विश्वासघात दिवस: किसानों ने 500 से अधिक स्थानों पर राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन, फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी
एसकेएम ने कहा कि जल्द वादे पूरे नहीं किए तो फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा। एसकेएम नेता जोगेंद्र सिंह उगराहां ने कहा कि एसकेएम मिशन उत्तर प्रदेश अब फिर शुरू करेगा। राज्य भर में भाजपा को दंडित करने और हराने के लिए अभियान चलाएगा।
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के साथ किए गए वादों में से एक भी पूरा नहीं किया है, जिसके विरोध में सोमवार को देशभर में 500 से अधिक स्थानों पर विश्वासघात दिवस मनाते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए। एसकेएम ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर जल्द ही 9 दिसंबर, 2021 को किए गए वादे पूरे नहीं किए गए तो उनके पास आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा।
सोमवार को एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि एसकेएम के आह्वान पर देशभर में 500 से ज्यादा स्थानों पर लाखों किसानों ने ‘विश्वासघात दिवस’ का आयोजन किया। इस दौरान किसानों में सरकार के प्रति रोष जताया। सरकार की वादाखिलाफी से खफा किसानों ने जगह-जगह प्रधानमंत्री के पुतले फूंके। भारत के सैकड़ों जिलों और तहसीलों में विरोध प्रदर्शन हुए और जिला कलेक्टर, एडीएम और एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में मांग की है कि देश के मुखिया होने के नाते देश के सबसे बड़े वर्ग अन्नदाता के हितों की रक्षा करें। सरकार को किसानों के साथ यह धोखाधड़ी करने के खिलाफ चेतावनी देना सांविधानिक दायित्व है। ज्ञापन में लिखा गया है कि किसानों की मेहनत से देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हुआ है। किसानों के अथक प्रयासों से तालाबंदी और आर्थिक मंदी के बावजूद देश के कृषि उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। किसानों के साथ छल करना विनाशकारी हो सकता है।
डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि मोर्चा किसानों के धैर्य को चुनौती देने के खिलाफ भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए घोषणा करता है कि यदि वादे जल्द पूरे नहीं किए गए तो किसानों के पास आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
एसकेएम नेता जगजीत डल्लेवाल ने कहा कि दावा किया कि सोमवार को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात, त्रिपुरा सहित अन्य राज्यों में दिनभर प्रदर्शनों, पैदल मार्च और पुतला जलाने का सिलसिला चलता रहा। किसानों के प्रदर्शन को हर वर्ग का साथ मिला।
एसकेएम नेता जोगेंद्र सिंह उगराहां ने कहा कि एसकेएम मिशन उत्तर प्रदेश अब फिर शुरू करेगा। राज्य भर में भाजपा को दंडित करने और हराने के लिए अभियान चलाएगा। मिशन के नए चरण की घोषणा तीन फरवरी को पत्रकारों से बातचीत में की जाएगी।
ज्यादातर राज्यों में मुकदमे वापसी की नहीं हुई पहल
केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल सरकार की तरफ से आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने के आश्वासन पर नाममात्र भी कार्रवाई नहीं हुई है। सिर्फ हरियाणा सरकार ने कुछ कागजी कार्रवाई की है और केस वापस लेने के कुछ आदेश जारी किए हैं। वहीं, शहीद किसान परिवारों को मुआवजा देने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ नहीं किया गया। हरियाणा सरकार की तरफ से मुआवजे की राशि और स्वरूप के बारे में भी कोई निर्णय घोषित नहीं हुआ है।
एमएसपी पर नहीं बनी कमेटी, लखीमपुर प्रकरण भी लटका
एमएसपी पर प्रधानमंत्री ने स्वयं और बाद में कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन न तो कमेटी के गठन की घोषणा की है और न ही कमेटी के स्वरूप व उसके कार्य के बारे में कोई जानकारी दी है। लखीमपुर खीरी हत्याकांड में एसआईटी की रिपोर्ट में षड्यंत्र की बात स्वीकार करने के बावजूद इस कांड के प्रमुख षड्यंत्रकारी अजय मिश्र टेनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।