{"_id":"5d66df5f8ebc3e016b6add95","slug":"murthal-university-s-teacher-will-do-research-in-south-koria-sonipat-news-rtk5145376146","type":"story","status":"publish","title_hn":"दक्षिण कोरिया में रिसर्च प्रोफेसर बनी डीसीआरयूएसटी की रिसर्च एसोसिएट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दक्षिण कोरिया में रिसर्च प्रोफेसर बनी डीसीआरयूएसटी की रिसर्च एसोसिएट
विज्ञापन
रिसर्च प्रोफेसर बनने पर डॉ. सुमन गाहल्याण को बधाई देते वीसी प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत, रजिस्ट्रा
- फोटो : Sonipat
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनीपत। ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए नए फार्मूले पर काम करने वाली दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल की रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुमन गाहल्याण अब दक्षिण कोरिया के विश्वविद्यालय में रिसर्च प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं देंगी।
दक्षिण कोरिया का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग समय-समय पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ब्रेन कोरिया प्रोजेक्ट के तहत रिसर्च प्रोफेसर को आमंत्रित करता है। दक्षिण कोरिया रिसर्च प्रोफेसर को आमंत्रित करने से पहले उसके शोध कार्यों का बारीकी से निरीक्षण करता है, जब शोधकर्ता उनके मानदंड पर खरा उतर जाता है, उसके बाद वह उसे रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर अपने देश में रिसर्च करने के लिए आमंत्रित करते हैं। ब्रेन कोरिया प्रोजेक्ट प्लस के तहत डॉ. सुमन गाहल्याण के शोध कार्य को देखते हुए उन्हें दक्षिण कोरिया के चुंगनाम नेशनल विवि, डेजान में बतौर रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर आमंत्रित किया है। वे कोरियन प्रोफेसर सोजिन पार्क के साथ मिलकर ऑक्सीजन युक्त इंधन योगशील (फ्यूल एफिशिएंसी) पर कार्य करेंगी।
इस तरह घट सकती है दूसरे देशों पर निर्भरता
डॉ. सुमन गाहल्याण ने वर्ष 2016 में मुरथल विवि से प्रो. संजीव माकिन के निर्देशन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। उसके बाद डॉ. सुमन गाहल्याण ने बतौर रिसर्च एसोसिएट के तौर पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया। उनके अंतरराष्ट्रीय जर्नल में 25 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारा देश अधिकतर तेल का आयात विदेश से करता है, जिसके कारण हमारे देश की काफी मुद्रा बाहर चली जाती है। वर्तमान समय में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हम पेट्रोल में एथनॉल का प्रयोग कर रहे हैं, अगर हम प्रोपेनाल और ब्यूटेनाल का प्रयोग इंधन में करना प्रारंभ कर देंगे तो हमें विदेश से तेल का आयात कम करना पड़ेगा, जिस कारण हमारे देश की मुद्रा बाहर कम जाएगी। इससे हमारा देश आर्थिक तौर पर समृद्ध होगा। देश समृद्ध होने के साथ साथ इससे ग्लोबल वार्मिंग भी कम होगी।
विज्ञापन
दूसरे लोगों को मिलेगी प्ररेणा
कुलपति प्रो.राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि विवि के शोध की गुणवत्ता के कारण विश्व स्तर पर स्वीकार किया जाने लगा है। यही कारण है कि विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाली डॉ. सुमन गाहल्याण को दक्षिण कोरिया में बतौर रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर आमंत्रित किया गया है। उन्होंने गाहल्याण की उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दूसरे शोधार्थियों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
कारगर साबित होगा डॉ. सुमन का शोध
विवि के रिसर्च कोऑर्डिनेटर प्रो. संजीव माकिन ने कहा कि डॉ. सुमन गाहल्याण का शोध ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा हमारे वाहन में जब तेल ऑक्सीजन के कारण जलता है, जिससे प्रदूषण होता है। अगर हम प्रोपेनॉल और ब्यूटेनॉल का प्रयोग तेल में करने में सफल हो जाते हैं तो इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा। इससे फ्यूल फॉरमूलेशन में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
दक्षिण कोरिया का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग समय-समय पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ब्रेन कोरिया प्रोजेक्ट के तहत रिसर्च प्रोफेसर को आमंत्रित करता है। दक्षिण कोरिया रिसर्च प्रोफेसर को आमंत्रित करने से पहले उसके शोध कार्यों का बारीकी से निरीक्षण करता है, जब शोधकर्ता उनके मानदंड पर खरा उतर जाता है, उसके बाद वह उसे रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर अपने देश में रिसर्च करने के लिए आमंत्रित करते हैं। ब्रेन कोरिया प्रोजेक्ट प्लस के तहत डॉ. सुमन गाहल्याण के शोध कार्य को देखते हुए उन्हें दक्षिण कोरिया के चुंगनाम नेशनल विवि, डेजान में बतौर रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर आमंत्रित किया है। वे कोरियन प्रोफेसर सोजिन पार्क के साथ मिलकर ऑक्सीजन युक्त इंधन योगशील (फ्यूल एफिशिएंसी) पर कार्य करेंगी।
विज्ञापन
इस तरह घट सकती है दूसरे देशों पर निर्भरता
डॉ. सुमन गाहल्याण ने वर्ष 2016 में मुरथल विवि से प्रो. संजीव माकिन के निर्देशन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। उसके बाद डॉ. सुमन गाहल्याण ने बतौर रिसर्च एसोसिएट के तौर पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया। उनके अंतरराष्ट्रीय जर्नल में 25 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारा देश अधिकतर तेल का आयात विदेश से करता है, जिसके कारण हमारे देश की काफी मुद्रा बाहर चली जाती है। वर्तमान समय में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हम पेट्रोल में एथनॉल का प्रयोग कर रहे हैं, अगर हम प्रोपेनाल और ब्यूटेनाल का प्रयोग इंधन में करना प्रारंभ कर देंगे तो हमें विदेश से तेल का आयात कम करना पड़ेगा, जिस कारण हमारे देश की मुद्रा बाहर कम जाएगी। इससे हमारा देश आर्थिक तौर पर समृद्ध होगा। देश समृद्ध होने के साथ साथ इससे ग्लोबल वार्मिंग भी कम होगी।
विज्ञापन
दूसरे लोगों को मिलेगी प्ररेणा
कुलपति प्रो.राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि विवि के शोध की गुणवत्ता के कारण विश्व स्तर पर स्वीकार किया जाने लगा है। यही कारण है कि विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाली डॉ. सुमन गाहल्याण को दक्षिण कोरिया में बतौर रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर आमंत्रित किया गया है। उन्होंने गाहल्याण की उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दूसरे शोधार्थियों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
कारगर साबित होगा डॉ. सुमन का शोध
विवि के रिसर्च कोऑर्डिनेटर प्रो. संजीव माकिन ने कहा कि डॉ. सुमन गाहल्याण का शोध ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा हमारे वाहन में जब तेल ऑक्सीजन के कारण जलता है, जिससे प्रदूषण होता है। अगर हम प्रोपेनॉल और ब्यूटेनॉल का प्रयोग तेल में करने में सफल हो जाते हैं तो इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा। इससे फ्यूल फॉरमूलेशन में मदद मिलेगी।