{"_id":"60218f988ebc3e70040e68c8","slug":"migrants-with-children-in-their-laps-bags-on-their-heads-sonipat-news-rtk5944548135","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोद में बच्चा, सिर पर बैग रखकर प्रवासियों का पलायन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोद में बच्चा, सिर पर बैग रखकर प्रवासियों का पलायन
विज्ञापन
कुंडली से पलायन करने के लिए जीटी रोड पर बच्चों के साथ खड़े मजदूर। संवाद
- फोटो : Sonipat
बिहार के रहने वाला राजेश कुमार पिछले कई साल से सोनीपत में रेहड़ी पर सब्जी बेचकर परिवार का गुजारा करता था। कोरोना काल के दौरान भी उसका काम चलता रहा और वह रेहड़ी पर सब्जी बेचता रहा। लेकिन अब किसान आंदोलन के कारण रास्ता बंद होने से राजेश की हालात खराब हो गई है। दिल्ली का रास्ता बंद होने से वाहन चालक मंडी तक जाने के लिए ज्यादा रुपये मांगते हैं। उसने एक-दो बार मंडी से सब्जी लाकर बेची, लेकिन उसमें उल्टा उसे नुकसान होने लगा। अब परिवार के सामने भूखों मरने तक की नौबत आ गई तो अपने बेटे को गोद में लेकर घर के लिए रवाना हो गया।
सोनीपत में यह हालात केवल बिहार के रहने वाले अकेले राजेश कुमार की नहीं है, बल्कि सोनीपत के कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों मजदूरों व दिल्ली से सब्जी लाकर रेहड़ी पर बेचने वाले प्रवासी लोगों की है। इस तरह ही बिहार का रहने वाला रणजीत महतो भी दिल्ली से सब्जी लाकर सोनीपत में रेहड़ी पर बेचता था। सब्जी बेचकर इतने रुपये बच जाते थे कि वह परिवार का गुजारा आराम से कर सके और घर के लिए भी कुछ रुपये बचा सके। लेकिन अब किसान आंदोलन से रास्ता बंद होने के कारण गाड़ी वाले दोगुने रुपये लेने लगे और सब्जी लाकर बेचने में फायदा की जगह नुकसान होने लगा। इसलिए ही काफी प्रवासी लोगों ने यह काम बंद कर दिया और फैक्टरी तक में काम नहीं मिल रहा तो उन्होंने घर वापसी ही बेहतर समझा।
रणजीत महतो ने बताया कि इस तरह ही करीब 24 परिवार हैं जो रेहड़ी पर सब्जी बेचकर गुजारा करते थे। लेकिन किसान आंदोलन के कारण रास्ता बंद होने से सभी के सामने खाने तक के लाले पड़े हुए हैं। यहां कोई दूसरा काम भी नहीं मिल रहा है तो अब मजबूरी में घर जाना पड़ रहा है। क्योंकि वहां उनको भूखा तो नहीं मरने पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोनीपत में यह हालात केवल बिहार के रहने वाले अकेले राजेश कुमार की नहीं है, बल्कि सोनीपत के कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों मजदूरों व दिल्ली से सब्जी लाकर रेहड़ी पर बेचने वाले प्रवासी लोगों की है। इस तरह ही बिहार का रहने वाला रणजीत महतो भी दिल्ली से सब्जी लाकर सोनीपत में रेहड़ी पर बेचता था। सब्जी बेचकर इतने रुपये बच जाते थे कि वह परिवार का गुजारा आराम से कर सके और घर के लिए भी कुछ रुपये बचा सके। लेकिन अब किसान आंदोलन से रास्ता बंद होने के कारण गाड़ी वाले दोगुने रुपये लेने लगे और सब्जी लाकर बेचने में फायदा की जगह नुकसान होने लगा। इसलिए ही काफी प्रवासी लोगों ने यह काम बंद कर दिया और फैक्टरी तक में काम नहीं मिल रहा तो उन्होंने घर वापसी ही बेहतर समझा।
विज्ञापन
रणजीत महतो ने बताया कि इस तरह ही करीब 24 परिवार हैं जो रेहड़ी पर सब्जी बेचकर गुजारा करते थे। लेकिन किसान आंदोलन के कारण रास्ता बंद होने से सभी के सामने खाने तक के लाले पड़े हुए हैं। यहां कोई दूसरा काम भी नहीं मिल रहा है तो अब मजबूरी में घर जाना पड़ रहा है। क्योंकि वहां उनको भूखा तो नहीं मरने पड़ेगा।
विज्ञापन