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राणा खेड़ी के लोगों पर भारी अफसरों की लापरवाही, आयुष्मान भारत योजना की जानकारी तक नहीं
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गोहाना (सोनीपत)। आयुष्मान भारत योजना को शुरू हुए एक साल हो चुका है, लेकिन गांव राणा खेड़ी के लोगों को आयुष्मान भारत योजना के बारे में जानकारी तक नहीं है। यह अफसरों की लापरवाही के कारण है, क्योंकि योजना का प्रचार-प्रसार तक नहीं किया गया। जिसके चलते लोगों को इस योजना के बारे में पता ही नहीं है कि इससे क्या लाभ मिलता है। ग्रामीणों को यह भी नहीं पता है कि उनका नाम लिस्ट में शामिल किया गया है या नहीं। अमर उजाला के अभियान चलाने के बाद ग्रामीणों को योजना के बारे में पता चला है।
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सितंबर 2018 में शुरू हुई थी योजना
आयुष्मान भारत योजना सितंबर 2018 में शुरू हुई थी। इसके लिए वर्ष 2011 के सामाजिक और आर्थिक सर्वे के आधार पर सूची तैयार की गई थी और सूची के तहत ही योजना का लाभ दिया गया था। वर्ष 2011 में गरीबी रेखा से नीचे की सूची में शामिल लोगों को इसका लाभ दिया जाना था। लेकिन गांव राणा खेड़ी में योजना का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया और न ही लोगों को इसके बारे में बताने के लिए कोई टीम पहुंची, जिस कारण से लोगों को योजना का फायदा नहीं मिल रहा है।
जितना प्रचार होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ
गांव में आयुष्मान भारत योजना के कार्ड बनाने के लिए आरोग्य मित्र आए थे। उस समय कार्ड बनवाने के लिए लोगों को संदेश भेजा गया था। उसके साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ओर थी, जिससे हर माह खाते से पैसे काटे जाने की बात कहीं गई थी, उसी के डर से लोगों ने कार्ड नहीं बनवाएं। प्रचार-प्रसार उस स्तर पर नहीं किया गया, जिस तरह से होना चाहिए था।
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-अवतार सिंह, सरपंच, गांव राणा खेड़ी।
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सितंबर 2018 में शुरू हुई थी योजना
आयुष्मान भारत योजना सितंबर 2018 में शुरू हुई थी। इसके लिए वर्ष 2011 के सामाजिक और आर्थिक सर्वे के आधार पर सूची तैयार की गई थी और सूची के तहत ही योजना का लाभ दिया गया था। वर्ष 2011 में गरीबी रेखा से नीचे की सूची में शामिल लोगों को इसका लाभ दिया जाना था। लेकिन गांव राणा खेड़ी में योजना का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया और न ही लोगों को इसके बारे में बताने के लिए कोई टीम पहुंची, जिस कारण से लोगों को योजना का फायदा नहीं मिल रहा है।
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जितना प्रचार होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ
गांव में आयुष्मान भारत योजना के कार्ड बनाने के लिए आरोग्य मित्र आए थे। उस समय कार्ड बनवाने के लिए लोगों को संदेश भेजा गया था। उसके साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ओर थी, जिससे हर माह खाते से पैसे काटे जाने की बात कहीं गई थी, उसी के डर से लोगों ने कार्ड नहीं बनवाएं। प्रचार-प्रसार उस स्तर पर नहीं किया गया, जिस तरह से होना चाहिए था।
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-अवतार सिंह, सरपंच, गांव राणा खेड़ी।