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शहीदों का बलिदान कभी नहीं जा सकता व्यर्थ : एसकेएम
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कुंडली बॉर्डर पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित किसान। संवाद
- फोटो : Sonipat
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने लखीमपुर खीरी हत्याकांड के शहीदों की अंतिम अरदास के दौरान कहा कि शहीदों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। किसानों को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। सांप्रदायिक और विभाजन करने की राजनीति से किसान आंदोलन को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने मोबाइल पर बातचीत में कहा कि 3 अक्तूबर को अजय मिश्र टेनी और उनके बेटे के वाहनों के काफिले द्वारा कुचले गए पांच शहीदों की अंतिम प्रार्थना में शामिल होने के लिए हजारों किसान तिकुनिया पहुंचे। यह किसान न केवल लखीमपुर खीरी जिले से थे, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से भी आए थे। उन्होंने कहा कि अंतिम अरदास में किसानों ने एक बार फिर स्पष्ट रूप से घोषणा कर दी है कि वह भाजपा और आरएसएस की विभाजनकारी राजनीति के कारण अपनी एकता और ताकत को टूटने नहीं देंगे। एसकेएम ने घोषणा की कि वह लखीमपुर खीरी हत्याकांड के शहीदों और अब तक आंदोलन में शामिल 630 से अधिक अन्य लोगों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगा।
न्याय दिलाने का लिया गया संकल्प
डॉ. दर्शन पाल ने बताया कि नछत्तर सिंह, लवप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह, दलजीत सिंह और रमन कश्यप के लिए तिकुनिया में आयोजित प्रार्थना सभा से संयुक्त किसान मोर्चा ने इस घटना में न्याय दिलाने का संकल्प लिया। यह देश के लिए शर्म की बात है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अजय मिश्र को मंत्री बनाए रखा है। एसकेएम ने दोहराया कि वह यूपी के सभी जिलों और सभी राज्यों में शहीद कलश यात्रा, दशहरा पर्व के अवसर पर 15 अक्तूबर को भाजपा नेताओं के पुतला दहन के लिए और 18 अक्तूबर को पूरे भारत में रेल रोको के लिए अपनी कार्य योजना को जारी रखेगा।
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जम्मू-कश्मीर के शहीदों को भी दी श्रद्धांजलि
तिकुनिया में ही एसकेएम ने जम्मू-कश्मीर में एक मुठभेड़ में देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले पांच सैनिकों - जसविंदर सिंह, सराज सिंह, गज्जन सिंह, मनदीप सिंह और वैशाख एचके को भी श्रद्धांजलि दी। एसकेएम ने दु:ख और गर्व के साथ कहा कि सिपाही गज्जन सिंह की शादी चार महीने पहले ही हुई थी और उन्होंने अपनी बरात पर गर्व से किसान संगठन का झंडा फहराया था। एसकेएम हमेशा कहता रहा है कि देश की रक्षा के लिए किसान और जवान इस संघर्ष में एक साथ हैं। एसकेएम जम्मू-कश्मीर में 10 दिनों में आतंकवादी हमलों में मारे गए निर्दोष नागरिकों को भी श्रद्धांजलि देता है।
कुंडली समेत कई स्थानों पर निकाला कैंडल मार्च, जलाए दीपक
एसकेएम की तरफ से कुंडली समेत अन्य स्थानों पर कैंडल मार्च निकाला गया। इसके साथ ही कई गांवों में रात को लोगों ने घरों के बाहर दीपक भी जलाए और लखीमपुर में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान शहीद किसान अमर रहे और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गए।
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संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने मोबाइल पर बातचीत में कहा कि 3 अक्तूबर को अजय मिश्र टेनी और उनके बेटे के वाहनों के काफिले द्वारा कुचले गए पांच शहीदों की अंतिम प्रार्थना में शामिल होने के लिए हजारों किसान तिकुनिया पहुंचे। यह किसान न केवल लखीमपुर खीरी जिले से थे, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से भी आए थे। उन्होंने कहा कि अंतिम अरदास में किसानों ने एक बार फिर स्पष्ट रूप से घोषणा कर दी है कि वह भाजपा और आरएसएस की विभाजनकारी राजनीति के कारण अपनी एकता और ताकत को टूटने नहीं देंगे। एसकेएम ने घोषणा की कि वह लखीमपुर खीरी हत्याकांड के शहीदों और अब तक आंदोलन में शामिल 630 से अधिक अन्य लोगों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगा।
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न्याय दिलाने का लिया गया संकल्प
डॉ. दर्शन पाल ने बताया कि नछत्तर सिंह, लवप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह, दलजीत सिंह और रमन कश्यप के लिए तिकुनिया में आयोजित प्रार्थना सभा से संयुक्त किसान मोर्चा ने इस घटना में न्याय दिलाने का संकल्प लिया। यह देश के लिए शर्म की बात है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अजय मिश्र को मंत्री बनाए रखा है। एसकेएम ने दोहराया कि वह यूपी के सभी जिलों और सभी राज्यों में शहीद कलश यात्रा, दशहरा पर्व के अवसर पर 15 अक्तूबर को भाजपा नेताओं के पुतला दहन के लिए और 18 अक्तूबर को पूरे भारत में रेल रोको के लिए अपनी कार्य योजना को जारी रखेगा।
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जम्मू-कश्मीर के शहीदों को भी दी श्रद्धांजलि
तिकुनिया में ही एसकेएम ने जम्मू-कश्मीर में एक मुठभेड़ में देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले पांच सैनिकों - जसविंदर सिंह, सराज सिंह, गज्जन सिंह, मनदीप सिंह और वैशाख एचके को भी श्रद्धांजलि दी। एसकेएम ने दु:ख और गर्व के साथ कहा कि सिपाही गज्जन सिंह की शादी चार महीने पहले ही हुई थी और उन्होंने अपनी बरात पर गर्व से किसान संगठन का झंडा फहराया था। एसकेएम हमेशा कहता रहा है कि देश की रक्षा के लिए किसान और जवान इस संघर्ष में एक साथ हैं। एसकेएम जम्मू-कश्मीर में 10 दिनों में आतंकवादी हमलों में मारे गए निर्दोष नागरिकों को भी श्रद्धांजलि देता है।
कुंडली समेत कई स्थानों पर निकाला कैंडल मार्च, जलाए दीपक
एसकेएम की तरफ से कुंडली समेत अन्य स्थानों पर कैंडल मार्च निकाला गया। इसके साथ ही कई गांवों में रात को लोगों ने घरों के बाहर दीपक भी जलाए और लखीमपुर में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान शहीद किसान अमर रहे और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गए।