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मां से जो वादा करके गया था, उसे पूरा कर पाने की बेहद खुशी : सुमित आंतिल

Sun, 05 Sep 2021 01:59 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 01:59 AM IST
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Extremely happy to fulfill the promise I had made to my mother: Sumit Antil
सुमित आंतिल - फोटो : Sonipat
टोक्यो पैरालंपिक में स्वर्णिम भाला फेंककर तिरंगा फहराने वाले गांव खेवड़ा के सुमित आंतिल ने गांव पहुंचने पर कहा कि मुझे खुशी है कि मां को जो वादा किया था, उसे पूरा कर पाया। रक्षाबंधन पर बहन ने भी गिफ्ट के रूप में पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर लाने को कहा था। आज बहन को उसका मनपसंद गिफ्ट देकर दिल में सुकून है। टोक्यो ओलंपिक में स्वर्णिम उपलब्धि हासिल करने के लिए सर्वोत्तम प्रदर्शन की जरूरत थी। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया, जिसके दम पर ही देश के लिए स्वर्ण पदक जीत पाया।
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सुमित आंतिल ने बताया कि टोक्यो पैरालंपिक में सभी खिलाड़ी बेहतर तैयारी में आए थे। मेरा मुख्य मुकाबला आस्ट्रेलिया व श्रीलंका के खिलाड़ियों से था। मैं थोड़ा नर्वस जरूर था, लेकिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए भी पूरी तरह तैयार था। मैदान पर भी मैंने यही किया, केवल अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने पर ही ध्यान केंद्रित रखा। यही कारण रहा कि मैं मां व देशवासियों के आशीर्वाद से स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब हुआ। सुमित ने कहा कि जब कोई भी खिलाड़ी देश के लिए पदक जीतकर आता है तो युवा उससे प्रेरित होते हैं। मैंने भी यही सोचकर शुरुआत की थी, किसी न किसी का प्रेरणास्रोत बनूंगा। मैंने जो सोचा, उसे कर दिखाया। युवाओं को कहना चाहूंगा कि आप किसी भी फील्ड में हैं, मेहनत करो और देश का नाम रोशन करो।
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नीरज चोपड़ा की तरह स्वर्ण पदक जीतकर खुश, आर्मी में शामिल न होने का मलाल
सुमित ने कहा कि नीरज चोपड़ा की तरह भाला फेंक प्रतियोगिता में रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने की बेहद खुशी है, लेकिन उनकी तरह इंडियन आर्मी में न होने का मलाल रहेगा। मेरे पापा एयरफोर्स में थे, मैं भी बचपन से आर्मी में जाना चाहता था, लेकिन सड़क दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद ऐसा संभव नहीं हो पाया।
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कुश्ती में पदक जीतना चाहता था, लेकिन हादसे में चूर-चूर हुआ सपना
सुमित ने बताया कि शुरुआत में मैं योगेश्वर दत्त से प्रेरित था, उनकी तरह ओलंपिक में कुश्ती में देश के लिए मेडल जीतना चाहता था, लेकिन हादसे में पैर गंवाने के कारण यह सपना चूर-चूर हो गया। सुमित ने बताया कि वर्ष 2017 में अभ्यास करने के लिए आर्मी सेंटर पूना से आर्मी कोटे से पैर लगवाया, लेकिन अभ्यास के दौरान बार-बार यह पैर टूट जाता था। दो साल में अभ्यास करते हुए कई आर्टिफिशियल पैर टूटे। बाद में पांच लाख रुपये की लागत से जर्मनी से पैर मंगवाया, लेकिन उसे भी सेट होने में कई माह लग गए। अभ्यास के दौरान पैर में घाव हो गए, लेकिन पदक का सपना धुंधला नहीं पड़ने दिया। सुमित का कहना है कि अब मेरा अगला लक्ष्य एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ और वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए देश के लिए पदक जीतना रहेगा।

मेरे मुकाम के पीछे कोच नवल सिंह व वीरेंद्र धनखड़ का बड़ा हाथ
सुमित आंतिल ने बताया कि उनके सफर में वीरेंद्र धनखड़ ने पूरा सहयोग दिया। उन्होंने ही कोच नवल सिंह से मिलवाया। आज मैंने जो मुकाम हासिल किया है, उसके पीछे कोच नवल सिंह व वीरेंद्र धनखड़ का बहुत बड़ा हाथ है।
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