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किसानों ने शुरू की गेहूं बिजाई की तैयारी, खाद नहीं पहुंचने से बढ़ने लगी परेशानी
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सोनीपत नई मंडी में डीएपी नहीं मिलने के बाद महज गेहूं का बीज लेकर जाता किसान। संवाद
- फोटो : Sonipat
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रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही डीएपी खाद की मांग बढ़ गई। जिले में डीएपी का रैक नहीं लगने के कारण इसकी मारामारी शुरू हो गई है। अक्तूबर में कृषि विभाग की तरफ से डीएपी की 8 हजार एमटी (मीट्रिक टन) की डिमांड भेजी गई थी, लेकिन अब तक महज 1800 एमटी ही पहुंच सका है। गेहूं बिजाई का समय नजदीक आने के कारण अब डीएपी के लिए किसानों की परेशानी बढ़नी शुरू हो जाएगी। कृषि अधिकारी किसानों को डीएपी की जगह एनपीके व एसएसपी के प्रयोग की सलाह दे रहे हैं।
खरीफ की फसल की कटाई के साथ ही रबी की फसल की बिजाई के लिए तैयारी शुरू हो गई है। गेहूं की बिजाई के समय किसान डीएपी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अक्तूबर व नवंबर में डीएपी डिमांड काफी अधिक बढ़ जाती है, लेकिन इस बार डिमांड के हिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही हैं। इसका खामियाजा किसानों को झेलना पड़ रहा है। नवंबर के लिए 5 हजार एमटी और दिसंबर के लिए 600 एमटी डीएपी की डिमांड भेजी गई है। डीएपी खाद विदेशों से आयात होती है, लेकिन इस बार खाद काफी कम आयात हुआ है। वर्तमान में जिले में डीएपी का स्टॉक महज 50 एमटी ही बचा हुआ है।
गन्नौर में किसान बोले, जल्द डीएपी नहीं मिली तो जताएंगे रोष
गन्नौर में किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द डीएपी नहीं मिली तो रोष प्रदर्शन किया जाएगा। गन्नौर में किसी भी सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं है। किसान अशोक राठी, रमेश राठी, करतार सिंह का कहना है कि यह समय गेहूं की बिजाई का है। इसमें डीएपी की काफी आवश्यकता होती है। जरूरत के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। सुबह से शाम तक समितियों पर इंतजार करने के बाद शाम को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। समितियों में किसान खाद के लिए चक्कर काट रहा है, लेकिन अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
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यह बोले किसान
वर्तमान में गेहूं की बिजाई का सही समय है। बारिश के बाद नमी बनी हुई है। अगर अब देरी की गई तो सिंचाई पर भी खर्च करना होगा, लेकिन इस समय डीएपी नहीं होने के कारण वह बिजाई नहीं कर पा रहे हैं।
- सतीश कुमार, तिहाड़
इस बार डीएपी नहीं मिल रही है, जिसके चलते मैंने फैसला लिया है कि इस बार बिना डीएपी के ही गेहूं की फसल की बिजाई करूंगा। अन्य कोई उर्वरक भी खेत में नहीं डालूंगा।
- सतीश, भटाना
गेहूं की फसल की बिजाई का समय नजदीक आ चुका है। मैं शहर में डीएपी लेने आया था, लेकिन कई दुकानों पर चक्कर लगाने के बाद भी डीएपी नहीं मिल पाई। सरकार को किसानों को डीएपी उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
- महेंद्र, बैंयापुर
डीएपी की कमी के चलते गेहूं की बिजाई नहीं हो पा रही है। इस बार मौसम में ठंड के चलते अगर इस समय गेहूं की बिजाई की जाए तो आगे फसल बेहतर होने की उम्मीद है। सरकार को तुरंत डीएपी की किल्लत खत्म करनी चाहिए।
- राजेंद्र, बैंयापुर
वर्जन
रासायनिक खादों का कम इस्तेमाल करने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती की तरफ मोड़ा जा रहा है। डिमांड के अनुसार डीएपी उपलब्ध नहीं हो सकी है। किसानों को डीएपी की जगह एनपीके (नाइट्रोजन-फासफोरस-पोटाशियम) एसएसपी (सिंगल सुपर फास्फेट) का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। इसमें लागत कम आती है और इसका परिणाम बेहतर है।
- डॉ. अनिल सहरावत, जिला कृषि उप निदेशक
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खरीफ की फसल की कटाई के साथ ही रबी की फसल की बिजाई के लिए तैयारी शुरू हो गई है। गेहूं की बिजाई के समय किसान डीएपी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अक्तूबर व नवंबर में डीएपी डिमांड काफी अधिक बढ़ जाती है, लेकिन इस बार डिमांड के हिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही हैं। इसका खामियाजा किसानों को झेलना पड़ रहा है। नवंबर के लिए 5 हजार एमटी और दिसंबर के लिए 600 एमटी डीएपी की डिमांड भेजी गई है। डीएपी खाद विदेशों से आयात होती है, लेकिन इस बार खाद काफी कम आयात हुआ है। वर्तमान में जिले में डीएपी का स्टॉक महज 50 एमटी ही बचा हुआ है।
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गन्नौर में किसान बोले, जल्द डीएपी नहीं मिली तो जताएंगे रोष
गन्नौर में किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द डीएपी नहीं मिली तो रोष प्रदर्शन किया जाएगा। गन्नौर में किसी भी सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं है। किसान अशोक राठी, रमेश राठी, करतार सिंह का कहना है कि यह समय गेहूं की बिजाई का है। इसमें डीएपी की काफी आवश्यकता होती है। जरूरत के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। सुबह से शाम तक समितियों पर इंतजार करने के बाद शाम को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। समितियों में किसान खाद के लिए चक्कर काट रहा है, लेकिन अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
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यह बोले किसान
वर्तमान में गेहूं की बिजाई का सही समय है। बारिश के बाद नमी बनी हुई है। अगर अब देरी की गई तो सिंचाई पर भी खर्च करना होगा, लेकिन इस समय डीएपी नहीं होने के कारण वह बिजाई नहीं कर पा रहे हैं।
- सतीश कुमार, तिहाड़
इस बार डीएपी नहीं मिल रही है, जिसके चलते मैंने फैसला लिया है कि इस बार बिना डीएपी के ही गेहूं की फसल की बिजाई करूंगा। अन्य कोई उर्वरक भी खेत में नहीं डालूंगा।
- सतीश, भटाना
गेहूं की फसल की बिजाई का समय नजदीक आ चुका है। मैं शहर में डीएपी लेने आया था, लेकिन कई दुकानों पर चक्कर लगाने के बाद भी डीएपी नहीं मिल पाई। सरकार को किसानों को डीएपी उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
- महेंद्र, बैंयापुर
डीएपी की कमी के चलते गेहूं की बिजाई नहीं हो पा रही है। इस बार मौसम में ठंड के चलते अगर इस समय गेहूं की बिजाई की जाए तो आगे फसल बेहतर होने की उम्मीद है। सरकार को तुरंत डीएपी की किल्लत खत्म करनी चाहिए।
- राजेंद्र, बैंयापुर
वर्जन
रासायनिक खादों का कम इस्तेमाल करने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती की तरफ मोड़ा जा रहा है। डिमांड के अनुसार डीएपी उपलब्ध नहीं हो सकी है। किसानों को डीएपी की जगह एनपीके (नाइट्रोजन-फासफोरस-पोटाशियम) एसएसपी (सिंगल सुपर फास्फेट) का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। इसमें लागत कम आती है और इसका परिणाम बेहतर है।
- डॉ. अनिल सहरावत, जिला कृषि उप निदेशक