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सुविधा : महिला मेडिकल कॉलेज में जिले का पहला थैलेसीमिया-डे केयर सेंटर शुरू
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एक बच्चे को खून चढ़ाकर थैलेसीमिया-डे केयर सेंटर का शुभारंभ करते चिकित्सा अधिकारी व स्टाफ। संवाद
- फोटो : Sonipat
बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से उन लोगों के लिए राहतभरी खबर है, जिन्हें अपने बच्चों को खून चढ़वाने के लिए जिले से बाहर दूर-दराज क्षेत्र के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे थे। अब उन्हें बाहर के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उनके बच्चों का इलाज अब बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज में होगा। इसके लिए वीरवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में जिले का पहला थैलेसीमिया-डे केयर सेंटर शुरू हो गया। शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज रावल व रक्त कोष विभाग की अध्यक्ष डॉ. रागिनी सिंह ने टीम के साथ एक बच्चे को खून चढ़ाकर इसका शुभारंभ किया।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, थैलेसीमिया बच्चों में एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बच्चे के शरीर खून नहीं बनता। ऐसे बच्चों को हर 15 से 21 दिन में दो बार खून चढ़ाना पड़ता है। अब तक जिले में इस बीमारी के इलाज की निशुल्क सुविधा नहीं थी। इससे बच्चों का इलाज कराने के लिए परिजनों को दूर-दराज के क्षेत्र में स्थापित अस्पतालों में चक्कर काटने पड़ रहे थे, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही थी। इसी के चलते मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने गत दिनों अपने ही अस्पताल में थैलेसीमिया-डे केयर सेंटर शुरू करने का मन बनाया। इसके लिए मुख्यालय से मंजूरी मांगी गई थी। अब मुख्यालय की मंजूरी मिलने के बाद बुधवार को इस सेंटर का शुभारंभ कर दिया गया। यहां बच्चों की बीमारी का इलाज निशुल्क होगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. राजीव महेंद्रु ने शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज रावल व रक्त कोष विभाग की अध्यक्ष डॉ. रागिनी सिंह की टीम को बधाई देते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
एक साथ 15 बच्चों को इलाज की मिलेगी सुविधा
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस सेंटर में 15 बेड की व्यवस्था की है। इसके लिए अलग से वार्ड तैयार किया गया है। ऐसे में यहां एक साथ 15 बच्चों को इलाज की सुविधा मिलेगी। यही नहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि अगर 15 से अधिक मरीज एक साथ आए तो उसी अनुसार बेड की संख्या भी बढ़ाई जाएगी, ताकि बच्चों को इलाज कराने में कोई परेशानी न हो।
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दिल्ली व दो जिलों के अस्पतालों से ट्रांसफर होंगे मेडिकल कॉलेज में 50 मरीज
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, जिले में 50 ऐसे बच्चे हैं, जो थैलेसीमिया ग्रस्त हैं। इनका इलाज दिल्ली, रोहतक व पानीपत के अस्पतालों में चल रहा है। इनके परिजनों को समयानुसार अस्पतालों में बच्चों को खून चढ़वाने के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में अब मेडिकल कॉलेज में सुविधा शुरू होने से यह सभी बच्चे यहां ट्रांसफर होंगे। इसके बाद परिजन समयानुसार बच्चों को लाकर यहां खून चढ़वा सकेंगे। संस्थान के रक्त कोष विभाग की तरफ से प्रक्रिया को सुचारु करने के लिए प्रदेश सरकार की अनुमति लेकर विशेष प्रकार के बैग खरीदे हैं। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, इन बैग से बच्चों को खून चढ़ाने पर होने वाले दुष्प्रभावों को बहुत हद तक कम किया जा सकेगा।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से थैलेसीमिया-डे केयर सेंटर शुरू करने का काफी समय से प्रयास किया जा रहा था। अब सरकार व मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद सेंटर को शुरू कर दिया है। इससे जहां मरीजों व उनके परिजनों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं संस्थान के लिए भी यह गौरव की बात है।
- डॉ. राजीव महेंद्रु, निदेशक, बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां
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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, थैलेसीमिया बच्चों में एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बच्चे के शरीर खून नहीं बनता। ऐसे बच्चों को हर 15 से 21 दिन में दो बार खून चढ़ाना पड़ता है। अब तक जिले में इस बीमारी के इलाज की निशुल्क सुविधा नहीं थी। इससे बच्चों का इलाज कराने के लिए परिजनों को दूर-दराज के क्षेत्र में स्थापित अस्पतालों में चक्कर काटने पड़ रहे थे, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही थी। इसी के चलते मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने गत दिनों अपने ही अस्पताल में थैलेसीमिया-डे केयर सेंटर शुरू करने का मन बनाया। इसके लिए मुख्यालय से मंजूरी मांगी गई थी। अब मुख्यालय की मंजूरी मिलने के बाद बुधवार को इस सेंटर का शुभारंभ कर दिया गया। यहां बच्चों की बीमारी का इलाज निशुल्क होगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. राजीव महेंद्रु ने शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज रावल व रक्त कोष विभाग की अध्यक्ष डॉ. रागिनी सिंह की टीम को बधाई देते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
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एक साथ 15 बच्चों को इलाज की मिलेगी सुविधा
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस सेंटर में 15 बेड की व्यवस्था की है। इसके लिए अलग से वार्ड तैयार किया गया है। ऐसे में यहां एक साथ 15 बच्चों को इलाज की सुविधा मिलेगी। यही नहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि अगर 15 से अधिक मरीज एक साथ आए तो उसी अनुसार बेड की संख्या भी बढ़ाई जाएगी, ताकि बच्चों को इलाज कराने में कोई परेशानी न हो।
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दिल्ली व दो जिलों के अस्पतालों से ट्रांसफर होंगे मेडिकल कॉलेज में 50 मरीज
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, जिले में 50 ऐसे बच्चे हैं, जो थैलेसीमिया ग्रस्त हैं। इनका इलाज दिल्ली, रोहतक व पानीपत के अस्पतालों में चल रहा है। इनके परिजनों को समयानुसार अस्पतालों में बच्चों को खून चढ़वाने के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में अब मेडिकल कॉलेज में सुविधा शुरू होने से यह सभी बच्चे यहां ट्रांसफर होंगे। इसके बाद परिजन समयानुसार बच्चों को लाकर यहां खून चढ़वा सकेंगे। संस्थान के रक्त कोष विभाग की तरफ से प्रक्रिया को सुचारु करने के लिए प्रदेश सरकार की अनुमति लेकर विशेष प्रकार के बैग खरीदे हैं। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, इन बैग से बच्चों को खून चढ़ाने पर होने वाले दुष्प्रभावों को बहुत हद तक कम किया जा सकेगा।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से थैलेसीमिया-डे केयर सेंटर शुरू करने का काफी समय से प्रयास किया जा रहा था। अब सरकार व मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद सेंटर को शुरू कर दिया है। इससे जहां मरीजों व उनके परिजनों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं संस्थान के लिए भी यह गौरव की बात है।
- डॉ. राजीव महेंद्रु, निदेशक, बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां