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सरकार व किसानों के बीच बातचीत की उम्मीद, किसानों ने पहल करके पीएम को पत्र भेजा

Sat, 22 May 2021 12:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 22 May 2021 12:16 AM IST
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Hope to negotiate between the government and the farmers, farmers took the initiative and sent a letter to the PM
सरकार व किसानों के बीच पिछले चार माह से बंद बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। क्योंकि किसानों ने बातचीत शुरू करने की पहल करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कोरोना के बीच चल रहे धरने को किसानों की मांग पूरी करके खत्म कराने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। हालांकि अभी तक किसी भी तरफ से पहल नहीं होने के कारण बातचीत अटकी हुई थी, जो अब किसानों के पत्र के बाद शुरू होने की उम्मीद है।
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22 जनवरी को हुई थी आखिरी दौर की बातचीत
कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों को छह महीने होने वाले हैं। इस बीच सरकार व किसानों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका है। सरकार व किसानों के बीच आखिरी दौर की बातचीत 22 जनवरी को हुई थी और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है। क्योंकि किसी की तरफ से पहल नहीं हो रही थी। जहां सरकार से प्रस्ताव मिलने के बाद ही किसान बातचीत के लिए जाने की बात कहते थे, वहीं सरकार ने साफ कर दिया था कि अगर किसान बातचीत करना चाहते हैं तो वह आगे आएं। इसलिए ही पिछले चार माह से बातचीत का रास्ता नहीं खुल रहा था। अब वह रास्ता खुलता दिख रहा है, क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा ने बातचीत शुरू करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य बलवीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हनान मुला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहा, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव, अभिमन्यु कोहाड़ की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जिस तरह से कोरोना चल रहा है। ऐसे में सरकार बातचीत करके किसानों की समस्या का समाधान करे तो वह आराम से अपने घर चले जाएंगे। इसके साथ ही शर्त रखी गई है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द करें और फसलों की खरीद के लिए एमएसपी का कानून बनाएं। किसान नेताओं का कहना है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते सरकार को बड़ा दिल करके किसानों की मांगों पर विचार करना चाहिए। इसके साथ ही सरकार से गांवों में संक्रमण को फैलने से रोकने के प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की गई है।
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