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Haryana: पैरालंपिक स्वर्ण विजेता धर्मबीर नैन बोले- अर्जुन पुरस्कार से खुश; खेल रत्न और नौकरी की चाह

Fri, 03 Jan 2025 01:39 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 03 Jan 2025 01:39 PM IST
सार

धर्मबीर ने बताया कि उन्होंने 2018 के एशियन खेलों में रजत पदक जीता था। उस समय कई खिलाड़ियों को प्रथम श्रेणी की सरकारी नौकरियां दी गईं, लेकिन उन्हें अब तक यह सुविधा नहीं मिली।

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Paralympic gold medalist Dharambir Nain said- happy with Arjun Award, wants Khel Ratna and job
पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता धर्मबीर नैन - फोटो : संवाद

विस्तार

सोनीपत के गांव भदाना और वर्तमान में विशाल नगर निवासी पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता धर्मबीर नैन को अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। धर्मबीर ने पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर की लेकिन साथ ही अपनी उम्मीदों और अपेक्षाओं को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि अर्जुन पुरस्कार मिलने पर गर्व है, लेकिन खेल रत्न पुरस्कार की उम्मीद थी। साथ ही अगर सरकार की ओर से नौकरी मिलती, तो खुशी दोगुनी हो जाती।

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खेल में योगदान और सम्मान की उम्मीद
पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले धर्मबीर ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतना गर्व की बात होती है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जब सम्मान मिलता है, तो मनोबल बढ़ता है। लेकिन, पिछली बार ओलंपिक और पैरालंपिक के सभी पदक विजेताओं को सीधा खेल रत्न पुरस्कार दिया गया था। इस बार केवल एक पैरालंपिक विजेता को खेल रत्न दिया गया, जबकि बाकी को अर्जुन पुरस्कार। यह भेदभाव दुखद है।

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नौकरी की मांग और लंबा संघर्ष
धर्मबीर ने बताया कि उन्होंने 2018 के एशियन खेलों में रजत पदक जीता था। उस समय कई खिलाड़ियों को प्रथम श्रेणी की सरकारी नौकरियां दी गईं, लेकिन उन्हें अब तक यह सुविधा नहीं मिली। उन्होंने इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें जीत मिली, लेकिन नौकरी अब तक नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह से भी मुलाकात की थी। उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।

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कठिनाइयों से उठकर सफलता की कहानी
धर्मबीर ने अपनी जिंदगी की चुनौतियों को भी साझा किया। 2012 में रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के कारण वह निराश हो गए थे। लेकिन, गुरु अमित सरोहा के मार्गदर्शन में उन्होंने अभ्यास शुरू किया और आज इस मुकाम तक पहुंचे।

भविष्य की उम्मीदें
धर्मबीर ने कहा कि सरकार से उम्मीद है कि उन्हें खेल रत्न पुरस्कार और नौकरी के रूप में उनका अधिकार मिलेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के प्रति समान व्यवहार की अपील की और कहा कि यह कदम खेल को प्रोत्साहन देने में मदद करेगा।

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