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एनएच 344पी बना ‘खतरों का हाईवे’: दो साल बाद भी अंधेरा, अधूरा ढांचा और अव्यवस्था से जूझते लोग
Sun, 26 Apr 2026 12:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 26 Apr 2026 12:51 AM IST
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फोटो :: सोनीपत के गांव बड़वासनी के पास नेशनल हाईवे-344पी पर बनाई टनल के पास से दौड़ते वाहन। स्रोत
सोनीपत। अर्बन एक्सटेंशन रोड (यूीईआर)-2 परियोजना का अहम हिस्सा नेशनल हाईवे- 344पी शुरू होने के दो साल बाद भी बदहाली और खामियों का पर्याय बना है। करोड़ों की लागत से निर्मित हाईवे आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खतरों का मार्ग बना हुआ है। अंधेरे में डूबे ज्यादातर हिस्से, अधूरी कनेक्टिविटी, बंद निकास और त्रुटिपूर्ण डिजाइन के कारण लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।
नेशनल हाईवे- 344पी पर यात्रा करने वाले यात्रियों का आरोप है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या इस मार्ग पर स्ट्रीट लाइट का अभाव है। यात्री जितेंद्र सिंह व महेश ने बताया कि करीब 29 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के हिस्से में ही रोशनी की व्यवस्था है और वहां लगी लाइट भी अक्सर बंद रहती है। ऊंचाई पर बने इस मार्ग पर अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।
हाईवे को कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे-334बी से नहीं जोड़ा गया है। इंटरचेंज के अभाव में लोगों को 18 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। वाहन चालक राजेंद्र ने बताया कि गांव नाहरा के पास बना निकास मार्ग धार्मिक स्थल के कारण अब तक बंद पड़ा है। दूसरी ओर निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं रोहट गांव के लोगों के लिए हाईवे पर चढ़ने का कोई सुरक्षित मार्ग नहीं है, जिससे वह गलत दिशा से आने को मजबूर हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है।
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इंसेट
बवाना औद्योगिक क्षेत्र में डिजाइन पर उठ रहे सवाल
दिल्ली क्षेत्र स्थित बवाना औद्योगिक क्षेत्र में हाईवे का डिजाइन भी सवालों के घेरे में है। यात्री पंकज व कुनाल ने बताया कि मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर पहले ही इसे नीचे उतार दिया गया है जहां भारी ट्रैफिक और तीन रेड लाइट के कारण लंबे जाम लगते हैं। ऐसे में हाईवे का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।
टोल वसूली को बताया जा रहा गलत
हाईवे पर यात्रा करने वाले मनोज व पुनीत ने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर खामियों और अधूरी सुविधाओं के बावजूद भी यहां टोल वसूली जारी है। जब तक सुविधा बेहतर न हो तब तक टोल नहीं वसूला जाना चाहिए। लोगों ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जनप्रतिनिधियों से शिकायत के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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नेशनल हाईवे- 344पी पर यात्रा करने वाले यात्रियों का आरोप है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या इस मार्ग पर स्ट्रीट लाइट का अभाव है। यात्री जितेंद्र सिंह व महेश ने बताया कि करीब 29 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के हिस्से में ही रोशनी की व्यवस्था है और वहां लगी लाइट भी अक्सर बंद रहती है। ऊंचाई पर बने इस मार्ग पर अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।
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हाईवे को कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे-334बी से नहीं जोड़ा गया है। इंटरचेंज के अभाव में लोगों को 18 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। वाहन चालक राजेंद्र ने बताया कि गांव नाहरा के पास बना निकास मार्ग धार्मिक स्थल के कारण अब तक बंद पड़ा है। दूसरी ओर निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं रोहट गांव के लोगों के लिए हाईवे पर चढ़ने का कोई सुरक्षित मार्ग नहीं है, जिससे वह गलत दिशा से आने को मजबूर हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है।
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बवाना औद्योगिक क्षेत्र में डिजाइन पर उठ रहे सवाल
दिल्ली क्षेत्र स्थित बवाना औद्योगिक क्षेत्र में हाईवे का डिजाइन भी सवालों के घेरे में है। यात्री पंकज व कुनाल ने बताया कि मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर पहले ही इसे नीचे उतार दिया गया है जहां भारी ट्रैफिक और तीन रेड लाइट के कारण लंबे जाम लगते हैं। ऐसे में हाईवे का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।
टोल वसूली को बताया जा रहा गलत
हाईवे पर यात्रा करने वाले मनोज व पुनीत ने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर खामियों और अधूरी सुविधाओं के बावजूद भी यहां टोल वसूली जारी है। जब तक सुविधा बेहतर न हो तब तक टोल नहीं वसूला जाना चाहिए। लोगों ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जनप्रतिनिधियों से शिकायत के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

फोटो :: सोनीपत के गांव बड़वासनी के पास नेशनल हाईवे-344पी पर बनाई टनल के पास से दौड़ते वाहन। स्रोत