{"_id":"1ab55dec9a5a69215cb407392ded6adc","slug":"gym-bunny-chair-of-xen-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अखाड़ा बनी एक्सईएन की कुर्सी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अखाड़ा बनी एक्सईएन की कुर्सी
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनीपत
Updated Mon, 01 Sep 2014 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में एक महीने से एक्सईएन की कुर्सी को लेकर युद्ध छिड़ा हुआ है। कुर्सी अखाड़ा बन गई है और तीन अधिकारी आपस में द्वंद्व कर रहे हैं।
विज्ञापन
इस द्वंद्वयुद्ध के कारण हुडा में काम तो रुके ही हैं, साथ ही कर्मचारी भी परेशान हो गये हैं। अधिकारियों की पहुंच की यह लड़ाई उस समय शुरू हुई थी, जब एक एसडीओ प्रमोशन पाकर एक्सईएन बन गये थे। ये नए नवेले एक्सईएन हुडा में काबिज हुए तो पुराने वाले एक्सईएन ने राजीव गांधी एजुकेशन सिटी की ओर रुख किया। एक्सईएन की कुर्सी के लिये यह द्वंद्व कर्मचारियों के लिये भी चर्चा का विषय बन गया है।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार हुडा में एसडीओ के पद पर कार्यरत दीपक गोयल को जुलाई माह में पदोन्नति मिल गई थी। पदोन्नति के बाद वे कुछ दिन एसई के पीए रहे, इसके बाद उन्होंने जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुडा के एक्सईएन का पदभार संभाल लिया। हुडा के पहले एक्सईएन एके मित्तल को तबादले का पता लगा तो उन्होंने भी संपर्क साधने शुरू कर दिये। उनके संपर्क साधने का सीधा असर राजीव गांधी एजुकेशन सिटी पर पड़ा। यहां पर कार्यरत एक्सईएन डीके आहुजा का 24 जुलाई को तबादला कर दिया गया।
विज्ञापन
इस पर एके मित्तल ने एक्सईएन के तौर पर 12 अगस्त को राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में ज्वॉइन कर लिया। अभी मुश्किल से दो सप्ताह ही बीते थे कि अब राजीव गांधी एजुकेशन सिटी से एक्सईएन एके मित्तल को हटा दिया गया। एके मित्तल को पानीपत हुडा में एक्सईएन बनाकर भेज दिया गया। इसके दो दिन बाद ही डीके आहुजा फिर से राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में एक्सईएन बनकर आ गये।
एक माह तक लटका काम
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में लगभग एक महीने तक सभी प्रकार के काम लटके रहे। 24 जुलाई को सुबह के समय एक्सईएन डीके आहुजा आए थे, लेकिन दोपहर में उनका तबादला कर दिया गया था। इसके बाद अगस्त का पूरा महीना बीत गया, लेकिन कोई काम नहीं हो पाया। नए एक्सईएन एके मित्तल ने 12 अगस्त को ज्वाइन तो कर लिया, लेकिन एक दिन काम पर आकर फिर छुट्टी चले गये। इसके बाद तीन-चार दिन आफिस आये तो उन्होंने वर्क़िग समझने की कोशिश की। शायद अभी वर्क़िग समझी भी नहीं थी कि उनका भी तबादला हो गया। इस तरह से लगभग एक माह बीत गया।
विभागीय कार्रवाई हैं तबादले
उठापटक के दौर के बारे में जब अधिकारियाें से बातचीत की गई तो उन्होंने इसे रूटीन बात बताई। अब चाहे हुडा के नए एक्सईएन दीपक गोयल हो या हुडा और राजीव गांधी एजुकेशन सिटी दोनाें के पुराने एक्सईएन एके मित्तल हों। दोनों ने बातचीत में ये ही कहा कि तबादले हमारी मर्जी पर नहीं होते, बल्कि विभागीय कार्यवाही होती है। कुछ इसी तरह की बात राजीव गांधी एजुकेशन सिटी के एक्सईएन डीके आहुजा ने भी की।