नहीं पहुंचे किसान तो उद्योगपतियों से बैठक कर लौटी सरकार की समिति

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 20 Sep 2021 12:47 AM IST
मुरथल विवि में उद्योगतियों से बैठक करती राज्य स्तरीय समिति। संवाद
मुरथल विवि में उद्योगतियों से बैठक करती राज्य स्तरीय समिति। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। दिल्ली का रास्ता खुलवाने के लिए राज्य स्तरीय समिति की बैठक में किसान नहीं पहुंचे तो धरने से प्रभावित औद्योगिक क्षेत्रों के उद्योगपतियों ने अधिकारियों के सामने पहुंचकर अपनी परेशानी रखी। समिति के अध्यक्ष गृह सचिव राजीव अरोड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ही बैठक रखी गई थी। जरूरत पड़ी तो समिति कुंडली-सिंघू बॉर्डर पर पहुंच कर किसानों से बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि आगे भी बैठकों का दौर जारी रहेगा। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने एक फिर दोहराया कि नेशनल हाईवे-44 को किसानों ने नहीं पुलिस और सरकार ने ही बंद कर रखा है।
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कुंडली बॉर्डर पर करीब दस माह से किसानों का आंदोलन चल रहा है। जिसके कारण बॉर्डर बंद है और नेशनल हाईवे-44 से वाहनों का दिल्ली आवागमन रुका हुआ है। इसे लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लोगों को आ रही परेशानी के चलते सरकार को मार्ग खुलवाने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार सरकार ने एसीएस राजीव अरोड़ा की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी का गठन किया था। जिसने 19 सितंबर को मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के सभागार में बैठक निर्धारित कर संयुक्त किसान मोर्चा के 43 किसान नेताओं को न्योता भेजा था, लेकिन एक दिन पहले ही किसान मोर्चा ने बैठक कर समिति की बैठक में न जाने की घोषणा की थी।

रविवार को तय कार्यक्रम के तहत बैठक आयोजित की गई, लेकिन किसान नेता नहीं पहुंचे। इसमें राई, कुंडली, बड़ी, मुरथल के अलावा बहादुरगढ़ से संबंधित उद्योगपति एसोसिएशनों के पदाधिकारी जरूर पहुंचे। उद्योगपतियों ने समिति के सामने अपनी समस्या रखी। राई इंडस्ट्रियल मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश देवगन ने बताया कि कुंडली बॉर्डर पर किसानों के धरने के कारण अब तक उद्योगपतियों को करीब 50 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। मार्ग बंद होने से स्थिति लगातार गंभीर बनती जा रही है। समिति के सामने यह मांग भी रखी गई है वैकल्पिक रास्ते खोले जाएं। कुंडली औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन से धीरज चौधरी ने बताया कि कमेटी के साथ बैठक में नुकसान की रिपोर्ट दी गई है। सोनीपत जिले में 5 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। 30 प्रतिशत उद्योग रेवेन्यू लॉस में हैं और बहुत सी फैक्टरियां यहां से पलायन भी कर चुकी हैं। अब समस्या का हल निकलना चाहिए। समिति ने इसके लिए लगातार प्रयास करने का आश्वासन दिया।
बैठक में समिति अध्यक्ष एसीएस राजीव अरोड़ा के साथ पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल, एडीजीपी संदीप खिरवार, स्पेशल सेक्रेट्री बलकार सिंह, कमिश्नर पंकज यादव, डीसी सोनीपत ललित सिवाच, डीसी झज्जर श्यामलाल पूनिया, एसपी सोनीपत जश्नदीप सिंह रंधावा, एसपी राजेश दुग्गल मौजूद रहे।
एसीएस ने कहा जारी रहेगा बैठकों का दौर
सरकार की हाई लेवल कमेटी के अध्यक्ष एसीएस राजीव अरोड़ा ने कहा कि यह कमेटी की पहली बैठक थी, जिसमें किसानों को भी बुलाया गया था। हालांकि किसान नहीं पहुंचे। उद्योगपति बैठक में पहुंचे हैं और उन्होंने अपनी परेशानी बताई है। क्षेत्रीय उद्योगों में आ रही दिक्कतों पर चर्चा हुई है। किसानों के साथ बातचीत करने का प्रयास जारी रहेगा। बातचीत के लिए समिति कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर भी जा सकती है।

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