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दीक्षांत समारोह में बेटियां बोलीं-करिअर की रहती है चिंता, इसलिए पढ़ाई में अव्वल रहने की रहती है कोशिश
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दीक्षांत समारोह में डिग्रियां दिखातीं छात्राएं। संवाद
- फोटो : Sonipat
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दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल में शुक्रवार को 7वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह बना रहा। विशेष बात यह रही कि डिग्रियां लेने वाले विभिन्न पाठ्यक्रमों के सभी विद्यार्थियों में लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले अधिक रही। डिग्रियां प्राप्त करने वाली बेटियों ने कहा कि उन्हें अपने करिअर को लेकर चिंता रहती है, इसलिए पढ़ाई मेें अव्वल रहने की जिद में आगे निकल जाती हैं। दीक्षांत समारोह में मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे कुलाधिपति राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि उच्च शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती संख्या देश की उन्नति के लिए शुभ संकेत है।
दीक्षांत समारोह राज्यपाल ने 625 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। इसके अलावा 70 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक व 89 छात्र-छात्राओं को पीएचडी की डिग्री प्रदान की। विश्वविद्यालय में इससे पहले भी 6 दीक्षांत समारोहों में उपाधियां पाने के मामले में बेटियों की संख्या लड़कों के या तो बराबर रही है या फिर ज्यादा रही है। लड़कियों ने सातवें दीक्षांत समारोह में भी इस रिकॉर्ड को कायम रखा है। डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे खिले नजर आए। डिग्रियां प्राप्त करने के बाद लड़कियों ने कहा कि आज के समय में पढ़ाई की क्या कीमत है, उससे वे भलीभांति परिचित हैं, इसलिए इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बरतना नहीं चाहती। दीक्षांत समारोह में डिग्रियां लेने पहुंची लड़कियों मेें अधिक नौकरियां कर रही हैं। इनमें अधिकतर लड़कियां शिक्षण क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
इन्होंने प्राप्त की डिग्रियां
पाठ्यक्रम लड़के लड़कियां कुल
स्नातक 391 133 524
डयूल डिग्री 117 115 232
स्नातकोत्तर 153 294 447
पीएचडी 28 61 89
स्वर्ण पदक 31 35 66
बोली बेटियां
मुझे वर्ष 2018 में मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर में स्वर्ण पदक मिला है। मैं वर्तमान में क्लास-2 की नौकरी कर रही हूं। पढ़ाई की कीमत जानती हूं, इसलिए पढ़ाई में कभी ढिलाई नहीं बरती। पढ़-लिखकर बेहतर करिअर ही नहीं बनता, बल्कि होनहार लड़की के प्रति समाज को अपना नजरिया बदलने पर मजबूर होना पड़ता है। पढ़ाई में अव्वल रहेंगी तो ही बच्चों का जीवन भी संवार सकती हैं। प्रियदर्शिनी, रेवाड़ी।
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मास्टर डिग्री में स्वर्ण पदक प्राप्त कर बेहद खुश हूं। मैं बतौर सहायक प्रोफेसर कार्यरत हूं और आज भी हर काम को पूरी तन्यमता से करने में विश्वास रखती हूं। जब भी आप कोई उपलब्धि हासिल करते हो तो सभी आपकी तारीफ करते हैं, लेकिन उस उपलब्धि के पीछे किए गए संघर्ष को कोई नहीं देखता। लड़कियों का शिक्षा के क्षेत्र में हर विपत्ति को पार करते हुए अव्वल रहना सुखद है। इससे लोगों की रूढ़िवादी सोच में बदलाव आएगा। -साक्षी गहलावत
मास्टर डिग्री में स्वर्ण पदक लेने के सपने को पूरा करना है तो पढ़ाई तो करनी ही पड़ेगी। पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं होता, मजा तब है जब पढ़ाई पूरी मेहनत से की जाए और स्वयं को सिद्ध किया जाए। लड़कियों में यह जुनून ज्यादा है। वे हमेशा करिअर को लेकर गंभीर रहती है। यही कारण है कि लड़कों से आगे निकल जाती हैं। समाज भी लड़कियों के प्रति अपनी सोच को उनकी उपलब्धियों के हिसाब से बदलता है। -दिव्या गर्ग
जनप्रतिनिधियों में भी बदलनी चाहिए तस्वीर : राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि डिग्रियों में लड़कियों की संख्या बढ़ते देखना सुखद है। इससे देश में समृद्धि आती है और खुशहाली मिलती है। मंच पर सांसद रमेश कौशिक, विधायक मोहन लाल बड़ौली के अलावा महिला विधायक निर्मल चौधरी भी मौजूद हैं, यहां तस्वीर बदलनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों में भी महिलाओं की संख्या बढ़नी चाहिए। राज्यपाल ने कुलपति प्रो. राजेंद्र अनायत के विजन को दूरगामी बताया। समारोह में पहुंचे एसीएस आनंद मोहन शरण ने विश्वविद्यालय की तुलना आईआईटी से कर दी। उन्होंने कहा कि यहां शोध के संसाधन बेहतर हैं और संतोषजनक हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को शोध कार्यों में काफी मदद मिल रही है।
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दीक्षांत समारोह राज्यपाल ने 625 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। इसके अलावा 70 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक व 89 छात्र-छात्राओं को पीएचडी की डिग्री प्रदान की। विश्वविद्यालय में इससे पहले भी 6 दीक्षांत समारोहों में उपाधियां पाने के मामले में बेटियों की संख्या लड़कों के या तो बराबर रही है या फिर ज्यादा रही है। लड़कियों ने सातवें दीक्षांत समारोह में भी इस रिकॉर्ड को कायम रखा है। डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे खिले नजर आए। डिग्रियां प्राप्त करने के बाद लड़कियों ने कहा कि आज के समय में पढ़ाई की क्या कीमत है, उससे वे भलीभांति परिचित हैं, इसलिए इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बरतना नहीं चाहती। दीक्षांत समारोह में डिग्रियां लेने पहुंची लड़कियों मेें अधिक नौकरियां कर रही हैं। इनमें अधिकतर लड़कियां शिक्षण क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
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इन्होंने प्राप्त की डिग्रियां
पाठ्यक्रम लड़के लड़कियां कुल
स्नातक 391 133 524
डयूल डिग्री 117 115 232
स्नातकोत्तर 153 294 447
पीएचडी 28 61 89
स्वर्ण पदक 31 35 66
बोली बेटियां
मुझे वर्ष 2018 में मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर में स्वर्ण पदक मिला है। मैं वर्तमान में क्लास-2 की नौकरी कर रही हूं। पढ़ाई की कीमत जानती हूं, इसलिए पढ़ाई में कभी ढिलाई नहीं बरती। पढ़-लिखकर बेहतर करिअर ही नहीं बनता, बल्कि होनहार लड़की के प्रति समाज को अपना नजरिया बदलने पर मजबूर होना पड़ता है। पढ़ाई में अव्वल रहेंगी तो ही बच्चों का जीवन भी संवार सकती हैं। प्रियदर्शिनी, रेवाड़ी।
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मास्टर डिग्री में स्वर्ण पदक प्राप्त कर बेहद खुश हूं। मैं बतौर सहायक प्रोफेसर कार्यरत हूं और आज भी हर काम को पूरी तन्यमता से करने में विश्वास रखती हूं। जब भी आप कोई उपलब्धि हासिल करते हो तो सभी आपकी तारीफ करते हैं, लेकिन उस उपलब्धि के पीछे किए गए संघर्ष को कोई नहीं देखता। लड़कियों का शिक्षा के क्षेत्र में हर विपत्ति को पार करते हुए अव्वल रहना सुखद है। इससे लोगों की रूढ़िवादी सोच में बदलाव आएगा। -साक्षी गहलावत
मास्टर डिग्री में स्वर्ण पदक लेने के सपने को पूरा करना है तो पढ़ाई तो करनी ही पड़ेगी। पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं होता, मजा तब है जब पढ़ाई पूरी मेहनत से की जाए और स्वयं को सिद्ध किया जाए। लड़कियों में यह जुनून ज्यादा है। वे हमेशा करिअर को लेकर गंभीर रहती है। यही कारण है कि लड़कों से आगे निकल जाती हैं। समाज भी लड़कियों के प्रति अपनी सोच को उनकी उपलब्धियों के हिसाब से बदलता है। -दिव्या गर्ग
जनप्रतिनिधियों में भी बदलनी चाहिए तस्वीर : राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि डिग्रियों में लड़कियों की संख्या बढ़ते देखना सुखद है। इससे देश में समृद्धि आती है और खुशहाली मिलती है। मंच पर सांसद रमेश कौशिक, विधायक मोहन लाल बड़ौली के अलावा महिला विधायक निर्मल चौधरी भी मौजूद हैं, यहां तस्वीर बदलनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों में भी महिलाओं की संख्या बढ़नी चाहिए। राज्यपाल ने कुलपति प्रो. राजेंद्र अनायत के विजन को दूरगामी बताया। समारोह में पहुंचे एसीएस आनंद मोहन शरण ने विश्वविद्यालय की तुलना आईआईटी से कर दी। उन्होंने कहा कि यहां शोध के संसाधन बेहतर हैं और संतोषजनक हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को शोध कार्यों में काफी मदद मिल रही है।

दीक्षांत समारोह में छात्रा को डिग्री देते कुलाधिपति राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय। संवाद- फोटो : Sonipat