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20 एकड़ जमीन का मालिक नहीं मिलने से अटका एक्सप्रेस-वे निर्माण का प्रोजेक्ट
सोनीपत ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Thu, 26 May 2016 12:18 AM IST
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national highway
- फोटो : file
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जीटी रोड से यातायात के दबाव को कम करने के लिए पश्चिमी यमुना नहर के साथ-साथ दिल्ली को सोनीपत-पानीपत-करनाल और यमुनानगर से एक साथ जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा एक्सप्रेस-वे निर्माण का सपना फिलहाल पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। करीब डेढ़ साल पहले इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण की घोषणा की गई थी, लेकिन करनाल में मुनक-घोघड़ीपुर के बीच नहरों के साथ करीब 20 एकड़ जमीन का मालिक नहीं मिलने से रिपोर्ट तैयार करने का काम लटका हुआ है।
दरअसल, दिसंबर, 2014 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने पश्चिमी यमुना नहर के साथ बवाना-सोनीपत-पानीपत-मुनक-करनाल-इंद्री-यमुनानगर तक एक्सप्रेस वे के निर्माण की घोषणा की थी। इस संबंध में उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। इसके सर्वे की जिम्मेवारी लोकनिर्माण विभाग को दी गई। सरकार के अहम प्रोजेक्ट को लेकर सोनीपत लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा बवाना-सोनीपत-पानीपत-मुनक तक सर्वे किया गया। बाद में सरकार की ओर से एक्सप्रेस वे के निर्माण की जिम्मेवारी हरियाणा स्टेट रोड एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआरडीसी) को सौंपी गई। हालांकि निर्माण से पहले फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करना जरूरी है।
करीब एक साल से नहीं हो पा रही फिजिबिलिटी रिपोर्ट पूरी
नए एक्सप्रेस-वे के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जानी थी। एचएसआरडीसी ने इसको तैयार करने का ठेका एक प्राइवेट कंपनी को दिया है। अक्टूबर-2015 में कंपनी ने रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी थी, लेकिन उसमें कई खामियां थीं। इस पर कंपनी को दोबारा रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए गए थे। रिपोर्ट तैयार करने के दौरान पता चला कि करनाल में मुनक-घोघड़ीपुर के बीच नहरों के साथ लगती करीब 20 एकड़ जमीन ऐसी है जिसका कोई भी मालिक नहीं है। एचएसआरडीसी ने जमीन की जानकारी देने के लिए करनाल जिला प्रशासन से सहयोग मांगा, लेकिन जमीन का रिकॉर्ड नहीं मिलने से फिजिबिलिटी रिपोर्ट अधर में लटक गई।
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अगले महीने सरकार और एचएसआरडीसी के बीच होगी बैठक
करनाल में करीब 20 एकड़ जमीन का कोई मालिक न मिलने पर एचएसआरडीसी ने सरकार से अगले माह जून में बैठक करने का निर्णय लिया है। इस दौरान सरकार और एचएसआरडीसी के बीच करनाल के बगैर मालिकाना हक वाली जमीन पर मंथन होगा।
काटे जाएंगे नहरी विभाग की जमीन पर खड़े पेड़, होगा भूमि अधिग्रहण भी
अधिकारियों का कहना है कि बवाना से मुनक तक नए एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जाएगा। यह निर्माण पश्चिमी यमुना नहर के साथ-साथ होगा। ताकि नहरों के किनारे पक्के रह सकें। हालांकि नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए नहरी विभाग की जमीन पर पेड़ों को काटा जाएगा। जहां जरूरत होगी वहां पर किसानों की जमीन भी खरीदी जा सकती है।
एचएसआरडीसी की ओर से नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण को लेकर तैयार की जा रही फिजिबिलिटी रिपोर्ट अधर में लटक गई है। करनाल में करीब 20 एकड़ जमीन का मालिक नहीं मिलने से मामला उलझा हुआ है। एचआरडीसी की ओर से सरकार को इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है। अगले माह जून में सरकार के साथ होने वाली बैठक में इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा।
जगवीर सिंह काजला, डीजीएम, एचएसआरडीसी
दरअसल, दिसंबर, 2014 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने पश्चिमी यमुना नहर के साथ बवाना-सोनीपत-पानीपत-मुनक-करनाल-इंद्री-यमुनानगर तक एक्सप्रेस वे के निर्माण की घोषणा की थी। इस संबंध में उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। इसके सर्वे की जिम्मेवारी लोकनिर्माण विभाग को दी गई। सरकार के अहम प्रोजेक्ट को लेकर सोनीपत लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा बवाना-सोनीपत-पानीपत-मुनक तक सर्वे किया गया। बाद में सरकार की ओर से एक्सप्रेस वे के निर्माण की जिम्मेवारी हरियाणा स्टेट रोड एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआरडीसी) को सौंपी गई। हालांकि निर्माण से पहले फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करना जरूरी है।
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करीब एक साल से नहीं हो पा रही फिजिबिलिटी रिपोर्ट पूरी
नए एक्सप्रेस-वे के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जानी थी। एचएसआरडीसी ने इसको तैयार करने का ठेका एक प्राइवेट कंपनी को दिया है। अक्टूबर-2015 में कंपनी ने रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी थी, लेकिन उसमें कई खामियां थीं। इस पर कंपनी को दोबारा रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए गए थे। रिपोर्ट तैयार करने के दौरान पता चला कि करनाल में मुनक-घोघड़ीपुर के बीच नहरों के साथ लगती करीब 20 एकड़ जमीन ऐसी है जिसका कोई भी मालिक नहीं है। एचएसआरडीसी ने जमीन की जानकारी देने के लिए करनाल जिला प्रशासन से सहयोग मांगा, लेकिन जमीन का रिकॉर्ड नहीं मिलने से फिजिबिलिटी रिपोर्ट अधर में लटक गई।
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अगले महीने सरकार और एचएसआरडीसी के बीच होगी बैठक
करनाल में करीब 20 एकड़ जमीन का कोई मालिक न मिलने पर एचएसआरडीसी ने सरकार से अगले माह जून में बैठक करने का निर्णय लिया है। इस दौरान सरकार और एचएसआरडीसी के बीच करनाल के बगैर मालिकाना हक वाली जमीन पर मंथन होगा।
काटे जाएंगे नहरी विभाग की जमीन पर खड़े पेड़, होगा भूमि अधिग्रहण भी
अधिकारियों का कहना है कि बवाना से मुनक तक नए एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जाएगा। यह निर्माण पश्चिमी यमुना नहर के साथ-साथ होगा। ताकि नहरों के किनारे पक्के रह सकें। हालांकि नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए नहरी विभाग की जमीन पर पेड़ों को काटा जाएगा। जहां जरूरत होगी वहां पर किसानों की जमीन भी खरीदी जा सकती है।
एचएसआरडीसी की ओर से नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण को लेकर तैयार की जा रही फिजिबिलिटी रिपोर्ट अधर में लटक गई है। करनाल में करीब 20 एकड़ जमीन का मालिक नहीं मिलने से मामला उलझा हुआ है। एचआरडीसी की ओर से सरकार को इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है। अगले माह जून में सरकार के साथ होने वाली बैठक में इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा।
जगवीर सिंह काजला, डीजीएम, एचएसआरडीसी