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Sonipat News: फीस ही नहीं, बच्ची की वर्दी बदलकर अभिभावकों पर डाल रहे बोझ

Thu, 10 Apr 2025 12:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Thu, 10 Apr 2025 12:26 AM IST
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Not just fees, by changing the uniform of the girl child they are putting a burden on the parents
फोटो 31- सोनीपत शहर के एक निजी स्कूल में कक्षा पांचवीं के लिए लगाई गई किताबों की सूची। संवाद - फोटो : mathura
सोनीपत। जिलाभर के निजी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ अभिभावकों के कंधों पर खर्च का बोझ बढ़ चुका है। निजी स्कूलों में जहां किताबों-कॉपियों में कमीशन के खेल का दौर जारी है, वहीं कई स्कूलों में वर्दी, टाई-बेल्ट के बदलाव के साथ भी उनका आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है। नामी स्कूलों में तो वर्दी के अलावा ट्रैक सूट के नाम पर भी लूट है। इसके अलावा गर्मियों व सर्दियों की अलग-अलग वर्दी का प्रावधान रखा गया है।
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निजी स्कूल संचालकों की ओर से हर साल शैक्षणिक सत्र बदलते ही जहां किताबों व कॉपियों के अलावा फीस वृद्धि कर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, वहीं स्कूलों में लगने वाली वर्दी का भी बड़ा खेल खेला जा रहा है। शिक्षा के इन मंदिरों में वर्दी व टाई-बेल्ट का रंग बदलने तो ट्रैक सूट लगवाने के नाम पर कई दुकानदारों से सांठ-गांठ की गई है। गर्मियों में जहां बच्चों को हाफ बाजू की शर्ट व पैंट पहनने के निर्देश दिए जा रहे हैं, वही सर्दियाें में फुल वर्दी का सेट खरीदना अनिवार्य रखा गया है। साथ ही सर्दी में जर्सी की जगह बच्चों को ब्लेजर या कोट स्कूल के निर्धारित रंग, डिजाइन व स्कूल के लोगो लगे खरीदने पड़ते हैं। कई बड़े निजी स्कूलों में वर्दी के नाम पर ट्रैक सूट का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए अलग से दुकान का चयन कर अभिभावकों को वहीं भेजा जा रहा है, ताकि कमीशन का खेल चलता रहे। सप्ताह में छह दिन के लिए दो अलग-अलग रंग की जुराबें लगाई गई हैं। अगर बच्चे स्कूल के हिसाब से वर्दी डालकर स्कूल न जाएं तो इसकी सजा के लिए पीटीआई टीचर रखकर नियम बनाए गए हैं।
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निजी प्रकाशकों से तय रहता है मोटा कमीशन
निजी स्कूलों में किताबों के साथ कॉपियों व अन्य शिक्षण सामग्री पर भी मोटा कमीशन तय किया गया है। शिक्षा विभाग भी इस कमीशन से अंजान बना है। निजी स्कूलों की ओर से पहले ही निजी प्रकाशकों से किताबाें के दाम तय किए गए हैं। स्कूल संचालक अभिभावकों को किताबें मुहैया करवाने के लिए खुद ही विक्रेता का चयन कर लेते हैं। अभिभावकों पर किताबों पर कोई रियायत नहीं दी जा रही है। प्राथमिक से लेकर उच्च स्कूलों तक में बच्चों का दाखिला करवाने के बाद अभिभावकों को 4 से 8 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा स्कूलों में ही अधिक दामों पर प्रशिक्षण सामग्री दी जा रही है।
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