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ग्रांट मिलने के डेढ़ साल बाद तक नहीं की खर्च, कंडम कमरों में पढ़ने के लिए मजबूर विद्यार्थी
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गांव गढ़ी हकीकत स्थित स्कूल की जर्जर बिल्डिंग। संवाद
- फोटो : Sonipat
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गांव गढ़ी हकीकत स्थित राजकीय स्कूल में नए कमरे बनाने के लिए करीब डेढ़ साल पहले ग्रांट जारी की गई थी लेकिन इस ग्रांट का प्रयोग नहीं किया गया। जिससे यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को कभी कंडम कमरों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है तो कभी खुले आसमान के नीचे। अब हालात यह हैं कि निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से भेजी गई ग्रांट में दो ही कमरों का निर्माण हो सकता है। कमरों के निर्माण के लिए अब दोबारा ग्रांट मांगी गई है। डीसी ने समीक्षा बैठक में जारी ग्रांट से कमरों का निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है।
गढ़ी हकीकत गांव स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में तीन कमरे हैं। जिनकी हालत जर्जर है। कमरों का निरीक्षण के बाद पीडब्ल्यूडी ने कमरों को कंडम घोषित कर दिया था। कमरों की हालत ऐसी है कि यहां छत से कभी भी प्लास्टर नीचे गिर जाता है जिससे विद्यार्थियों को इन कमरों में बैठाना जोखिम भरा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि कमरों की जर्जर हालत होने के कारण इन कमरों में कक्षाएं नहीं लगाई जा सकती लेकिन बारिश होने की स्थिति में मजबूरन इन कमरों में कक्षाएं लगानी पड़ती है।
कमरों के लिए जारी किए थे 15 लाख रुपये
शिक्षा अधिकारियों की मानें तो स्कूल के लिए डेढ़ साल पहले शिक्षा विभाग ने तीन कमरों का निर्माण कराने के लिए करीब 15 लाख रुपये की ग्रांट जारी की थी लेकिन स्कूल प्रबंधन कमेटी की तरफ से ग्रांट मिलने के बाद भी स्कूलों में नए कमरों का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया।
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अब बढ़ गई है लागत, दो कमरों का ही हो पाएगा निर्माण
शिक्षा विभाग ने दो साल पहले तीन कमरों के लिए बजट जारी किया था। समय पर बजट खर्च नहीं किया गया। निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से टेंडर का रेट भी बढ़ गया जिस कारण तीन कमरे बनाने के लिए यह बजट कम पड़ रहा है। अब अधिकारियों द्वारा स्कूल में दो ही कमरों का निर्माण कराया जाएगा। स्कूल के लिए दो और कमरों का निर्माण कराने के लिए मुख्यालय से बजट मांगा गया है ताकि विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कमरों का निर्माण कराया जा सके।
गांव गढ़ी हकीकत स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में कमरों के निर्माण कार्य के लिए 15 लाख रुपये की ग्रांट जारी की गई है। अधिकारियों ने स्कूल में कमरों का निर्माण कराने के निर्देश दिए हुए हैं। इस बारे में एसएमसी और स्कूल प्रशासन से भी बातचीत की गई है। कमरों का निर्माण कार्य जल्द शुरू करा दिया जाएगा। स्कूल में दो और कमरों का निर्माण कराने के लिए बजट मांगा हुआ है।
-विष्णु भारद्वाज, एसडीओ, समग्र शिक्षा, सोनीपत।
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गढ़ी हकीकत गांव स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में तीन कमरे हैं। जिनकी हालत जर्जर है। कमरों का निरीक्षण के बाद पीडब्ल्यूडी ने कमरों को कंडम घोषित कर दिया था। कमरों की हालत ऐसी है कि यहां छत से कभी भी प्लास्टर नीचे गिर जाता है जिससे विद्यार्थियों को इन कमरों में बैठाना जोखिम भरा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि कमरों की जर्जर हालत होने के कारण इन कमरों में कक्षाएं नहीं लगाई जा सकती लेकिन बारिश होने की स्थिति में मजबूरन इन कमरों में कक्षाएं लगानी पड़ती है।
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कमरों के लिए जारी किए थे 15 लाख रुपये
शिक्षा अधिकारियों की मानें तो स्कूल के लिए डेढ़ साल पहले शिक्षा विभाग ने तीन कमरों का निर्माण कराने के लिए करीब 15 लाख रुपये की ग्रांट जारी की थी लेकिन स्कूल प्रबंधन कमेटी की तरफ से ग्रांट मिलने के बाद भी स्कूलों में नए कमरों का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया।
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अब बढ़ गई है लागत, दो कमरों का ही हो पाएगा निर्माण
शिक्षा विभाग ने दो साल पहले तीन कमरों के लिए बजट जारी किया था। समय पर बजट खर्च नहीं किया गया। निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से टेंडर का रेट भी बढ़ गया जिस कारण तीन कमरे बनाने के लिए यह बजट कम पड़ रहा है। अब अधिकारियों द्वारा स्कूल में दो ही कमरों का निर्माण कराया जाएगा। स्कूल के लिए दो और कमरों का निर्माण कराने के लिए मुख्यालय से बजट मांगा गया है ताकि विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कमरों का निर्माण कराया जा सके।
गांव गढ़ी हकीकत स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में कमरों के निर्माण कार्य के लिए 15 लाख रुपये की ग्रांट जारी की गई है। अधिकारियों ने स्कूल में कमरों का निर्माण कराने के निर्देश दिए हुए हैं। इस बारे में एसएमसी और स्कूल प्रशासन से भी बातचीत की गई है। कमरों का निर्माण कार्य जल्द शुरू करा दिया जाएगा। स्कूल में दो और कमरों का निर्माण कराने के लिए बजट मांगा हुआ है।
-विष्णु भारद्वाज, एसडीओ, समग्र शिक्षा, सोनीपत।