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स्वास्थ्य विभाग का दावा - जिले में 2600 से ज्यादा बेड खाली, फिर भी मरीजों को नहीं किया जा रहा भर्ती
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सोनीपत। जिस तरह से प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिले में बेड खाली होने का दावा कर रहे हैं, उससे यहां मरीजों को किसी तरह की परेशानी होनी ही नहीं चाहिए। लेकिन मरीज के परिजनों को कहना है कि उन्हें बेड खाली नहीं होने की बात कही जा रही है। कई जगह को परिजनों से अभद्रता तक की जा रही है। निजी अस्पतालों में हालात बुरे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 6639 सक्रिय मरीज हैं, जिनमें से 6059 होम आइसोलेट किए गए हैं। वहीं 2639 बेड खाली हैं, जिनमें वेंटिलेटर, आईसीयू और ऑक्सीजन बेड भी शामिल हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी साफ कर सकते हैं कि वह सरकार को रिपोर्ट भेजने में फर्जीवाड़ा कर रहे हैं या मरीजों को जानबूझ कर भर्ती नहीं किया जा रहा है।
विभाग ने बेड बढ़ाकर 3219 किए, 972 गंभीर मरीजों के लिए
प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना का कहर देखते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अलावा 18 प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार इस समय कोरोना के मरीजों के लिए 3219 बेड किए गए हैं जो एक सप्ताह पहले तक काफी कम थे। इनमें 102 वेंटिलेटर, 60 आईसीयू व 810 ऑक्सीजन बेड हैं जिन पर गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाएगा। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 580 मरीज ही अस्पतालों में भर्ती हैं। इस तरह देखा जाए तो अस्पतालों में गंभीर मरीजों वाले बेड काफी संख्या में खाली हैं, लेकिन जब कोई मरीज मेडिकल कॉलेज या प्राइवेट अस्पताल में जाता है तो उसको भर्ती नहीं किया जा रहा।
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प्राइवेट अस्पतालों में बुरे हालात, नोडल अधिकारियों तक को नहीं देते जानकारी
अस्पतालों में बेड खाली बताए जा रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। मरीज जिदंगी दांव पर लगाकर भटकने को मजबूर हैं। रविवार को कई मरीज अस्पताल में बेड के लिए भटकते नजर आए। कई को यह कहकर रोके रखा गया कि कोई बेड खाली होने पर उनके मरीज को भर्ती कर लिया जाएगा। इस तरह से प्राइवेट अस्पतालों के हालात ज्यादा खराब है। उन पर शिकंजा कसने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, लेकिन उन अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्राइवेट अस्पताल वाले कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। वहीं अब खानपुर मेडिकल कॉलेज के हालात भी खराब हो गए हैं और वहां भी मरीजों को भर्ती करने से इनकार किया जा रहा है।
जिले में कितने बेड खाली हैं, उसकी पूरी रिपोर्ट प्राइवेट अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग के पास भेजनी होती है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग को सरकारी अस्पताल के बेड खाली होने की पूरी जानकारी उसमें शामिल करके मुख्यालय भेजी जाती है। जिले में बेड बढ़ाए गए हैं और उसके बाद भी मरीजों को बेड मिलने में परेशानी आ रही है तो उसकी जानकारी कराई जाएगी कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। किसी की लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। - अशोक बंसल, एडीसी
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 6639 सक्रिय मरीज हैं, जिनमें से 6059 होम आइसोलेट किए गए हैं। वहीं 2639 बेड खाली हैं, जिनमें वेंटिलेटर, आईसीयू और ऑक्सीजन बेड भी शामिल हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी साफ कर सकते हैं कि वह सरकार को रिपोर्ट भेजने में फर्जीवाड़ा कर रहे हैं या मरीजों को जानबूझ कर भर्ती नहीं किया जा रहा है।
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विभाग ने बेड बढ़ाकर 3219 किए, 972 गंभीर मरीजों के लिए
प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना का कहर देखते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अलावा 18 प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार इस समय कोरोना के मरीजों के लिए 3219 बेड किए गए हैं जो एक सप्ताह पहले तक काफी कम थे। इनमें 102 वेंटिलेटर, 60 आईसीयू व 810 ऑक्सीजन बेड हैं जिन पर गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाएगा। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 580 मरीज ही अस्पतालों में भर्ती हैं। इस तरह देखा जाए तो अस्पतालों में गंभीर मरीजों वाले बेड काफी संख्या में खाली हैं, लेकिन जब कोई मरीज मेडिकल कॉलेज या प्राइवेट अस्पताल में जाता है तो उसको भर्ती नहीं किया जा रहा।
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प्राइवेट अस्पतालों में बुरे हालात, नोडल अधिकारियों तक को नहीं देते जानकारी
अस्पतालों में बेड खाली बताए जा रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। मरीज जिदंगी दांव पर लगाकर भटकने को मजबूर हैं। रविवार को कई मरीज अस्पताल में बेड के लिए भटकते नजर आए। कई को यह कहकर रोके रखा गया कि कोई बेड खाली होने पर उनके मरीज को भर्ती कर लिया जाएगा। इस तरह से प्राइवेट अस्पतालों के हालात ज्यादा खराब है। उन पर शिकंजा कसने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, लेकिन उन अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्राइवेट अस्पताल वाले कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। वहीं अब खानपुर मेडिकल कॉलेज के हालात भी खराब हो गए हैं और वहां भी मरीजों को भर्ती करने से इनकार किया जा रहा है।
जिले में कितने बेड खाली हैं, उसकी पूरी रिपोर्ट प्राइवेट अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग के पास भेजनी होती है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग को सरकारी अस्पताल के बेड खाली होने की पूरी जानकारी उसमें शामिल करके मुख्यालय भेजी जाती है। जिले में बेड बढ़ाए गए हैं और उसके बाद भी मरीजों को बेड मिलने में परेशानी आ रही है तो उसकी जानकारी कराई जाएगी कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। किसी की लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। - अशोक बंसल, एडीसी