किसान आंदोलन में पैर पसार रहा बुखार, 10000 से ज्यादा पैरासिटामॉल की गोली खा चुके किसान
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कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर सिंघु बार्डर पर किसानों का धरना जारी है। यहां लगातार किसान बीमार हो रहे हैं, उसने प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ाना शुरू कर दिया है। सिंघु बॉर्डर पर किसान अभी तक 10 हजार से ज्यादा बुखार के लिए पैरासिटामॉल की गोलियां खा चुके हैं और इनमें से अकेले स्वास्थ्य विभाग ही किसानों को आठ हजार गोलियां अभी तक दे चुका है। जबकि वहां प्राइवेट संस्थाएं भी शिविर लगाकर लगातार किसानों का उपचार कर रही है और उनको दवाएं बांट रही है।
वह भी दो हजार से ज्यादा गोलियां बांट चुकी है। इस तरह वहां करीब एक हजार किसान बुखार से पीड़ित हो चुके हैं और उनमें 300 से ज्यादा को प्रशासन खुद भी कोरोना संदिग्ध मान रहा है। जबकि कोरोना जांच कोई कराने को तैयार नहीं है और वहां जांच के लिए लगाए गए काउंटर को विरोध करके हटवा दिया गया। जिसे प्रशासन ने वहां से हटाकर कुछ दूरी पर लगाया है।
कुडली बॉर्डर पर किसानों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की दस टीमों को लगाया गया है। वह टीमें किसानों की थर्मल स्क्रीनिंग व अन्य जांच करके दवाई दे रही है। वहां स्वास्थ्य विभाग अभी तक किसानों को बुखार मिलने पर करीब आठ हजार पैरासिटामॉल की गोलियां किसानों को बांट चुका है। इस तरह वहां काफी किसान बुखार से पीड़ित है। इनके अलावा कई प्राइवेट संस्थाओं जनस्वास्थ्य अभियान हरियाणा, सामाजिक चिकित्सा महासंघ हरियाणा, स्वास्थ्य सेवा संस्थान, मेडिकल एसोसिएशन अमृतसर समेत अन्य ने वहां शिविर लगाए हुए है।
इन अलग-अलग शिविर में प्रतिदिन 200-400 मरीज पहुंच रहे हैं। इन जगहों पर बुखार से लेकर शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में दर्द आदि के मरीज पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही सांस की बीमारी वाले किसान भी दवाई लेने पहुंच रहे हैं। इन शिविरों में अभी तक करीब दो हजार से ज्यादा पैरासिटामॉल की गोलियां किसान लेकर खा चुके हैं। इस तरह वहां करीब 800-1000 किसानों को बुखार हो चुका है और उनमें से करीब 300 से ज्यादा को कोरोना संदिग्ध प्रशासन खुद भी मान रहा है।
इसके लिए ही किसानों को जांच कराने के लिए टीमें बार-बार आग्रह कर रही हैं लेकिन किसान जांच कराने को तैयार नहीं है। किसानों को यह लगता है कि सरकार उनकी कोरोना जांच कराकर पॉजिटिव बताकर वहां से हटा देगी। वहां प्रशासन ने कोरोना जांच के लिए पिछले एक सप्ताह से काउंटर लगवाए हुए थे, जिन पर एक भी किसान ने जांच नहीं कराई। वहीं अब काउंटर लगाने का किसानों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। वहां किसानों के विरोध के कारण ही सोमवार को रसोई ढाबे के पास लगाया गया काउंटर हटाना पड़ा। उसे प्रशासन ने कुछ पीछे लगवाया, जिससे कोई कोरोना जांच कराना चाहे तो वह करा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार किसानों की जांच कर रही है। अभी तक अकेले स्वास्थ्य विभाग किसानों को बुखार की करीब आठ हजार गोलियां बांट चुका है। इसके अलावा भी कोई किसान अन्य बीमारी बताता है तो उसको दवा उपलब्ध कराई जा रही है। वहां किसानों के बुखार को देखते हुए कोरोना के 300 से ज्यादा संदिग्ध लग रहे हैं। इसलिए ऐसे सभी किसानों को जांच करानी चाहिए, जिससे उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सके। - श्यामलाल पूनिया, डीसी।