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सुकून चाहते हैं तो पहले मन में सुकून लाना होगा : माता सुदीक्षा

Sun, 29 Oct 2023 01:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 29 Oct 2023 01:20 AM IST
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If you want peace then you have to bring peace in your mind first: Mata Sudiksha
सोनीपत के भोड़वाल माजरी स्थित समागम स्थल पर फूलों से सजी पालकी में सवार होकर लोगों का अभिवादन स
गन्नौर (सोनीपत)। हर इंसान चाहता है कि विश्व में शांति हो, सुकून हो, हर कोई सुकून की जिंदगी जी पाये। वास्तविक रूप में यह तभी संभव है, जब हम अपने अंतर्मन में पहले सुकून ले आयें। उक्त बातें निरंकारी सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज ने शनिवार को 76वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के शुभारंभ पर मानवता के नाम दिए संदेश में कहीं हैं। ‘सुकून अंतर्मन का’ शीर्षक पर आधारित तीन दिवसीय संत समागम भोड़वाल माजरी स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल में आयोजित किया गया। इसमें देश-विदेश से करीब 4 लाख की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रवचनों का आनंद प्राप्त किया।
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उन्होंने कहा कि जब हम स्वयं बेचैन हैं, हमारे अंतर्मन में उथल-पुथल है तो हम कहीं पर भी चले जाएं, हमें सुकून प्राप्त नहीं हो सकता। हमें सही मायनों में सुकून प्राप्त करना है तो पहले मानवीय गुणों को अपनाना होगा। उसके उपरांत ही संसार के लिए वरदान बन सकते हैं। हमारे मन में यदि स्वयं के लिए मानवता का भाव नहीं है तो हमारे जीवन में चैन, अमन, सुकून नहीं आ सकता।
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अंत में माता सुदीक्षा ने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा सुकून परमात्मा को जानकर उनके साथ जुड़ने में ही है। जब हम निरंकार प्रभू से जुड़ जाते हैं तब हर समय हर स्थान पर केवल परमात्मा के ही दर्शन होते हैं। प्रेमभाव से युक्त मन में सुकून धारण कर इसकी लहरें अपने प्रियजनों से होते हुए पूरे देश व विश्व में फैलती जाएंगी। हमें आग बुझाने वालों में शामिल होना है, आग लगाने वालों में नहीं।
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दिव्य युगल का हुआ भव्य आगमन

सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता के समागम स्थल पर आगमन होते ही संत निरंकारी मंडल के प्रधान सीएल गुलाटी ने गुलदस्ते से माता का और मंडल के महासचिव सुखदेव सिंह ने निरंकारी राजपिता का स्वागत किया। कार्यकारिणी समिति की सदस्य राजकुमारी ने सद्गुरु माता को फूलों की माला पहनाई, जबकि रोशन मीनार संत जेएस खुराना ने निरंकारी राजपिता को पुष्पमाला पहनाकर साध संगत की ओर से अभिनंदन किया। इसके उपरांत दिव्य युगल को एक फूलों से सजाई गई पालकी में विराजमान कर मुख्य प्रवेश द्वार से समागम पंडाल के मध्य मंच तक ले जाया गया। सबसे आगे सेवादल का बैंड था और उसके पीछे समागम के सभी प्रबंधक तथा देश-विदेश से आए प्रचारक महात्मा चल रहे थे।

11 शहरों से आए बच्चों के गीत के साथ चल रही थी पालकी
निरंकारी इंस्टीट्यूट ऑफ म्युज़िकल आर्ट्स के 11 शहरों से आये बच्चों के गाए जा रहे अभिनंदन गीत के साथ पालकी चल रही थी। इसकी अगुवाई संत निरंकारी मंडल की कार्यकारिणी समिति और केंद्रीय नियोजन एवं सलाहकार समिति के सदस्य कर रहे थे। दिव्य युगल को अपने मध्य पाकर आनंद से सराबोर श्रद्धालु भक्त भीगी नयनों से हाथ जोड़कर धन निरंकार के जयघोष के साथ उनका अभिवादन करने लगे।
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