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गणेश चतुर्थी : तीन योग में होगा गौरी पुत्र का आगमन
Tue, 03 Sep 2024 09:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 03 Sep 2024 09:09 PM IST
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फोटो 22- चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक।
सोनीपत। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 7 सितंबर को तीन योग में गौरी पुत्र गणेश का आगमन होगा। चतुर्थी तिथि 6 सितंबर को दोपहर 3:01 बजे प्रारंभ होकर 7 सितंबर को शाम 5:57 बजे तक रहेगी। ऐसे में शनिवार को गणेश चतुर्थी का पर्व जिलाभर में श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। गणेश उत्सव को लेकर तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि सर्वप्रथम पूजनीय गौरी नंदन भगवान गणेश जी की आराधना करने से ही शुभ कार्यों को प्रारंभ किया जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान गणेश जी का जन्म भाद्र शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। उस दिन बुधवार था। 7 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता जिलाभर के मंदिरों सहित विभिन्न जगह पंडाल व घर-घर पधारेंगे। गौरी पुत्र को विराजमान कर 10 दिन तक उनकी आराधना की जाएगी। कई जगह जागरण व संकीर्तन किए जाएंगे। 17 सितंबर को हर्षोंल्लास से विसर्जन कर बप्पा को विदाई दी जाएगी।
पंडित अमित शौनक ने बताया कि भगवान गणेश को अधिपति देवता भी कहा जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए गणेश चतुर्थी पर्व खास रहेगा। तीन योग में गणपति बप्पा की आराधना करना श्रद्धालुओं के लिए कल्याणकारी रहेगा। शुभ मुहूर्त में स्थापना व पूजन से विघ्नहर्ता गणेश सब भक्तों की मनोकामना पूर्ण करेंगे। चतुर्थी पर परिवार में सुख समृद्धि व अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं गणेश चतुर्थी पर निर्जल व्रत रखती हैं। चारों ओर गौरी पुत्र के साथ भगवान शिव व मां पार्वती की आराधना की जाती है। वहीं, रवि योग में गणेश जी का आगमन सभी विघ्नों को दूर करता है। इसे अशुभ योगों के प्रभाव को नष्ट करने वाला भी माना गया है। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को मोदक, लड्डू, लाल फूल, अमरूद, लाल सिंदूर व केले अवश्य अर्पित करें।
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स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
-अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:35 से दोपहर 1:53 बजे तक।
-लाभ चौघड़िया - दोपहर 1:54 से 3:27 बजे तक।
-अमृत चौघड़िया - दोपहर बाद 3:28 से 5:01 बजे तक।
तीन योग में आराधना विशेष फलदायी
सर्वार्थ सिद्धि योग - 7 सितंबर को दोपहर 12:34 से 8 सितंबर सुबह 6:03 बजे तक।
रवि योग - 6 सितंबर सुबह 9:25 से 7 सितंबर दोपहर 12:34 बजे तक।
ब्रह्म योग - 6 सितंबर रात 10:13 से 7 सितंबर रात 11:15 बजे तक।
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चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि सर्वप्रथम पूजनीय गौरी नंदन भगवान गणेश जी की आराधना करने से ही शुभ कार्यों को प्रारंभ किया जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान गणेश जी का जन्म भाद्र शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। उस दिन बुधवार था। 7 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता जिलाभर के मंदिरों सहित विभिन्न जगह पंडाल व घर-घर पधारेंगे। गौरी पुत्र को विराजमान कर 10 दिन तक उनकी आराधना की जाएगी। कई जगह जागरण व संकीर्तन किए जाएंगे। 17 सितंबर को हर्षोंल्लास से विसर्जन कर बप्पा को विदाई दी जाएगी।
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पंडित अमित शौनक ने बताया कि भगवान गणेश को अधिपति देवता भी कहा जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए गणेश चतुर्थी पर्व खास रहेगा। तीन योग में गणपति बप्पा की आराधना करना श्रद्धालुओं के लिए कल्याणकारी रहेगा। शुभ मुहूर्त में स्थापना व पूजन से विघ्नहर्ता गणेश सब भक्तों की मनोकामना पूर्ण करेंगे। चतुर्थी पर परिवार में सुख समृद्धि व अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं गणेश चतुर्थी पर निर्जल व्रत रखती हैं। चारों ओर गौरी पुत्र के साथ भगवान शिव व मां पार्वती की आराधना की जाती है। वहीं, रवि योग में गणेश जी का आगमन सभी विघ्नों को दूर करता है। इसे अशुभ योगों के प्रभाव को नष्ट करने वाला भी माना गया है। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को मोदक, लड्डू, लाल फूल, अमरूद, लाल सिंदूर व केले अवश्य अर्पित करें।
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स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
-अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:35 से दोपहर 1:53 बजे तक।
-लाभ चौघड़िया - दोपहर 1:54 से 3:27 बजे तक।
-अमृत चौघड़िया - दोपहर बाद 3:28 से 5:01 बजे तक।
तीन योग में आराधना विशेष फलदायी
सर्वार्थ सिद्धि योग - 7 सितंबर को दोपहर 12:34 से 8 सितंबर सुबह 6:03 बजे तक।
रवि योग - 6 सितंबर सुबह 9:25 से 7 सितंबर दोपहर 12:34 बजे तक।
ब्रह्म योग - 6 सितंबर रात 10:13 से 7 सितंबर रात 11:15 बजे तक।

फोटो 22- चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक।