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Sonipat News: सत्याग्रह बलिदान दिवस पर शहीदों को किया याद
Fri, 28 Aug 2026 06:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 28 Aug 2026 06:04 PM IST
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फोटो - शहीद स्मारक पर सत्याग्रह बलिदान दिवस पर शहीदों को नमन करते हुए संगठन के सदस्य। स्रोत - प
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गोहाना। शहर के पुराने बस अड्डे स्थित शहीद स्मारक पर आजाद हिंद देशभक्त मोर्चा के सदस्यों ने शुक्रवार को सत्याग्रह बलिदान दिवस मनाया। इस दौरान शहीद क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश सेतिया ने कहा कि महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ‘करो या मरो’ का नारा दिया था। इसके बाद अंग्रेजों ने देश के सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। ऐसे समय में आम किसान, छात्र और मजदूर स्वयं आंदोलन की अगुवाई करने लगे। उन्होंने थानों और कचहरियों पर तिरंगा फहराकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सत्याग्रह किया।
उन्होंने बताया कि 28 अगस्त 1942 को सत्याग्रह के दौरान उत्तर प्रदेश के एक थाने पर तिरंगा फहराने पहुंचे तीन क्रांतिकारी शहीद हो गए थे। अंग्रेजों ने प्रदर्शनकारियों पर करीब 900 राउंड गोलियां चलाई थीं। डॉ. सेतिया ने कहा कि जब आम जनता ने सत्याग्रह का मोर्चा संभाला तो अंग्रेजों को अहसास हो गया कि अब भारतीयों को स्वतंत्रता की राह से रोकना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों और बलिदानों ने देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम में आजाद डांगी, महावीर मलिक, हिमांशु जैन, कृष्ण लाल पांचाल, भाने राम पांचाल, रोहन और अर्णव डांगी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश सेतिया ने कहा कि महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ‘करो या मरो’ का नारा दिया था। इसके बाद अंग्रेजों ने देश के सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। ऐसे समय में आम किसान, छात्र और मजदूर स्वयं आंदोलन की अगुवाई करने लगे। उन्होंने थानों और कचहरियों पर तिरंगा फहराकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सत्याग्रह किया।
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उन्होंने बताया कि 28 अगस्त 1942 को सत्याग्रह के दौरान उत्तर प्रदेश के एक थाने पर तिरंगा फहराने पहुंचे तीन क्रांतिकारी शहीद हो गए थे। अंग्रेजों ने प्रदर्शनकारियों पर करीब 900 राउंड गोलियां चलाई थीं। डॉ. सेतिया ने कहा कि जब आम जनता ने सत्याग्रह का मोर्चा संभाला तो अंग्रेजों को अहसास हो गया कि अब भारतीयों को स्वतंत्रता की राह से रोकना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों और बलिदानों ने देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम में आजाद डांगी, महावीर मलिक, हिमांशु जैन, कृष्ण लाल पांचाल, भाने राम पांचाल, रोहन और अर्णव डांगी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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