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Sonipat News: जैव विविधता के बल पर ही धरती पर है जीवन
Wed, 06 Mar 2024 11:08 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 06 Mar 2024 11:08 PM IST
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खरखौदा। गांव रोहट की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड की ओर से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जैव विविधता को लेकर जागरूकता फैलाई गई। कार्यक्रम में बताया कि हर जीव-जंतु का इस धरती पर जीवन बनाए रखना बहुत जरूरी है। किसी एक जीव या जंतु के खत्म हो जाने पर जीवन चक्र ही थम सकता है।
बोर्ड के जिला समन्वयक श्यो प्रसाद ने बताया कि जैव विविधता के बल पर ही धरती पर जीवन व्याप्त है, इसलिए हमें इसके महत्व को कमतर नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर लाखों प्रकार के जीव-जंतु पाए जाते हैं। इन्हें भी पृथ्वी पर रहने का उतना ही हक है जितना हमें है। बहुत से जीव-जंतु विलुप्त हो चुके हैं। अगर सारे ही जीव-जंतु न रहे तो यह पृथ्वी सूनी सी हो जाएगी और जीवन चक्र टूट जाएगा। बहुत से जीव हमारे लिए घातक हैं और कुछ फायदेमंद भी हैं, लेकिन इन्हें प्रकृति ने पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए बनाया हुआ है।
उन्होंने कहा कि खाद्य जाल के किसी जीव की संख्या बढ़ जाएगी तो इससे असंतुलन पैदा होने लगेगा। इसलिए प्रकृति ने संतुलन बनाने के लिए सभी का क्रम निर्धारित किया हुआ है। तितलियां भी मधुमक्खी की तरह कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके जरिए एक पौधे के परागकण या बीज दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। जिससे भिन्न-भिन्न स्थानों पर नए पौधे उपज जाते हैं। इस दौरान मुख्य अध्यापिका सरोज कुमारी, बीरमती देवी, सीमा रानी, मोहिनी मौजूद रहे।
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बोर्ड के जिला समन्वयक श्यो प्रसाद ने बताया कि जैव विविधता के बल पर ही धरती पर जीवन व्याप्त है, इसलिए हमें इसके महत्व को कमतर नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर लाखों प्रकार के जीव-जंतु पाए जाते हैं। इन्हें भी पृथ्वी पर रहने का उतना ही हक है जितना हमें है। बहुत से जीव-जंतु विलुप्त हो चुके हैं। अगर सारे ही जीव-जंतु न रहे तो यह पृथ्वी सूनी सी हो जाएगी और जीवन चक्र टूट जाएगा। बहुत से जीव हमारे लिए घातक हैं और कुछ फायदेमंद भी हैं, लेकिन इन्हें प्रकृति ने पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए बनाया हुआ है।
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उन्होंने कहा कि खाद्य जाल के किसी जीव की संख्या बढ़ जाएगी तो इससे असंतुलन पैदा होने लगेगा। इसलिए प्रकृति ने संतुलन बनाने के लिए सभी का क्रम निर्धारित किया हुआ है। तितलियां भी मधुमक्खी की तरह कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके जरिए एक पौधे के परागकण या बीज दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। जिससे भिन्न-भिन्न स्थानों पर नए पौधे उपज जाते हैं। इस दौरान मुख्य अध्यापिका सरोज कुमारी, बीरमती देवी, सीमा रानी, मोहिनी मौजूद रहे।
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