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हम 9 बार उम्मीद लेकर गए, हर बार निराश होकर लौटे, बातचीत का रास्ता खुला जरूर रखेंगे
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अंकित चौहान
सोनीपत। कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की सरकार संग लगातार बातचीत के बावजूद कोई हल नहीं निकलता दिख रहा है। किसान नेता हर बार उम्मीद लेकर आते हैं और निराश होकर लौटते हैं। उसके बावजूद किसान नेताओं ने फैसला लिया है कि वह अपनी तरफ से बातचीत का रास्ता खुला जरूर रखेंगे। सरकार जितनी बार बातचीत के लिए बुलाएगी, उतनी बार बात करने जाएंगे। जिससे सरकार यह भ्रम नहीं फैला सके कि किसान बातचीत नहीं करना चाहते है। वहीं सरकार किसी भी तरह 26 जनवरी से पहले किसानों को मनाने में जुटी है और इसलिए ही किसानों की मांगों को पूरा करने की जगह आंदोलन खत्म कराने पर जोर लगाया हुआ है। जबकि किसानों ने साफ कर दिया कि कृषि कानून रद्द कराए बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा और अब अपना हक लेकर ही वह वापस जाएंगे।
कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर सड़कों पर किसान बैठे हुए हैं तो सरकार से लगातार बातचीत हो रही है। किसानों व सरकार के बीच नौ दौर की बातचीत अभी तक हो चुकी है और एक बार गृहमंत्री अमित शाह से किसान मिल चुके हैं। किसान हर बार इस उम्मीद के साथ बैठक में जाते हैं कि सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ एमएसपी की गारंटी देने पर कोई फैसला लेगी। किसान नेता कहते है कि सरकार ऐसा पहले कर चुकी है, जब गृहमंत्री से मुलाकात के बाद प्रस्ताव भेजा गया था। उसमें कुछ नहीं होने के कारण बातचीत से इंकार कर दिया गया था और उस समय सरकार ने प्रचार किया था कि किसान बातचीत ही नहीं करना चाहते है। इसलिए किसान नेता दोबारा से वह हालात पैदा नहीं होने देना चाहते है और अपनी तरफ से बातचीत का रास्ता खुला रखेंगे।
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ट्रैक्टर परेड को लेकर बयानबाजी व अफवाहों ने बढ़ाई किसान नेताओं की परेशानी
किसानों ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने का एलान किया हुआ है। जिसका अभी तक रूट प्लान भी तय नहीं हुआ है। उसका रूट प्लान 17 जनवरी तक फाइनल करने की बात कही गई है। जिसमें यह तय होगा कि किसान राजपथ, संसद या लालकिला पर जाएंगे, ट्रैक्टर परेड किस तरह की होगी समेत अन्य सबकुछ शामिल है। यह तय नहीं होने के बावजूद कुछ किसान नेताओं ने टैंक के साथ ट्रैक्टर चलाने की बात कही है तो किसी ने लालकिले पर कब्जा करने की बात कही है। वहीं ट्रैक्टर परेड को लेकर शुक्रवार को रद्द करने की अफवाह फैला दी गई। इन सभी ने किसान नेताओं की परेशानी बढ़ाई हुई है, जिनको लेकर उन्हें स्थिति साफ करनी पड़ रही है। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि अभी तक केवल दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने की बात तय है। लेकिन उसका रूट प्लान क्या होगा, यह 17 जनवरी तक फाइनल होगा। यह जरूर है कि किसानों की ट्रैक्टर परेड जरूर होगी।
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सरकार लगातार बातचीत कर रही है, लेकिन कृषि कानून रद्द करने के साथ ही एमएसपी की गारंटी पर बात नहीं करती है। उसने इस बार भी बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब कानूनों पर रोक लगा दी है तो अब किसानों की मांग पूरी हो गई है और आंदोलन को खत्म कर देना चाहिए। लेकिन हमने साफ कर दिया कि कानूनों पर रोक नहीं, बल्कि उनको रद्द कराने की मांग है। उनको रद्द कराने के बाद आंदोलन खत्म होगा। सरकार से बातचीत में यह जरूर साफ हो गया कि वह मांगों को पूरा करने की जगह इसपर ज्यादा जोर देने में लगी है कि किसी तरह से आंदोलन को खत्म कराया जाए। हर बार बातचीत होती है, लेकिन हम अपनी तरफ से बातचीत का रास्ता खुला रखेंगे।
अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा
