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Sonipat News: माइनर की बेहतर सफाई न किए जाने से फसल सूखने का डर, किसानों ने जताया रोष
Sun, 23 Jun 2024 10:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 23 Jun 2024 10:48 PM IST
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सोनीपत। गांव महलाना के पास पश्चिमी यमुना नहर से निकली माइनर की बेहतर सफाई न होने के कारण किसानों को फसल सूखने का डर सताने लगा है। इसी समस्या से परेशान तीन गांवों के किसानों ने महलाना के पास माइनर पर एकत्रित होकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उनका आरोप था कि सरकार की ओर से सफाई के लिए लाखों रुपये का बजट जारी होने पर भी माइनर की सफाई नहीं हो रही है। इसकी वजह से किसानों को धान की फसल लगाने में परेशानी हो रही है। अंतिम छोर तक पानी न पहुंचने के कारण धान की फसल सूखने का डर बना है। आरोप है कि माइनर में कई फिट तक मिट्टी जमा हो गई है और कई जगह झाड़ियां उगी हुई हैं।
गांव महलाना के पास पश्चिमी यमुना नहर से निकल रही माइनर से तीन गांवों के खेतों में सिंचाई की जाती है। गांव तिहाड़ खुर्द, ककरोई व भदाना के किसान खेतों में सिंचाई के लिए इसी माइनर पर निर्भर हैं। किसानों का आरोप था कि सिंचाई विभाग की ओर से माइनर की सफाई कराने में खानापूरी की जा रही है। इसकी वजह से धान की फसल लगाने में उनकी परेशानी बढ़ गई है। सिंचाई विभाग की ओर से अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने का दावा किया जाता है, लेकिन माइनर की सफाई न होने से पानी उनके खेतों में नहीं जाती। ऐसे में कई गांवों के किसानों ने मिलकर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए माइनर की सफाई की मांग उठाई है।
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किसान बलची, दलेल सिंह, वीरेंद्र, जयभगवान, शमशेर, इकबाल नंबरदार, प्रताप व रामकिशन ने बताया कि माइनर में जगह-जगह कई फीट मिट्टी भर चुकी है। मनरेगा मजदूरों की तरफ से कुछ जगह पर सफाई की गई है तो कुछ जगह पर अभी भी झाड़ियां उगी हैं। खेतों में धान की रोपाई की जा रही है, लेकिन माइनर में सफाई न होने के कारण पानी कम आ रहा।
अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें फसल प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि मानसून से पहले प्रशासन की ओर से सिंचाई विभाग को माइनरों व ड्रेनों की सफाई करने के निर्देश दिए थे, मानसून एक सप्ताह में आने की संभावना है। उसके बावजूद धरातल पर सफाई करने में खानापूरी हो रही है। माइनरों की सफाई के लिए लाखों रुपये का बजट कागज में सिमट कर रह जाता है। उनकी मांग है कि माइनर की समय पर सफाई कराई जाए। जिससे अंतिम छोर तक खेतों में पानी पहुंच सके। इस दौरान नरेश कुमार, जगबीर, भोपाल, महताब सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
वर्जन
माइनर की सफाई मनरेगा मजदूरों से कराई जा रही है। सफाई कार्य में कोताही नहीं बरती जाएगी। मानसून आने से पहले ही सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। माइनर की पटरी ऊंची होने के कारण मजदूरों को मिट्टी निकालने में परेशानी हो रही है। माइनर की चौड़ाई इतनी कम है कि वहां पर मशीन से सफाई करना असंभव है।-कैलाश चंद्र, उपमंडल अभियंता, सिंचाई विभाग
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उनका आरोप था कि सरकार की ओर से सफाई के लिए लाखों रुपये का बजट जारी होने पर भी माइनर की सफाई नहीं हो रही है। इसकी वजह से किसानों को धान की फसल लगाने में परेशानी हो रही है। अंतिम छोर तक पानी न पहुंचने के कारण धान की फसल सूखने का डर बना है। आरोप है कि माइनर में कई फिट तक मिट्टी जमा हो गई है और कई जगह झाड़ियां उगी हुई हैं।
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गांव महलाना के पास पश्चिमी यमुना नहर से निकल रही माइनर से तीन गांवों के खेतों में सिंचाई की जाती है। गांव तिहाड़ खुर्द, ककरोई व भदाना के किसान खेतों में सिंचाई के लिए इसी माइनर पर निर्भर हैं। किसानों का आरोप था कि सिंचाई विभाग की ओर से माइनर की सफाई कराने में खानापूरी की जा रही है। इसकी वजह से धान की फसल लगाने में उनकी परेशानी बढ़ गई है। सिंचाई विभाग की ओर से अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने का दावा किया जाता है, लेकिन माइनर की सफाई न होने से पानी उनके खेतों में नहीं जाती। ऐसे में कई गांवों के किसानों ने मिलकर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए माइनर की सफाई की मांग उठाई है।
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किसान बलची, दलेल सिंह, वीरेंद्र, जयभगवान, शमशेर, इकबाल नंबरदार, प्रताप व रामकिशन ने बताया कि माइनर में जगह-जगह कई फीट मिट्टी भर चुकी है। मनरेगा मजदूरों की तरफ से कुछ जगह पर सफाई की गई है तो कुछ जगह पर अभी भी झाड़ियां उगी हैं। खेतों में धान की रोपाई की जा रही है, लेकिन माइनर में सफाई न होने के कारण पानी कम आ रहा।
अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें फसल प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि मानसून से पहले प्रशासन की ओर से सिंचाई विभाग को माइनरों व ड्रेनों की सफाई करने के निर्देश दिए थे, मानसून एक सप्ताह में आने की संभावना है। उसके बावजूद धरातल पर सफाई करने में खानापूरी हो रही है। माइनरों की सफाई के लिए लाखों रुपये का बजट कागज में सिमट कर रह जाता है। उनकी मांग है कि माइनर की समय पर सफाई कराई जाए। जिससे अंतिम छोर तक खेतों में पानी पहुंच सके। इस दौरान नरेश कुमार, जगबीर, भोपाल, महताब सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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माइनर की सफाई मनरेगा मजदूरों से कराई जा रही है। सफाई कार्य में कोताही नहीं बरती जाएगी। मानसून आने से पहले ही सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। माइनर की पटरी ऊंची होने के कारण मजदूरों को मिट्टी निकालने में परेशानी हो रही है। माइनर की चौड़ाई इतनी कम है कि वहां पर मशीन से सफाई करना असंभव है।-कैलाश चंद्र, उपमंडल अभियंता, सिंचाई विभाग