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लकवा : एलटी प्लस का इंजेक्शन देकर महिला को 24 घंटे में किया स्वस्थ

Wed, 01 Dec 2021 12:02 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 12:02 PM IST
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Paralysis: LT plus injection made the woman healthy in 24 hours
जिला नागरिक में अस्पताल लकवाग्रस्त गीता के साथ फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा व नर्सिंग ऑफिसर। संवा? - फोटो : Sonipat
लकवे का इलाज अब जिला नागरिक अस्पताल में संभव है। थ्रंबोलाइसिस तकनीक (इंजेक्शन विधि) से जिला नागरिक अस्पताल में लकवे का इलाज शुरू किया गया है। अब तक चार मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है। सोमवार को गांव झुंडपुर से लकवाग्रस्त महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद फिजिशयन डॉ. शैलेंद्र राणा ने थ्रंबोलाइसिस से एलटी प्लस इंजेक्शन देकर महिला को 24 घंटे तक पैरों पर खड़ा कर दिया।
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गांव झुंडपुर की रहने वाले 45 वर्षीय गीता का सोमवार सुबह करीब 9 बजे शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। लकवाग्रस्त होने के बाद उसके आधे हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। तभी परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल में पहुंचे और लकवाग्रस्त महिला को भर्ती कराया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने थ्रंबोलाइसिस तकनीक के माध्यम से गीता को एलटी प्लस इंजेक्शन दिया। यह इंजेक्शन जिला अस्पताल में मरीजों को मुफ्त लगाया जाता है। यह इंजेक्शन मार्केट में करीब 48 हजार रुपये में मिलता है। इंजेक्शन देने के बाद चिकित्सक ने नर्सिंग ऑफिसर सुमन मेहला व प्रवीन शर्मा को लकवाग्रस्त महिला की देखरेख के लिए जिम्मेदारी दी। इंजेक्शन देने के बाद हर घंटे महिला के शरीर पर अनुकूल असर होने लगा और 24 घंटे में लकवा पीड़ित गीता अपने पैरों पर खड़ी हो गई। इस पर परिजनों ने चिकित्सक व स्टाफ के कार्य की सराहना की।
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लकवाग्रस्त होने के साढ़े चार घंटे के अंदर दिया जा सकता है उपचार
फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि तीव्र स्ट्रोक या लकवा किसी भी उम्र में हो सकता है। यह 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी हो सकता है। देश में तीव्र स्ट्रोक/लकवा से 10 से 15 प्रतिशत मरीज 40 से कम उम्र के होते हैं। थ्रंबोलाइसिस तकनीक से उपचार 18 साल से ऊपर के किसी भी मरीज को दिया जा सकता है। इस तकनीक से युवाओं का उपचार करने पर रिजल्ट बहुत ही अच्छा है। थ्रंबोलाइसिस तकनीक से लकवाग्रस्त होने के साढ़े चार घंटे के अंदर यह उपचार दिया जा सकता है। लकवाग्रस्त मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि जल्द उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि थ्रंबोलाइसिस चिकित्सा के उपयोग व जागरूकता पर जोर देने की जरूरत है। लोगों को थ्रंबोलाइसिस चिकित्सा का लाभ व स्ट्रोक के लक्षण के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
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वर्जन
जिला नागरिक अस्पताल में लकवाग्रस्त मरीजों का इलाज संभव है। थ्रंबोलाइसिस तकनीक के माध्यम से लकवाग्रस्त मरीज को साढ़े चार घंटे के अंदर इंजेक्शन देना पड़ता है। इसके बाद मरीज के स्वास्थ्य में सुधार आने लगता है। जिला अस्पताल में अब तक चार मरीजों को ठीक किया जा चुका है।
- डॉ. संदीप लठवाल, उप चिकित्सा अधीक्षक जिला नागरिक अस्पताल
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