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विडंबना : पोषक आहार देने का दावा, दो माह से जारी नहीं किया मिड-डे मील रसोई का बजट
Sun, 19 Nov 2023 01:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 19 Nov 2023 01:26 AM IST
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सोनीपत के मॉडल टाउन स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में मुख्याध्यापक की निगरानी में विद्यार्थिय
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिड-डे मील में पोषक आहार देने के दावे तो बहुत किए जा रहे हैं, लेकिन हालात यह हैं कि रसोई का सामान खरीदने के लिए दो माह से बजट तक जारी नहीं किया गया। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। हर बार स्कूलों में मिड-डे मील का सूखा राशन तो पहुंचा दिया जाता है, लेकिन खाना तैयार करने के लिए अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए दिया जाने वाला बजट कई माह बाद जारी किया जाता है। ऐसे में स्कूल मुखिया को विभिन्न व्यंजन तैयार करवाने के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।
जिले में राजकीय स्कूलों की संख्या 712 हैं। इनमें प्राइमरी स्कूल 422 और अपर प्राइमरी स्कूल 290 हैं। इन स्कूलों में रोजाना करीब 82 हजार विद्यार्थियों के लिए मिड-डे मील तैयार किया जाता है, जिसमें प्राइमरी स्कूलों के करीब 50 हजार तो अपर प्राइमरी स्कूलों के 32 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। इसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के प्रत्येक बच्चे पर रोजाना मिड-डे मील के तहत जहां 5.45 रुपये खर्च होते हैं, वहीं अपर प्राइमरी के विद्यार्थी पर यह खर्च बढ़कर 8.17 रुपये तक पहुंच जाता है।
जिले के 82 हजार विद्यार्थियों पर मिड-डे मील के तहत प्रतिदिन करीब 5.25 लाख रुपये कुकिंग खर्च आता है। महीने की बात करें तो सभी स्कूलों के लिए यह खर्च करीब 1.57 करोड़ रुपये होता है। जिले में 15 सितंबर के बाद से यह बजट जारी नहीं किया गया है। हालांकि शिक्षा विभाग ने मुख्यालय को इसके लिए दो करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है।
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विद्यार्थी संख्या के अनुसार जारी किया जाता है बजट
शिक्षा विभाग की तरफ से सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार चावल, आटा व अन्य सूखा राशन पहुंचाया जाता है। व्यंजन तैयार करने के लिए अन्य खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए प्रत्येक स्कूल को विद्यार्थियों की संख्या अनुसार बजट जारी किया जाता है। इस बजट से स्कूल मुखिया रसोई गैस, नमक, मिर्च, तेल, दाल, बेसन, मसाले सहित अन्य जरूरी सामान खरीदते हैं। यह सामान सरकार की तरफ से गांव स्तर पर खोले गए हर हित स्टोर से ही खरीदना होता है। स्कूल मुखियाओं को दो माह से बजट का इंतजार है।
मिड-डे मील बनाने में प्रयोग होने वाला सामान खरीदने के लिए मुख्यालय की तरफ से बजट जारी किया जाता है। सितंबर के बाद से बजट नहीं मिला है। इसके लिए डिमांड भेजी गई है। बजट जारी होते ही स्कूलों के खाते में डाल दिया जाएगा। स्कूलों में विद्यार्थियों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार ही नियमित रूप से मिड-डे मील दिया जा रहा है।
- सरोज बाल्याण, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।
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सोनीपत। राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिड-डे मील में पोषक आहार देने के दावे तो बहुत किए जा रहे हैं, लेकिन हालात यह हैं कि रसोई का सामान खरीदने के लिए दो माह से बजट तक जारी नहीं किया गया। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। हर बार स्कूलों में मिड-डे मील का सूखा राशन तो पहुंचा दिया जाता है, लेकिन खाना तैयार करने के लिए अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए दिया जाने वाला बजट कई माह बाद जारी किया जाता है। ऐसे में स्कूल मुखिया को विभिन्न व्यंजन तैयार करवाने के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।
जिले में राजकीय स्कूलों की संख्या 712 हैं। इनमें प्राइमरी स्कूल 422 और अपर प्राइमरी स्कूल 290 हैं। इन स्कूलों में रोजाना करीब 82 हजार विद्यार्थियों के लिए मिड-डे मील तैयार किया जाता है, जिसमें प्राइमरी स्कूलों के करीब 50 हजार तो अपर प्राइमरी स्कूलों के 32 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। इसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के प्रत्येक बच्चे पर रोजाना मिड-डे मील के तहत जहां 5.45 रुपये खर्च होते हैं, वहीं अपर प्राइमरी के विद्यार्थी पर यह खर्च बढ़कर 8.17 रुपये तक पहुंच जाता है।
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जिले के 82 हजार विद्यार्थियों पर मिड-डे मील के तहत प्रतिदिन करीब 5.25 लाख रुपये कुकिंग खर्च आता है। महीने की बात करें तो सभी स्कूलों के लिए यह खर्च करीब 1.57 करोड़ रुपये होता है। जिले में 15 सितंबर के बाद से यह बजट जारी नहीं किया गया है। हालांकि शिक्षा विभाग ने मुख्यालय को इसके लिए दो करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है।
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विद्यार्थी संख्या के अनुसार जारी किया जाता है बजट
शिक्षा विभाग की तरफ से सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार चावल, आटा व अन्य सूखा राशन पहुंचाया जाता है। व्यंजन तैयार करने के लिए अन्य खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए प्रत्येक स्कूल को विद्यार्थियों की संख्या अनुसार बजट जारी किया जाता है। इस बजट से स्कूल मुखिया रसोई गैस, नमक, मिर्च, तेल, दाल, बेसन, मसाले सहित अन्य जरूरी सामान खरीदते हैं। यह सामान सरकार की तरफ से गांव स्तर पर खोले गए हर हित स्टोर से ही खरीदना होता है। स्कूल मुखियाओं को दो माह से बजट का इंतजार है।
मिड-डे मील बनाने में प्रयोग होने वाला सामान खरीदने के लिए मुख्यालय की तरफ से बजट जारी किया जाता है। सितंबर के बाद से बजट नहीं मिला है। इसके लिए डिमांड भेजी गई है। बजट जारी होते ही स्कूलों के खाते में डाल दिया जाएगा। स्कूलों में विद्यार्थियों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार ही नियमित रूप से मिड-डे मील दिया जा रहा है।
- सरोज बाल्याण, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।