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Sonipat News: फैक्टरियों का धुआं अब प्रदूषण नहीं... बिजली पैदा करेगा
Sat, 28 Dec 2024 01:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 28 Dec 2024 01:10 AM IST
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फोटो 36- सोनीपत के राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर
सोनीपत। 51वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में हरियाणा के चरखी दादरी की छात्राओं ने धुएं से बिजली उत्पादन का मॉडल पेश किया है। कार्बन कैप्चर और भंडारण प्रौद्योगिकी पर आधारित मॉडल न सिर्फ फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं पर लगाम लगाएगा, बल्कि बिजली पैदा करेगा। इससे प्रदूषण की बड़ी समस्या का भी समाधान हो सकेगा।
राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रतियोगिता में चरखी दादरी जिले के समसपुर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की 10वीं की छात्रा गायत्री और आठवीं की छात्रा कनिष्का ने यह मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल को कार्बन कैप्चर और भंडारण प्रौद्योगिकी नाम दिया है। छात्राओं ने बताया कि लगातार प्रदूषित होते जा रहे पर्यावरण को देखते हुए उन्होंने एक ऐसी परियोजना बनाने पर विचार किया, जो वातावरण का संरक्षण कर सके और बढ़ते प्रदूषण पर भी अंकुश लगा सके। उनके इस कार्य में शिक्षिका सुदेश कुमार ने भी सहयोग किया। कई सप्ताह की मेहनत से उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं से बिजली पैदा की जा सकेगी।
ऐसे काम करेगा मॉडल
छात्रा गायत्री और कनिष्का ने बताया कि फैक्टरी से निकलने वाले धुएं को वातावरण में छोड़ने के बजाय उसे एक चैंबर से गुजारा जाएगा, जिससे ठोस कणों का पृथक्करण हो जाएगा। इसके बाद विलयन के जरिए सीओ2 को अलग करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसे पोटेशियम कार्बोनेट संग्रहण इकाई से गुजारा जाएगा। जिसके बाद ताप के माध्यम से सीओ2 को विलयन से अलग किया जाएगा। संग्रहित सीओ2 से अन्य गैसें अलग होकर बाहर निकल जाती हैं। इसके बाद बिजली तैयार कर उद्योगों को चलाने में प्रयोग में लाई जा सकती है।
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राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रतियोगिता में चरखी दादरी जिले के समसपुर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की 10वीं की छात्रा गायत्री और आठवीं की छात्रा कनिष्का ने यह मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल को कार्बन कैप्चर और भंडारण प्रौद्योगिकी नाम दिया है। छात्राओं ने बताया कि लगातार प्रदूषित होते जा रहे पर्यावरण को देखते हुए उन्होंने एक ऐसी परियोजना बनाने पर विचार किया, जो वातावरण का संरक्षण कर सके और बढ़ते प्रदूषण पर भी अंकुश लगा सके। उनके इस कार्य में शिक्षिका सुदेश कुमार ने भी सहयोग किया। कई सप्ताह की मेहनत से उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं से बिजली पैदा की जा सकेगी।
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ऐसे काम करेगा मॉडल
छात्रा गायत्री और कनिष्का ने बताया कि फैक्टरी से निकलने वाले धुएं को वातावरण में छोड़ने के बजाय उसे एक चैंबर से गुजारा जाएगा, जिससे ठोस कणों का पृथक्करण हो जाएगा। इसके बाद विलयन के जरिए सीओ2 को अलग करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसे पोटेशियम कार्बोनेट संग्रहण इकाई से गुजारा जाएगा। जिसके बाद ताप के माध्यम से सीओ2 को विलयन से अलग किया जाएगा। संग्रहित सीओ2 से अन्य गैसें अलग होकर बाहर निकल जाती हैं। इसके बाद बिजली तैयार कर उद्योगों को चलाने में प्रयोग में लाई जा सकती है।
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