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दूसरे राज्यों से चोरी की गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन करा बेच देते थे, तीन पर मुकदमा दर्ज

Sat, 24 Apr 2021 11:34 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 11:34 PM IST
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Fake registrations of stolen vehicles were sold from other states, cases were filed against three.
सोनीपत। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने दूसरे प्रदेशों से चोरी किए गए वाहनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्रेशन कराने व बेचने के मामले का खुलासा किया है। टीम ने ऐसी दो गाड़ियों का रिकॉर्ड एसडीएम कार्यालय सोनीपत से बरामद किया है। जांच में गड़बड़ी पाई गई है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने शुरुआती जांच के बाद तत्कालीन मोटर रजिस्ट्रेशन क्लर्क, कंप्यूटर आपरेटर और दो वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने के आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के एसआई रामनिवास ने सिटी थाना पुलिस को बताया कि सूचना मिली थी कि उपमंडल अधिकारी कार्यालय (नागरिक) सोनीपत में दूसरे राज्यों से चोरी किए वाहनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर गलत तरीके से रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। इसके बाद वाहनों को बेच दिया जाता है। ऐसी दो गाड़ी एचआर 10एसी-2704 व एचआर10एई -6629 सोनीपत अथॉरिटी में पटेल नगर सोनीपत निवासी रवींद्र के नाम से रजिस्टर्ड हैं। इसके बाद सोनीपत एसडीएम कार्यालय में जांच की। दस्तावेजों की छानबीन की तो दोनों गाड़ियों की फाइल कार्यालय में नहीं मिली। जांच में सामने आया कि गड़बड़ी वर्ष 2018 में हुई थी। जिस पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने दोनों गाड़ियों के मालिक रवींद्र, तत्कालीन मोटर रजिस्ट्रेशन क्लर्क कृष्ण कुमार व तत्कालीन कंप्यूटर आपरेटर मंजीत सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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कंप्यूटर से भारत सरकार के वाहन सॉफ्टवेयर से दोनों गाड़ियों के उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि गाड़ी नंबर एचआर 10एसी-2704 पहले यूपी-12टी-9555 नंबर से रजिस्टर्ड थी। इसकी रजिस्ट्रेशन तिथि 20 अगस्त, 2015 मिली, लेकिन फीस डिटेल के अनुसार तिथि 3 अगस्त, 2018 पाई गई। इसके अलावा चैसिस नंबर में अलग से एक अन्य अंक स्टार (*) जोड़ दिया गया है और इंजन नंबर में 1 (एक) की जगह आई लगा दिया । यह दोनों मिलता-जुलते हैं। वहीं गाड़ी नंबर एचआर-10 एई-6629 पहले डीएल-1आरटी-1501 नंबर पर रजिस्टर्ड थी। इसकी ऑनलाइन रिकॉर्ड में रजिस्ट्रेशन तिथि 14 मार्च, 2012 दर्शाई गई है लेकिन फीस डिटेल के अनुसार 2 जून 2018 मिली। इसके अलावा चैसिस नंबर मे अलग से स्टार (*) जोड़ दिया गया है। दोनों गाड़ियों को आनलाइन एनओसी अपडेट नहीं की गई। रजिस्ट्रेशन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदारी मोटर रजिस्ट्रेशन लिपिक की और ऑनलाइन अपडेट की जिम्मेवारी कंप्यूटर ऑपरेटर की होती है।
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जानकारी मिली थी कि दूसरे प्रदेशों से चोरी किए वाहनों के सोनीपत में फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्रेशन किया गया है। गिरोह के सदस्य कार्यालय के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर रैकेट चला रहे थे। वाहनों को फर्जी कागजात के आधार पर बेचा जा रहा था। मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है। - रामनिवास, एसआई, मुख्यमंत्री उड़नदस्ता, रोहतक
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