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मां की उम्मीद: आज भी दिखेगा बजरंग का रंग, बोलीं- खूब घी खिलाया है, खाली हाथ नहीं आएगा मेरा बेटा
Fri, 06 Aug 2021 11:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:57 PM IST
सार
बजरंग के पिता बलवान सिंह पूनिया ने कहा कि खेल में हार-जीत चलती रहती है। हमें उम्मीद है कि बजरंग देश के लिए कांस्य पदक हर हाल में जीतकर लाएगा।
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बजरंग के परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती के सेमीफाइनल मुकाबले में हरियाणा के स्टार पहलवान बजरंग पूनिया को हार का सामना करना पड़ा। वे शनिवार को कांस्य पदक के लिए मुकाबला करेंगे। पूरा देश उनकी सफलता की कामना कर रहा है वहीं बजरंग की मां ओमप्यारी ने कहा कि सेमीफाइनल में बेटे की हार से दुख जरूर हुआ है, लेकिन आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि मेरा बेटा विदेश से खाली हाथ लौटा हो। बेटे को खूब घी खिला रखा है, इस बार भी वह देश के लिए पदक जीतकर ही लौटेगा।
वहीं बजरंग के पिता बलवान सिंह पूनिया ने कहा कि खेल में हार-जीत चलती रहती है। एक माह पहले घुटने में लगी चोट के कारण बजरंग ज्यादा अटैक नहीं कर पाया। बजरंग ने अब तक शानदार खेल दिखाया है। हमें उम्मीद है कि बजरंग देश के लिए कांस्य पदक हर हाल में जीतकर लाएगा।
बजरंग से पदक की उम्मीद के पीछे है कई वर्षों की तपस्या
बजरंग से पूरा देश पदक की आस लगाए बैठा है। इस उम्मीद के पीछे बजरंग की एक या दो वर्ष की नहीं, बल्कि सालों की कड़ी तपस्या है। बजरंग ने पिछले 10 वर्ष से मिठाई नहीं खाई है। यही नहीं करीब डेढ़ दशक से भी अधिक समय से जंकफूड से दूरी बनाई हुई है। जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले बजरंग ने ओलंपिक से कई महीने पहले ही उससे दूरी बना ली थी।
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बेहद तंगहाली में बीता है बजरंग का बचपन
झज्जर के खुडन गांव में जन्म लेने वाले बजरंग का बचपन बेहद तंगहाली में बीता है। बजरंग के परिवार में खेती से जितना आता था, उससे घर का ही गुजारा हो पाता था। विश्वविद्यालय स्तर पर पहलवानी कर चुके बजरंग के पिता बलवान सिंह ने 2005 में छारा गांव के लाला दीवानचंद अखाड़े में बजरंग का दाखिला कराया था। बजरंग के सपने पूरे करने के लिए पिता ने बस का किराया बचाकर साइकिल से सफर करना शुरू कर दिया था।
कुश्ती को ही बना लिया था जीवन का हिस्सा
कुश्ती के लिए शरीर की मांग और घर की स्थिति दोनों को देखकर बजरंग ने कुश्ती को ही जीवन का हिस्सा बना लिया था। उन्होंने तय किया था कि कुश्ती से ही वे अपनी तकदीर को बदलकर दिखाएंगे। पहले अपने से बड़ी उम्र और ज्यादा वजन के पहलवानों से कुश्ती लड़ते थे और जीतते भी थे। उनके इस संकल्प में भाई हरेंद्र के साथ चचेरे भाई नरेंद्र पूनिया ने भी पूरा सहयोग किया। हरेंद्र ने भाई के खानपान के लिए विदेश की अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी।
बजरंग की उपलब्धियां
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वहीं बजरंग के पिता बलवान सिंह पूनिया ने कहा कि खेल में हार-जीत चलती रहती है। एक माह पहले घुटने में लगी चोट के कारण बजरंग ज्यादा अटैक नहीं कर पाया। बजरंग ने अब तक शानदार खेल दिखाया है। हमें उम्मीद है कि बजरंग देश के लिए कांस्य पदक हर हाल में जीतकर लाएगा।
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बजरंग से पदक की उम्मीद के पीछे है कई वर्षों की तपस्या
बजरंग से पूरा देश पदक की आस लगाए बैठा है। इस उम्मीद के पीछे बजरंग की एक या दो वर्ष की नहीं, बल्कि सालों की कड़ी तपस्या है। बजरंग ने पिछले 10 वर्ष से मिठाई नहीं खाई है। यही नहीं करीब डेढ़ दशक से भी अधिक समय से जंकफूड से दूरी बनाई हुई है। जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले बजरंग ने ओलंपिक से कई महीने पहले ही उससे दूरी बना ली थी।
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बेहद तंगहाली में बीता है बजरंग का बचपन
झज्जर के खुडन गांव में जन्म लेने वाले बजरंग का बचपन बेहद तंगहाली में बीता है। बजरंग के परिवार में खेती से जितना आता था, उससे घर का ही गुजारा हो पाता था। विश्वविद्यालय स्तर पर पहलवानी कर चुके बजरंग के पिता बलवान सिंह ने 2005 में छारा गांव के लाला दीवानचंद अखाड़े में बजरंग का दाखिला कराया था। बजरंग के सपने पूरे करने के लिए पिता ने बस का किराया बचाकर साइकिल से सफर करना शुरू कर दिया था।
कुश्ती को ही बना लिया था जीवन का हिस्सा
कुश्ती के लिए शरीर की मांग और घर की स्थिति दोनों को देखकर बजरंग ने कुश्ती को ही जीवन का हिस्सा बना लिया था। उन्होंने तय किया था कि कुश्ती से ही वे अपनी तकदीर को बदलकर दिखाएंगे। पहले अपने से बड़ी उम्र और ज्यादा वजन के पहलवानों से कुश्ती लड़ते थे और जीतते भी थे। उनके इस संकल्प में भाई हरेंद्र के साथ चचेरे भाई नरेंद्र पूनिया ने भी पूरा सहयोग किया। हरेंद्र ने भाई के खानपान के लिए विदेश की अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी।
बजरंग की उपलब्धियां
- वर्ष 2013 में एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक
- वर्ष 2014 में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक
- वर्ष 2017 व 2019 में एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- वर्ष 2014 में एशियाई खेलों में रजत पदक व 2018 में स्वर्ण पदक जीता
- वर्ष 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक व 2018 में स्वर्ण पदक जीता
- वर्ष 2017 में एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।