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अब प्रदेश के किसानों ने अख्तियार किया कड़ा रुख, दो नए मुद्दे जोड़े
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कुंडली बॉर्डर पर पत्रकारों से बातचीत हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य।
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। कुंडली बॉडर पर जारी किसानों के आंदोलन को वापस लिए जाने की अटकलों पर एक बार फिर विराम लगता दिख रहा है। हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने बैठक कर तीन कानूनों की वापसी के अलावा बाकी मांगों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। हरियाणा एसकेएम के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि एमएसपी गारंटी कानून पर लीपापोती मंजूर नहीं होगी। सरकार को यह घोषणा करनी होगी कि जो कमेटी बनाई जा रही है वह एमएसपी गारंटी कानून जरूर बनाएगी। साथ ही मोर्चा ने पहले की मांगों में दो नई मांगें भी शामिल कर ली हैं। नई मांगों में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक-2013 वापस लेने व संपत्ति क्षतिपूर्ति एक्ट वापस लेने की मांग की गई है। कुंडली बॉर्डर पर बुधवार को पूरा दिन बैठकों का दौर चला। हरियाणा किसान मोर्चा के बैनर तले 26 संगठनों ने बैठक की, जिसका नेतृत्व मनदीप सिंह नाथवान ने किया। उनके अलावा बैठक में इंद्रजीत सिंह, सुरेश गोयत, लखविंद्र, प्रहलाद, संतोख सिंह, सेवा सिंह आर्य आदि मौजूद रहे।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब व हरियाणा में स्थिति अलग-अलग है। हरियाणा में भाजपा की सरकार है, इसीलिए किसानों पर दर्ज मुकदमों को फिलहाल वापस नहीं लिया गया है, जबकि पंजाब में यह घोषणा कर दी गई है। साथ ही हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि दो नई मांगों को शामिल किया जाएगा, जो यहां के किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इनमें पहली भूमि अधिग्रहण विधेयक-2013 को वापस लेने की मांग है जबकि दूसरी मांग संपत्ति क्षतिपूर्ति कानून वापस लेने की है। इसके अलावा एमएसपी गारंटी कानून पर केवल कमेटी का गठन मंजूर नहीं है, बल्कि सरकार को यह घोषणा करनी होगी कि जिस कमेटी का गठन किया गया है वह एमएसपी गारंटी कानून लागू करेगी।
वहीं, हरियाणा में किसानों पर दर्ज सभी 48 हजार मुकदमे वापस लेने होंगे। शहीद किसानों के आश्रितों को नौकरी व सरकार से टकराव में घायलों को मुआवजा देना होगा। साथ ही कुंडली बॉर्डर पर शहीद किसानों की याद में एक स्मारक भी बनाना होगा। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि थानों में बंद किसानों के ट्रैक्टर व अन्य वाहन भी छोड़ने होंगे। लखीमपुर के दोषियों को सजा देनी होगी। इसके अलावा कसार गांव की घटना में जेल में बंद जींद के दो ग्रामीणों को छोड़ना होगा।
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बैठक में नहीं पहुंचे गुरनाम चढूनी
एक बार फिर हरियाणा के आंदोलनकारी किसान दो गुटों में नजर आए। हरियाणा किसान मोर्चा की बैठक में गुरनाम सिंह चढूनी नहीं पहुंचे। इस पर मोर्चा के नेताओं ने सवाल को टालने का प्रयास किया और कहा कि यह उनका अपना मत है। चुनाव लड़ने के मुद्दे पर कहा कि कोई भी साथी चुनाव लड़ सकता है, लेकिन मोर्चा चुनाव नहीं लड़ रहा। इससे पहले गुरनाम चढूनी हरियाणा किसान मोर्चा पर सवाल उठा चुके हैं।
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बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब व हरियाणा में स्थिति अलग-अलग है। हरियाणा में भाजपा की सरकार है, इसीलिए किसानों पर दर्ज मुकदमों को फिलहाल वापस नहीं लिया गया है, जबकि पंजाब में यह घोषणा कर दी गई है। साथ ही हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि दो नई मांगों को शामिल किया जाएगा, जो यहां के किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इनमें पहली भूमि अधिग्रहण विधेयक-2013 को वापस लेने की मांग है जबकि दूसरी मांग संपत्ति क्षतिपूर्ति कानून वापस लेने की है। इसके अलावा एमएसपी गारंटी कानून पर केवल कमेटी का गठन मंजूर नहीं है, बल्कि सरकार को यह घोषणा करनी होगी कि जिस कमेटी का गठन किया गया है वह एमएसपी गारंटी कानून लागू करेगी।
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वहीं, हरियाणा में किसानों पर दर्ज सभी 48 हजार मुकदमे वापस लेने होंगे। शहीद किसानों के आश्रितों को नौकरी व सरकार से टकराव में घायलों को मुआवजा देना होगा। साथ ही कुंडली बॉर्डर पर शहीद किसानों की याद में एक स्मारक भी बनाना होगा। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि थानों में बंद किसानों के ट्रैक्टर व अन्य वाहन भी छोड़ने होंगे। लखीमपुर के दोषियों को सजा देनी होगी। इसके अलावा कसार गांव की घटना में जेल में बंद जींद के दो ग्रामीणों को छोड़ना होगा।
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बैठक में नहीं पहुंचे गुरनाम चढूनी
एक बार फिर हरियाणा के आंदोलनकारी किसान दो गुटों में नजर आए। हरियाणा किसान मोर्चा की बैठक में गुरनाम सिंह चढूनी नहीं पहुंचे। इस पर मोर्चा के नेताओं ने सवाल को टालने का प्रयास किया और कहा कि यह उनका अपना मत है। चुनाव लड़ने के मुद्दे पर कहा कि कोई भी साथी चुनाव लड़ सकता है, लेकिन मोर्चा चुनाव नहीं लड़ रहा। इससे पहले गुरनाम चढूनी हरियाणा किसान मोर्चा पर सवाल उठा चुके हैं।