोटा श्राद्ध पक्ष भी कहते है। जिसमें पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के अगले दिन अमावस्या तिथि पड़ती है। इस साल 2024 की पहली अमावस्या 11 जनवरी को है। इस दिन साधक गंगा में स्नान-दान करने के बाद भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर पितरों का तर्पण करें। ऐसा करने से इंसान को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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पंडित अमित शौनक ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार स्नान व दान-दक्षिणा का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। पितरों के तर्पण के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
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पितरों की तृप्ति के लिए करें यह उपाय
अमावस्या तिथि पितरों की तृप्ति के लिए अहम मानी जाती है। कुंडली में पितृ दोष होने से अमावस्या के दिन पितरों के तर्पण और पिंडदान करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। शाम के समय पीपल के वृक्ष के पास दीपक जलाकर रखें। तुलसी के पौधे की परिक्रमा करनी चाहिए।
इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करना बेहद श्रेष्ठ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर अर्घ्य दें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और उपवास करें। इस दिन पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।