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47 छात्राओं के 11वीं में 80 प्रतिशत नंबर, 12वीं में फेल
ब्यूरो अमर उजाला सोनीपत
Updated Fri, 26 May 2017 11:18 PM IST
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12वीं में फेल होने के बाद स्कूल के बाहर उदास खड़ी छात्राएं।
- फोटो : amarujala beuro
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जब 11वीं में हमारे 80 प्रतिशत से ज्यादा नंबर थे तो 12वीं में फेल कैसे हो गईं। यह सवाल 12वीं का परीक्षा परिणाम आने के बाद काठ मंडी स्थित हिंदू कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल की 47 छात्राओं ने उठाया है। इन सभी छात्राओं को 12वीं में फेल कर दिया गया है और इनमें भी अधिकतर अकाउंट व बिजनेस में फेल हुई हैं। इससे इनके फेल होने पर खड़ा हो रहा सवाल ज्यादा गहरा गया है। इसके चलते छात्राओं ने शुक्रवार को अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पर पहुंचकर हंगामा किया और कॉपी सही चेक नहीं किए जाने का आरोप लगाया। छात्राओं का गुस्सा इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि फेल होने के बाद एक छात्रा कोमा में पहुंचने के कारण अस्पताल में भर्ती है। वहीं, आठ छात्राओं की परिजनों ने शादी की तैयारी कर दी है। इसके बावजूद स्कूल की ओर से उनकी कॉपी चेक कराने के साथ ही री अपीयर के लिए फार्म भरने में कोई मदद नहीं की जा रही है।
77 में से केवल 30 पास
हिंदू कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल काठ मंडी में 12वीं कक्षा की कॉमर्स संकाय में 77 छात्राएं पढ़ाई कर रहीं थीं। इन सभी ने मार्च माह में हुई हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षा दी थी। छात्राओं के अनुसार उनकी परीक्षा 10वीं व 11वीं कक्षा की तरह अच्छी हुई थी, क्योंकि 10वीं व 11वीं कक्षा में उनको 80 प्रतिशत से ज्यादा नंबर मिले थे। इसके बावजूद शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित किए गए परीक्षा परिणाम में 47 छात्राएं फेल हो गईं। इनमें से अधिकतर छात्राओं को अकाउंट व बिजनेस में फेल किया गया, जबकि एक या दो छात्राएं गणित में भी फेल हैं। छात्राओं ने कहा कि उनको किसी भी सब्जेक्ट में 80 प्रतिशत से कम नंबर आने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उनको फेल कर दिया गया। जब रिजल्ट देखा तो उनके होश उड़ गए। इस तरह उनकी परेशानी बढ़ना लाजमी था। वे अपनी समस्या लेकर कई बार स्कूल पहुंचीं, लेकिन प्रिंसिपल ने किसी तरह का जवाब तक नहीं दिया। छात्रा अंजलि, प्रियंका, ज्योति, अपूर्वी के अलावा अभिभावक पूनम, नरेश आदि का आरोप है कि स्कूल की ओर से उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है। इस कारण ही उनको परेशान होकर स्कूल पर हंगामा करना पड़ा। यह हंगामा कई घंटों तक चलता रहा। प्रिंसिपल किरण बाला ने किसी तरह छात्राओं व उनके अभिभावकों को समझाकर शांत कराया।
कॉपी चेक कराने और री अपीयर फार्म भरवाने की मांग
