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केंद्र सरकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेराबंदी की तैयारी में जुटे किसान
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कुंडली बॉर्डर पर पत्रकार वार्ता करते किसान यूनियनों के पदाधिकारी। संवाद
- फोटो : Sonipat
कृषि कानून रद्द कराने के लिए 26 दिनों से ठंड में दिल्ली को घेरकर किसान सड़कों पर बैठे हुए है, लेकिन उसके बाद भी इसका कोई समाधान नहीं होता दिख रहा है। जिससे केंद्र सरकार को अब किसान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। इसके लिए किसान इंग्लैंड के सांसदों को पत्र भेजेंगे और उनसे अपील की जाएगी कि वह अपने प्रधानमंत्री को किसानों के समर्थन में भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत करने के लिए आने से रोकें। किसानों ने विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों से आग्रह किया है कि वह जिस देश में रहते हैं, वहां भारतीय दूतावास के बाहर किसान आंदोलन के समर्थन में धरना प्रदर्शन करें।
किसान नेता हरेंद्र सिंह लखोवाल, एडवोकेट प्रेमसिंह, हरदेव सिंह संधु, मेजर सिंह पुन्नावाल ने कहा कि किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को नकारने के बाद अब लिखित में जवाब देने का फैसला किया है। इसके लिए बुधवार को सभी संगठनों से मंत्रणा करके यह जवाब केंद्र को भेजा जाएगा। इसमें किसानों का सवाल है कि केंद्र सरकार बताए कि किसान कानून रद्द होंगे या नहीं, इसके बाद वह बताएंगे कि बातचीत के लिए जाएंगे या नहीं। जाएंगे तो कब व किसके बुलावे पर जाएंगे। किसान नेताओं ने कहा कि जिस तरह सरकार लोगों को कृषि कानूनों को लेकर गुमराह कर रही है। वह अपने किसान संगठन बनाकर उनसे बातचीत करती है तो कृषि कानूनों के समर्थन में अभियान चला रही है। उसी तरह अब किसान संगठन गांव-गांव जाकर लोगों को कानून की खामियों से अवगत कराएंगे और समर्थन की अपील करेंगे। देशभर में इसके लिए गुरुद्वारों के लाउडस्पीकर के सहारे भी प्रचार करके कानून की खामियों को बताया जाएगा। इसके साथ ही दस लाख हिंदी, दस लाख पंजाबी व पांच लाख अन्य भाषा में विज्ञापन छपवाकर बंटवाए जाएंगे।
सड़क पर मनाया जाएगा साहिबजादों का शहीदी दिवस
किसान नेताओं ने कहा कि 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह जयंती के मौके पर अन्नदाता दिवस मनाया जाएगा और एक समय का खाना छोड़ा जाएगा। उसके साथ गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों की शहादत को सड़क पर ही शहीदी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह 23, 26 व 27 दिसंबर को मनाया जाएगा और इसके लिए कथा वाचक व सिख चिंतक बुलाए जाएंगे।
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वेबिनार से किसानों व आम लोगों का संशय दूर किया जाएगा
किसान नेताओं ने बताया कि 24 दिसंबर को 12 बजे आईटी सेल जूम एप पर वेबिनार आयोजित करेगा। जिसमें पांच किसान नेताओं को जोड़ा जाएगा तो उससे दस हजार लोग एक साथ जुड़ सकते है। उस वेबिनार में किसी भी किसान व आम आदमी को आंदोलन के साथ ही कानून को लेकर संशय है तो उसको दूर कर सकता है। इसके साथ ही किसान एकता मोर्चा के सभी सोशल मीडिया पेज व अकाउंट पर जुड़ सकते है। किसान नेताओं ने अपील करते हुए कहा कि हर परिवार से एक सदस्य बॉर्डर पर पहुंचे, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ाया जाए।
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किसान नेता हरेंद्र सिंह लखोवाल, एडवोकेट प्रेमसिंह, हरदेव सिंह संधु, मेजर सिंह पुन्नावाल ने कहा कि किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को नकारने के बाद अब लिखित में जवाब देने का फैसला किया है। इसके लिए बुधवार को सभी संगठनों से मंत्रणा करके यह जवाब केंद्र को भेजा जाएगा। इसमें किसानों का सवाल है कि केंद्र सरकार बताए कि किसान कानून रद्द होंगे या नहीं, इसके बाद वह बताएंगे कि बातचीत के लिए जाएंगे या नहीं। जाएंगे तो कब व किसके बुलावे पर जाएंगे। किसान नेताओं ने कहा कि जिस तरह सरकार लोगों को कृषि कानूनों को लेकर गुमराह कर रही है। वह अपने किसान संगठन बनाकर उनसे बातचीत करती है तो कृषि कानूनों के समर्थन में अभियान चला रही है। उसी तरह अब किसान संगठन गांव-गांव जाकर लोगों को कानून की खामियों से अवगत कराएंगे और समर्थन की अपील करेंगे। देशभर में इसके लिए गुरुद्वारों के लाउडस्पीकर के सहारे भी प्रचार करके कानून की खामियों को बताया जाएगा। इसके साथ ही दस लाख हिंदी, दस लाख पंजाबी व पांच लाख अन्य भाषा में विज्ञापन छपवाकर बंटवाए जाएंगे।
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सड़क पर मनाया जाएगा साहिबजादों का शहीदी दिवस
किसान नेताओं ने कहा कि 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह जयंती के मौके पर अन्नदाता दिवस मनाया जाएगा और एक समय का खाना छोड़ा जाएगा। उसके साथ गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों की शहादत को सड़क पर ही शहीदी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह 23, 26 व 27 दिसंबर को मनाया जाएगा और इसके लिए कथा वाचक व सिख चिंतक बुलाए जाएंगे।
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वेबिनार से किसानों व आम लोगों का संशय दूर किया जाएगा
किसान नेताओं ने बताया कि 24 दिसंबर को 12 बजे आईटी सेल जूम एप पर वेबिनार आयोजित करेगा। जिसमें पांच किसान नेताओं को जोड़ा जाएगा तो उससे दस हजार लोग एक साथ जुड़ सकते है। उस वेबिनार में किसी भी किसान व आम आदमी को आंदोलन के साथ ही कानून को लेकर संशय है तो उसको दूर कर सकता है। इसके साथ ही किसान एकता मोर्चा के सभी सोशल मीडिया पेज व अकाउंट पर जुड़ सकते है। किसान नेताओं ने अपील करते हुए कहा कि हर परिवार से एक सदस्य बॉर्डर पर पहुंचे, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ाया जाए।