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Sonipat News: 45 लाख रुपये देकर पांच माह में अमेरिका पहुंचे निशांत, जाते ही पकड़े गए

Sat, 08 Feb 2025 02:46 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sat, 08 Feb 2025 02:46 AM IST
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Nishant reached America in five months by paying Rs 45 lakh, caught as soon as he left
फोटो 34: सोनीपत के गांव खानपुर खुर्द में अपनी आपबीती बताते निशांत, साथ में उनके माता-पिता। संवा
सोनीपत। बेहतर भविष्य, बहनों की पढ़ाई का खर्च व पिता का हाथ बंटाने का सपना संजोकर अमेरिका गए खानपुर खुर्द के निशांत सफर और यातनाओं को याद कर सिहर उठते हैं। डंकी रूट से गए गांव खानपुर खुर्द के निशांत को वापस भेज दिया गया है। वह 45 लाख रुपये देकर पांच माह में अमेरिका पहुंचे थे और जाते ही पकड़े गए थे। वापसी में वह 55 घंटे तक बेड़ियों से जकड़े रहे। एयरपोर्ट पर उतरने से एक घंटा पहले बेड़ियां खोलीं गई थी।
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खानपुर खुर्द निवासी निशांत ने बताया कि वह अमेरिका में जाकर अपना भविष्य संवारना चाहते थे। इसके लिए एजेंट से 38 लाख रुपये में सौदा हुआ था। हालांकि बाद में सात लाख रुपये और लिए गए। एजेंट ने मई 2024 में उन्हें अमेरिका भेजने को कार्रवाई शुरू की थी। उन्हें सबसे पहले 27 मई, 2024 को दुबई भेजा गया। वहां एक माह का टूरिस्ट वीजा दिया गया था। वीजा खत्म हो गया तो 15 दिन और रहना पड़ा। जुर्माना देकर वापस भारत आ गए। इसके बाद उन्हें श्रीलंका भेज दिया गया। वहां से भी वापस लाया गया। एजेंट ने इसके बाद अमेरिका भेजने के लिए उन्हें मुंबई भेज दिया। 6 सितंबर, 2024 को फिर से अमेरिका भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। मुंबई से घाना तक फ्लाइट में भेजा गया। उसके बाद अमेरिका तक पहुंचने के लिए बस, टैक्सी व पैदल सफर किया। ब्राजील से आगे भी कई देशों का सफर करवाया गया। जंगल में तीन दिन व रातें बिताई। वहां पर अलग-अलग जगह व देशों के सैकड़ों लोग थे जो अमेरिका में प्रवेश करने के लिए अपने जीवन को दांव पर लगाए हुए थे। 13 जनवरी को दीवार कूद कर अमेरिका में प्रवेश किया तो पुलिस ने पकड़ लिया था। अमेरिका से वापस भेजने के लिए 2 फरवरी को कैंप से निकाला और 5 फरवरी को भारत पहुंचे। अमेरिका में निराश्रित केंद्र से निकालते ही उनको बेड़ियों में बांध दिया था। अमृतसर में जब अमेरिका सैन्य विमान से उतरे तो उससे एक घंटा पहले उनको खोला गया था।
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लगातार 55 घंटे बेड़ियों में जकड़े रखा

निशांत ने बताया कि अमेरिका से लेकर आते समय 55 घंटे तक बेड़ियों में जकड़े रखा गया। उनके हाथ व पैरों को बांधा गया था। ऐसी ही स्थिति में उनको पेट भी भरना पड़ा। उनके साथ ही दूसरे लोगों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया था। अधिकतर लोगों से वॉशरूम तक साफ कराए गए।
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जान पर खेलकर डोंकी बदला, खाने को दिया बीफ व कच्चे चावल

निशांत बताते हैं कि वह जान पर खेलकर डोंकी रूट से गए थे। उन्होंने रास्ते में डोंकी भी बदलना पड़ा। रास्ते में उनका पासपोर्ट, डॉलर व मोबाइल छीन लिया गया। उन्हें ढाई माह में मोबाइल मिला। पनामा के पास उन्हें कई बार जान जोखिम में डालनी पड़ी। वह पांच माह में अमेरिका पहुंचे थे और वहां पहुंचते ही पकड़े गए। उनका अमेरिका पहुंचकर अपना जीवन संवारने का सपना टूट गया है। परिवार पर कर्ज हो गया। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में जब भी दूसरे भारतीयों को वापस भेजा जाए तो अमेरिका सरकार से उनसे अच्छा व्यवहार करने का आग्रह किया जाए।

एजेंट करते हैं धोखा
निशांत बताते हैं कि उसका एजेंट करनाल का था। जिसने बार-बार धोखा किया। मैक्सिको भेजने के बाद सबसे बड़ा धोखा हुआ। वहां से उन्हें सीधा अमेरिका न भिजवाकर दूसरी जगह भिजवाया गया। अगर एजेंट मैक्सिको से सीधा अमेरिका भिजवाता तो उसके साथ ऐसा नहीं होता। एजेंट ने सात लाख रुपये अतिरिक्त लिए लेकिन कोई सुविधा नहीं दिलाई। एक सप्ताह में अमेरिका भिजवाने को कहा था और कई माह में वहां तक पहुंचाया गया।




मैक्सिको में हुआ गलत व्यवहार

मैक्सिको में काफी गलत व्यवहार किया गया। उनके साथ कुछ महिला भी थी। वहां पर आए तीन लोगों ने महिलाओं से बहुत बुरा व्यवहार किया। सभी से लूटपाट की गई। डोंकी उन्हें अंधेरे कमरे में डाल देते थे। उन्हें खाने को बीफ, कच्चे चावल दिए जाते थे। वह गाय को मां मानते हैं। ऐसे में बीफ नहीं खाया।
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