छात्राओं का कहा है कि उनमें से अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र से पढ़ने के लिए स्कूल में आती हैं। ऐसे में उनको स्कूल से किसी तरह का जवाब नहीं मिलने पर बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वे सभी अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने के साथ ही री अपीयर के लिए फॉर्म भरना चाहती हैं। ऐसे में जब वे फॉर्म भरवाने के लिए इंटरनेट कैफे पर जाती हैं तो वहां लड़कों की ज्यादा भीड़ होती है। इससे उन्हें वहा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले चार दिन से वे फार्म भरने के लिए कैफे के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अभी तक एक भी छात्रा का फार्म नहीं भरा गया है। इस कारण छात्राओं ने प्रिंसिपल से कॉपी दोबारा चेक कराने के साथ ही री अपीयर फार्म स्कूल में भरवाने की मांग की।
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बेटी की पुरानी मार्कशीट लेकर पहुंची मां
छात्रा अंजलि की मां पूनम ने बताया कि उनकी बेटी के 10वीं में 90 प्रतिशत तो 11वीं में 82 नंबर थे, लेकिन 12वीं में वह बिजनेस व अकाउंट में फेल हो गई। यह दिखाने के लिए अपनी बेटी के पुरानी कक्षाओं के अंकपत्र भी साथ लाईं थीं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को इस तरह फेल होने पर सभी पेपर दोबारा देने की बात बता दी गई, जिससे वह सदमे से कोमा में चली गई। वह पिछले पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती है। इस तरह ही छात्रा हिमांशी के 10वीं व 11वीं की परीक्षाओं में 80 प्रतिशत अंक हैं, लेकिन 12वीं की परीक्षा में उसे भी फेल कर दिया गया। हिमांशी का आरोप है कि बोर्ड की ओर से उसके गलत नंबर दिए गए हैं। अगर आज भी परीक्षा ली जाए तो वह अच्छे नंबरों से पास हो जाएगी।
परिजन अब पढ़ाने की जगह शादी कर देंगे
छात्रा प्रियंका ने कहा कि जब परिजनों को उसके दो विषयों में फेल होने का पता चला तो उन्होंने कहा कि अब उसे पढ़ाकर क्या करेंगे। अब कोई लड़का देखकर उसकी शादी करनी होगी। अभिभावकों ने स्कूल में भी साथ आने से मना कर दिया। प्रियंका के अलावा भी सात छात्राओं ने कहा कि उनके भी परिवार के लोग फेल होने पर शादी की तैयारी में लग गए हैं।
स्कूल का रिजल्ट देखकर विश्वास नहीं हुआ कि इतनी छात्राएं कैसे फेल हो सकती हैं। इसलिए रिजल्ट को दोबारा जांच के लिए शिक्षा बोर्ड को पत्र भेजा है, क्योंकि छात्राओं के फेल होने में स्कूल की कमी नहीं है। स्कूल की छात्राएं इससे पहले भी उनसे मिली थीं तो उन्होंने पूरी मदद करने का आश्वासन दिया था। अब उनके री अपीयर फार्म दोबारा भरवाने के लिए स्कूल में ही इंतजाम किया जाएगा।
-किरण बाला, प्रिंसिपल हिंदू कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल
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77 में से केवल 30 पास
हिंदू कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल काठ मंडी में 12वीं कक्षा की कॉमर्स संकाय में 77 छात्राएं पढ़ाई कर रहीं थीं। इन सभी ने मार्च माह में हुई हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षा दी थी। छात्राओं के अनुसार उनकी परीक्षा 10वीं व 11वीं कक्षा की तरह अच्छी हुई थी, क्योंकि 10वीं व 11वीं कक्षा में उनको 80 प्रतिशत से ज्यादा नंबर मिले थे। इसके बावजूद शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित किए गए परीक्षा परिणाम में 47 छात्राएं फेल हो गईं। इनमें से अधिकतर छात्राओं को अकाउंट व बिजनेस में फेल किया गया, जबकि एक या दो छात्राएं गणित में भी फेल हैं। छात्राओं ने कहा कि उनको किसी भी सब्जेक्ट में 80 प्रतिशत से कम नंबर आने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उनको फेल कर दिया गया। जब रिजल्ट देखा तो उनके होश उड़ गए। इस तरह उनकी परेशानी बढ़ना लाजमी था। वे अपनी समस्या लेकर कई बार स्कूल पहुंचीं, लेकिन प्रिंसिपल ने किसी तरह का जवाब तक नहीं दिया। छात्रा अंजलि, प्रियंका, ज्योति, अपूर्वी के अलावा अभिभावक पूनम, नरेश आदि का आरोप है कि स्कूल की ओर से उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है। इस कारण ही उनको परेशान होकर स्कूल पर हंगामा करना पड़ा। यह हंगामा कई घंटों तक चलता रहा। प्रिंसिपल किरण बाला ने किसी तरह छात्राओं व उनके अभिभावकों को समझाकर शांत कराया।
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कॉपी चेक कराने और री अपीयर फार्म भरवाने की मांग
छात्राओं का कहा है कि उनमें से अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र से पढ़ने के लिए स्कूल में आती हैं। ऐसे में उनको स्कूल से किसी तरह का जवाब नहीं मिलने पर बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वे सभी अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने के साथ ही री अपीयर के लिए फॉर्म भरना चाहती हैं। ऐसे में जब वे फॉर्म भरवाने के लिए इंटरनेट कैफे पर जाती हैं तो वहां लड़कों की ज्यादा भीड़ होती है। इससे उन्हें वहा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले चार दिन से वे फार्म भरने के लिए कैफे के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अभी तक एक भी छात्रा का फार्म नहीं भरा गया है। इस कारण छात्राओं ने प्रिंसिपल से कॉपी दोबारा चेक कराने के साथ ही री अपीयर फार्म स्कूल में भरवाने की मांग की।
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बेटी की पुरानी मार्कशीट लेकर पहुंची मां
छात्रा अंजलि की मां पूनम ने बताया कि उनकी बेटी के 10वीं में 90 प्रतिशत तो 11वीं में 82 नंबर थे, लेकिन 12वीं में वह बिजनेस व अकाउंट में फेल हो गई। यह दिखाने के लिए अपनी बेटी के पुरानी कक्षाओं के अंकपत्र भी साथ लाईं थीं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को इस तरह फेल होने पर सभी पेपर दोबारा देने की बात बता दी गई, जिससे वह सदमे से कोमा में चली गई। वह पिछले पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती है। इस तरह ही छात्रा हिमांशी के 10वीं व 11वीं की परीक्षाओं में 80 प्रतिशत अंक हैं, लेकिन 12वीं की परीक्षा में उसे भी फेल कर दिया गया। हिमांशी का आरोप है कि बोर्ड की ओर से उसके गलत नंबर दिए गए हैं। अगर आज भी परीक्षा ली जाए तो वह अच्छे नंबरों से पास हो जाएगी।
परिजन अब पढ़ाने की जगह शादी कर देंगे
छात्रा प्रियंका ने कहा कि जब परिजनों को उसके दो विषयों में फेल होने का पता चला तो उन्होंने कहा कि अब उसे पढ़ाकर क्या करेंगे। अब कोई लड़का देखकर उसकी शादी करनी होगी। अभिभावकों ने स्कूल में भी साथ आने से मना कर दिया। प्रियंका के अलावा भी सात छात्राओं ने कहा कि उनके भी परिवार के लोग फेल होने पर शादी की तैयारी में लग गए हैं।
स्कूल का रिजल्ट देखकर विश्वास नहीं हुआ कि इतनी छात्राएं कैसे फेल हो सकती हैं। इसलिए रिजल्ट को दोबारा जांच के लिए शिक्षा बोर्ड को पत्र भेजा है, क्योंकि छात्राओं के फेल होने में स्कूल की कमी नहीं है। स्कूल की छात्राएं इससे पहले भी उनसे मिली थीं तो उन्होंने पूरी मदद करने का आश्वासन दिया था। अब उनके री अपीयर फार्म दोबारा भरवाने के लिए स्कूल में ही इंतजाम किया जाएगा।
-किरण बाला, प्रिंसिपल हिंदू कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल