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रोडवेज डिपो में 93 बसों की कमी, कंडम बसों में सफर करने को मजबूर यात्री
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सोनीपत। रोडवेज डिपो में इनदिनों बसों की कमी चल रही है। इस कारण कंडम बसों को भी चलाया जा रहा है। यह बसें बीच रास्ते में कहीं भी खड़ी हो जाती है। जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। बसों के बीच रास्ते में खराब होने की सबसे अधिक समस्या दिल्ली व यूपी रूट पर आ रही है।
बस खराब होने के बाद चालक और परिचालक कुछ यात्रियों को तो दूसरी बस में बैठा देते हैं, जबकि अन्य यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेकर गंतव्य पर पहुंचना पड़ता है। ऐसे में समय और पैसा दोनों की बर्बादी होती है। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2018 के बाद से डिपो में नई बसें नहीं आई, जिस कारण पुरानी बसों से ही काम चलाना पड़ रहा है।
परिवहन विभाग की ओर से सोनीपत बस अड्डे पर 197 बसें स्वीकृत हैं। वर्तमान में यहां रोडवेज की महज 63 बसें हैं, जबकि किलोमीटर स्कीम के तहत 42 बसें चल रही हैं। दूसरी ओर गोहाना सब डिपो में 63 बसों का बेड़ा स्वीकृत है, वहां रोडवेज की 41 बसें व किलोमीटर स्कीम के तहत 21 बसें चलाई जा रही हैं। सड़कों पर दौड़ने वाली इन बसों में से भी रोजाना 10 से अधिक बसें बीच रास्ते में ही खराब होकर खड़ी हो जाती है।
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40 नई बसों की दरकार
रोडवेज डिपो में कुछ साल पहले 24 नई बसें आई थीं। इनमें से 9 सोनीपत डिपो में और 15 बसें गोहाना सब डिपो में भेज दी गई थी। पिछले कुछ साल से रोडवेज डिपो को कोई नई बस नहीं मिली। जबकि हर साल डिपो में खड़ी कई बसें कंडम होती जा रही है। वर्तमान समय में यात्रियों की संख्या के अनुसार डिपो में अभी भी 93 बसों की कमी बनी हुई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि डिपो में कम से कम 40 नई बसों की दरकार है। नई बसें कब तक मिलेगी, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।
10 साल बाद कंडम हो जाती है बस
नियम के अनुसार रोडवेज बस को 10 साल पूरे होने या 8 लाख किलोमीटर का सफर तय करने के बाद कंडम घोषित कर दिया जाता है। हालांकि 2 साल पहले तक यह समय सीमा 8 साल थी, जिसे बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया था। उस समय रोडवेज बस अड्डे पर 148 ऐसी बसें थीं जो 7 लाख किलोमीटर का सफर तय कर चुकी थी। उच्चाधिकारियों ने इन बसों को दो साल ओर चलाने के आदेश दिए थे। जिसके बाद ही अधिकतर रोडवेेज बसें बीच रास्ते में खराब होने लगीं। डिपो में अधिकतर बसें निर्धारित समय-सीमा पूरी कर चुकी हैं। कंडम हो चुकी ये बसें आज भी रोडवेज डिपो के वर्कशॉप में खड़ी हैं।
जिले के रोडवेज डिपो की वर्तमान स्थिति
सोनीपत डिपो में रोडवेज बसें 63
किलोमीटर स्कीम के तहत बसें 42
गोहाना सब डिपो में रोडवेज बसें 41
किलोमीटर स्कीम के तहत बसें 21
रोडवेज डिपो में चालक 325
रोडवेज डिपो में परिचालक 275
यात्रियों का यह है कहना
गन्नौर रूट पर लंबे समय से बसों की कमी चल रही है। रोडवेज बस न चलने के कारण निजी वाहनों में सफर करना पड़ता है। निजी वाहन चालक अपनी मनमानी से चलते हैं। इस रूट पर रोडवेज बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
भूपेंद्र सिंह, राजलू गढ़ी
--
रोडवेज बसों की हालत इस समय ज्यादा ठीक नहीं है। बसें बीच रास्ते में ही जवाब दे जाती हैं। जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ता है। मजबूरन निजी वाहनों में सफर करने पर विवश हो जाते हैं। इससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
बिजेंद्र, जीवन नगर
--
नई बसों को किया जाए शामिल
रोडवेज द्वारा चलाई जा रही अधिकतर बसों की स्थिति बेहद खराब है। बसें बीच रास्ते में ही जवाब दे जाती हैं। अधिकारियों को चाहिए कि पूरी तरह जांच के बाद ही बसों को भेजा जाए, ताकि यात्रियों को बीच रास्ते में परेशानी न झेलनी पड़े।
- धर्मबीर, शामड़ी
वर्जन
रोडवेज डिपो में इस समय 104 बसें रोडवेज की और 63 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही हैं। कई सालों से नई बसें नहीं आई हैं। जिस कारण डिपो में बसों की कमी बनी हुई है। मुख्यालय को डिमांड भेजी गई है। डिपो में करीब 40 बसों की दरकार है। बसें पुरानी हैं, जिस कारण कई बार बीच रास्ते में ही खराब हो जाती है। उनके स्थान पर दूसरी बसें भेज दी जाती है। यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाती।
- राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, सोनीपत
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बस खराब होने के बाद चालक और परिचालक कुछ यात्रियों को तो दूसरी बस में बैठा देते हैं, जबकि अन्य यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेकर गंतव्य पर पहुंचना पड़ता है। ऐसे में समय और पैसा दोनों की बर्बादी होती है। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2018 के बाद से डिपो में नई बसें नहीं आई, जिस कारण पुरानी बसों से ही काम चलाना पड़ रहा है।
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परिवहन विभाग की ओर से सोनीपत बस अड्डे पर 197 बसें स्वीकृत हैं। वर्तमान में यहां रोडवेज की महज 63 बसें हैं, जबकि किलोमीटर स्कीम के तहत 42 बसें चल रही हैं। दूसरी ओर गोहाना सब डिपो में 63 बसों का बेड़ा स्वीकृत है, वहां रोडवेज की 41 बसें व किलोमीटर स्कीम के तहत 21 बसें चलाई जा रही हैं। सड़कों पर दौड़ने वाली इन बसों में से भी रोजाना 10 से अधिक बसें बीच रास्ते में ही खराब होकर खड़ी हो जाती है।
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40 नई बसों की दरकार
रोडवेज डिपो में कुछ साल पहले 24 नई बसें आई थीं। इनमें से 9 सोनीपत डिपो में और 15 बसें गोहाना सब डिपो में भेज दी गई थी। पिछले कुछ साल से रोडवेज डिपो को कोई नई बस नहीं मिली। जबकि हर साल डिपो में खड़ी कई बसें कंडम होती जा रही है। वर्तमान समय में यात्रियों की संख्या के अनुसार डिपो में अभी भी 93 बसों की कमी बनी हुई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि डिपो में कम से कम 40 नई बसों की दरकार है। नई बसें कब तक मिलेगी, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।
10 साल बाद कंडम हो जाती है बस
नियम के अनुसार रोडवेज बस को 10 साल पूरे होने या 8 लाख किलोमीटर का सफर तय करने के बाद कंडम घोषित कर दिया जाता है। हालांकि 2 साल पहले तक यह समय सीमा 8 साल थी, जिसे बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया था। उस समय रोडवेज बस अड्डे पर 148 ऐसी बसें थीं जो 7 लाख किलोमीटर का सफर तय कर चुकी थी। उच्चाधिकारियों ने इन बसों को दो साल ओर चलाने के आदेश दिए थे। जिसके बाद ही अधिकतर रोडवेेज बसें बीच रास्ते में खराब होने लगीं। डिपो में अधिकतर बसें निर्धारित समय-सीमा पूरी कर चुकी हैं। कंडम हो चुकी ये बसें आज भी रोडवेज डिपो के वर्कशॉप में खड़ी हैं।
जिले के रोडवेज डिपो की वर्तमान स्थिति
सोनीपत डिपो में रोडवेज बसें 63
किलोमीटर स्कीम के तहत बसें 42
गोहाना सब डिपो में रोडवेज बसें 41
किलोमीटर स्कीम के तहत बसें 21
रोडवेज डिपो में चालक 325
रोडवेज डिपो में परिचालक 275
यात्रियों का यह है कहना
गन्नौर रूट पर लंबे समय से बसों की कमी चल रही है। रोडवेज बस न चलने के कारण निजी वाहनों में सफर करना पड़ता है। निजी वाहन चालक अपनी मनमानी से चलते हैं। इस रूट पर रोडवेज बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
भूपेंद्र सिंह, राजलू गढ़ी
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रोडवेज बसों की हालत इस समय ज्यादा ठीक नहीं है। बसें बीच रास्ते में ही जवाब दे जाती हैं। जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ता है। मजबूरन निजी वाहनों में सफर करने पर विवश हो जाते हैं। इससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
बिजेंद्र, जीवन नगर
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नई बसों को किया जाए शामिल
रोडवेज द्वारा चलाई जा रही अधिकतर बसों की स्थिति बेहद खराब है। बसें बीच रास्ते में ही जवाब दे जाती हैं। अधिकारियों को चाहिए कि पूरी तरह जांच के बाद ही बसों को भेजा जाए, ताकि यात्रियों को बीच रास्ते में परेशानी न झेलनी पड़े।
- धर्मबीर, शामड़ी
वर्जन
रोडवेज डिपो में इस समय 104 बसें रोडवेज की और 63 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही हैं। कई सालों से नई बसें नहीं आई हैं। जिस कारण डिपो में बसों की कमी बनी हुई है। मुख्यालय को डिमांड भेजी गई है। डिपो में करीब 40 बसों की दरकार है। बसें पुरानी हैं, जिस कारण कई बार बीच रास्ते में ही खराब हो जाती है। उनके स्थान पर दूसरी बसें भेज दी जाती है। यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाती।
- राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, सोनीपत