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लापरवाही : स्कूल संचालक ने बना रखी थीं चार कमरों के बीच में 4-4 इंच की दीवार
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पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक घायल छात्र के परिजनों से हाल जानते हुए। संवाद
- फोटो : Sonipat
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जीवानंद स्कूल में छत गिरने के मामले में शनिवार को खंड शिक्षा अधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में स्कूल की कई खामियां उजागर की गई हैं, जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है। जांच में सामने आया है कि माध्यमिक स्कूल की मान्यता लेने के लिए स्कूल संचालक ने नए कमरों का निर्माण करने की बजाय चार कमरों के बीच में 4-4 इंच की दीवार बनाकर आठ कमरे बना दिए। कमरों के सामने बरामदे भी नहीं बनाए गए।
खंड शिक्षा अधिकारी कर्मबीर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जीवानंद पब्लिक स्कूल को वर्ष 2013 में प्राथमिक स्कूल की मान्यता मिली थी। उस समय स्कूल में चार कमरों का निर्माण किया गया था। इसके बाद स्कूल संचालक द्वारा स्कूल की माध्यमिक कक्षा तक की मान्यता लेने के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद वर्ष 2018 में उसे माध्यमिक कक्षा तक की मान्यता प्रदान कर दी गई थी। जांच में सामने आया है कि माध्यमिक स्कूल की मान्यता लेने के लिए स्कूल संचालक ने नए कमरे बनाने की जगह चार कमरों के बीच में 4-4 इंच की दीवार खड़ी कर आठ कमरे बना दिए। इसके लिए कमरों के सामने बरामदे भी नहीं बनाए गए थे, जोकि मान्यता लेने के लिए अनिवार्य है। इसके बावजूद तत्कालीन अधिकारियों द्वारा स्कूल को मान्यता प्रदान कर दी गई। नियम पूरे न करने पर भी स्कूल को मान्यता देने वाले अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खंडी शिक्षा अधिकारी द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद अब तत्कालीन अधिकारियों को जांच में शामिल करने की पूरी संभावना है।
घायल बच्चों को हाल-चाल जानने पहुंचे पूर्व सांसद
जीवानंद पब्लिक स्कूल की छत गिरने से घायल हुए विद्यार्थियों का पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने हाल-चाल पूछा और परिजनों से मुलाकात की। मलिक ने इसके बाद स्कूल में जाकर भी छत गिरने के कारणों को जाना। उन्होंने कहा कि हादसा बड़ा था, लेकिन गनीमत रही कि सभी बच्चों को मामूली चोटें आईं। उन्होंने कहा कि अगर उपचार में परेशानी या दिक्कत है तो वे उन्हें अवगत करवाएं। परिजनों ने मलिक को बताया कि अब उनके बच्चे पूरी तरह से ठीक हैं।
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वर्जन
जीवानंद पब्लिक स्कूल में छत गिरने के मामले की जांच पूरी हो गई है, जिसकी रिपोर्ट तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है। जांच में कुछ खामियां मिली हैं, जिसकी जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इस मामले में आगामी कार्रवाई उच्चाधिकारियों द्वारा ही की जाएगी।
- कर्मबीर सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, गन्नौर
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खंड शिक्षा अधिकारी कर्मबीर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जीवानंद पब्लिक स्कूल को वर्ष 2013 में प्राथमिक स्कूल की मान्यता मिली थी। उस समय स्कूल में चार कमरों का निर्माण किया गया था। इसके बाद स्कूल संचालक द्वारा स्कूल की माध्यमिक कक्षा तक की मान्यता लेने के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद वर्ष 2018 में उसे माध्यमिक कक्षा तक की मान्यता प्रदान कर दी गई थी। जांच में सामने आया है कि माध्यमिक स्कूल की मान्यता लेने के लिए स्कूल संचालक ने नए कमरे बनाने की जगह चार कमरों के बीच में 4-4 इंच की दीवार खड़ी कर आठ कमरे बना दिए। इसके लिए कमरों के सामने बरामदे भी नहीं बनाए गए थे, जोकि मान्यता लेने के लिए अनिवार्य है। इसके बावजूद तत्कालीन अधिकारियों द्वारा स्कूल को मान्यता प्रदान कर दी गई। नियम पूरे न करने पर भी स्कूल को मान्यता देने वाले अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खंडी शिक्षा अधिकारी द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद अब तत्कालीन अधिकारियों को जांच में शामिल करने की पूरी संभावना है।
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घायल बच्चों को हाल-चाल जानने पहुंचे पूर्व सांसद
जीवानंद पब्लिक स्कूल की छत गिरने से घायल हुए विद्यार्थियों का पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने हाल-चाल पूछा और परिजनों से मुलाकात की। मलिक ने इसके बाद स्कूल में जाकर भी छत गिरने के कारणों को जाना। उन्होंने कहा कि हादसा बड़ा था, लेकिन गनीमत रही कि सभी बच्चों को मामूली चोटें आईं। उन्होंने कहा कि अगर उपचार में परेशानी या दिक्कत है तो वे उन्हें अवगत करवाएं। परिजनों ने मलिक को बताया कि अब उनके बच्चे पूरी तरह से ठीक हैं।
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जीवानंद पब्लिक स्कूल में छत गिरने के मामले की जांच पूरी हो गई है, जिसकी रिपोर्ट तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है। जांच में कुछ खामियां मिली हैं, जिसकी जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इस मामले में आगामी कार्रवाई उच्चाधिकारियों द्वारा ही की जाएगी।
- कर्मबीर सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, गन्नौर