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Sonipat News: मुरथल विवि के तरणताल निर्माण में गड़बड़ी, एसीबी ने शुरू की जांच
Wed, 11 Jun 2025 01:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 11 Jun 2025 01:06 AM IST
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मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविवद्यालय। संवाद
सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल में करोड़ों रुपये की लागत के तरणताल के निर्माण में भारी अनियमितता की जांच अब एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सोनीपत को सौंपी गई है। एसीबी ने जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए गए हैं।
आरटीआई एक्टिविस्ट और शिकायतकर्ता पीपी कपूर ने मंगलवार को जिला सचिवालय स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो उपकेंद्र में जांच अधिकारी उप निरीक्षक जगजीत सिंह के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। पीपी कपूर ने दस्तावेज के साथ आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।
उन्होंने ने आरोप लगाया कि तरणताल के निर्माण में महंगे ब्रांड प्रज्ञा मॉडल के वाटर फिल्टर लगाने का दावा किया गया। जिनकी कीमत 10.82 लाख रुपये प्रति यूनिट दर्शाई गई। उसके विपरीत मौके पर 3.20 लाख रुपये कीमत के स्थानीय ब्रांड इमौक्स कंपनी के फिल्टर लगाए गए। इसके बावजूद मेजरमेंट बुक में तीनों फिल्टर की लागत 32.86 लाख रुपये चढ़ाकर 23 लाख से अधिक की गड़बड़ी की गई। बाद में मामले की भनक लगने पर ठेकेदार की 40 फीसदी पेमेंट पर रोक लगा दी गई थी।
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डीएनआईटी में भी गड़बड़ी
शिकायत में यह भी बताया गया कि प्रोजेक्ट के डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (डीएनआईटी) में ही दरों में गड़बड़ी कर बाजार दर से चार गुना तक रेट तय किए गए। पीवीसी पाइप, वॉल्व बैटरी और वॉटर पंप जैसे उपकरणों पर भी यही पैटर्न दोहराया गया, जिससे लाखों का अतिरिक्त भुगतान ठेकेदार को किया गया।
6.5 करोड़ खर्च करने पर तरणताल अब तक बंद
करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से बना यह तरणताल पांच वर्ष से बंद पड़ा है। अब उसकी हालत जर्जर हो चुकी है। पीपी कपूर का दावा है कि निर्माण में भारी गोलमाल के डर से कोई भी कुलपति इस पूल को शुरू करने का जोखिम नहीं उठा रहा है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए गए हैं। साक्ष्य मांगे गए हैं। जांच तेज कर दी गई है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
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आरटीआई एक्टिविस्ट और शिकायतकर्ता पीपी कपूर ने मंगलवार को जिला सचिवालय स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो उपकेंद्र में जांच अधिकारी उप निरीक्षक जगजीत सिंह के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। पीपी कपूर ने दस्तावेज के साथ आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।
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उन्होंने ने आरोप लगाया कि तरणताल के निर्माण में महंगे ब्रांड प्रज्ञा मॉडल के वाटर फिल्टर लगाने का दावा किया गया। जिनकी कीमत 10.82 लाख रुपये प्रति यूनिट दर्शाई गई। उसके विपरीत मौके पर 3.20 लाख रुपये कीमत के स्थानीय ब्रांड इमौक्स कंपनी के फिल्टर लगाए गए। इसके बावजूद मेजरमेंट बुक में तीनों फिल्टर की लागत 32.86 लाख रुपये चढ़ाकर 23 लाख से अधिक की गड़बड़ी की गई। बाद में मामले की भनक लगने पर ठेकेदार की 40 फीसदी पेमेंट पर रोक लगा दी गई थी।
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डीएनआईटी में भी गड़बड़ी
शिकायत में यह भी बताया गया कि प्रोजेक्ट के डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (डीएनआईटी) में ही दरों में गड़बड़ी कर बाजार दर से चार गुना तक रेट तय किए गए। पीवीसी पाइप, वॉल्व बैटरी और वॉटर पंप जैसे उपकरणों पर भी यही पैटर्न दोहराया गया, जिससे लाखों का अतिरिक्त भुगतान ठेकेदार को किया गया।
6.5 करोड़ खर्च करने पर तरणताल अब तक बंद
करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से बना यह तरणताल पांच वर्ष से बंद पड़ा है। अब उसकी हालत जर्जर हो चुकी है। पीपी कपूर का दावा है कि निर्माण में भारी गोलमाल के डर से कोई भी कुलपति इस पूल को शुरू करने का जोखिम नहीं उठा रहा है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए गए हैं। साक्ष्य मांगे गए हैं। जांच तेज कर दी गई है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।