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सरकार लगातार बातचीत के लिए बुलाती है और उसमें समस्या के समाधान की जगह केवल आंदोलन खत्म कराने पर जोर रहता है। लेकिन किसानों का आंदोलन उस समय तक जारी रहेगा, जब तक कृषि कानून रद्द नहीं हो जाते है। इसके साथ ही 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड को लेकर साफ कर दिया गया है कि ट्रैक्टर परेड दिल्ली में जरूर निकाली जाएगी और यह पूरी तरह फाइनल है। लेकिन उसका रूट क्या होगा और किसान किस जगह जाएंगे, यह 17 जनवरी तक साफ करके किसानों को बताया जाएगा। इसको लेकर कुछ अफवाह फैलाई जा रही है, जिनसे किसानों को बचना होगा।
बलबीर सिंह राजेवाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा
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सोनीपत। कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की सरकार संग लगातार बातचीत के बावजूद कोई हल नहीं निकलता दिख रहा है। किसान नेता हर बार उम्मीद लेकर आते हैं और निराश होकर लौटते हैं। उसके बावजूद किसान नेताओं ने फैसला लिया है कि वह अपनी तरफ से बातचीत का रास्ता खुला जरूर रखेंगे। सरकार जितनी बार बातचीत के लिए बुलाएगी, उतनी बार बात करने जाएंगे। जिससे सरकार यह भ्रम नहीं फैला सके कि किसान बातचीत नहीं करना चाहते है। वहीं सरकार किसी भी तरह 26 जनवरी से पहले किसानों को मनाने में जुटी है और इसलिए ही किसानों की मांगों को पूरा करने की जगह आंदोलन खत्म कराने पर जोर लगाया हुआ है। जबकि किसानों ने साफ कर दिया कि कृषि कानून रद्द कराए बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा और अब अपना हक लेकर ही वह वापस जाएंगे।
कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर सड़कों पर किसान बैठे हुए हैं तो सरकार से लगातार बातचीत हो रही है। किसानों व सरकार के बीच नौ दौर की बातचीत अभी तक हो चुकी है और एक बार गृहमंत्री अमित शाह से किसान मिल चुके हैं। किसान हर बार इस उम्मीद के साथ बैठक में जाते हैं कि सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ एमएसपी की गारंटी देने पर कोई फैसला लेगी। किसान नेता कहते है कि सरकार ऐसा पहले कर चुकी है, जब गृहमंत्री से मुलाकात के बाद प्रस्ताव भेजा गया था। उसमें कुछ नहीं होने के कारण बातचीत से इंकार कर दिया गया था और उस समय सरकार ने प्रचार किया था कि किसान बातचीत ही नहीं करना चाहते है। इसलिए किसान नेता दोबारा से वह हालात पैदा नहीं होने देना चाहते है और अपनी तरफ से बातचीत का रास्ता खुला रखेंगे।
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ट्रैक्टर परेड को लेकर बयानबाजी व अफवाहों ने बढ़ाई किसान नेताओं की परेशानी
किसानों ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने का एलान किया हुआ है। जिसका अभी तक रूट प्लान भी तय नहीं हुआ है। उसका रूट प्लान 17 जनवरी तक फाइनल करने की बात कही गई है। जिसमें यह तय होगा कि किसान राजपथ, संसद या लालकिला पर जाएंगे, ट्रैक्टर परेड किस तरह की होगी समेत अन्य सबकुछ शामिल है। यह तय नहीं होने के बावजूद कुछ किसान नेताओं ने टैंक के साथ ट्रैक्टर चलाने की बात कही है तो किसी ने लालकिले पर कब्जा करने की बात कही है। वहीं ट्रैक्टर परेड को लेकर शुक्रवार को रद्द करने की अफवाह फैला दी गई। इन सभी ने किसान नेताओं की परेशानी बढ़ाई हुई है, जिनको लेकर उन्हें स्थिति साफ करनी पड़ रही है। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि अभी तक केवल दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने की बात तय है। लेकिन उसका रूट प्लान क्या होगा, यह 17 जनवरी तक फाइनल होगा। यह जरूर है कि किसानों की ट्रैक्टर परेड जरूर होगी।
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सरकार लगातार बातचीत कर रही है, लेकिन कृषि कानून रद्द करने के साथ ही एमएसपी की गारंटी पर बात नहीं करती है। उसने इस बार भी बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब कानूनों पर रोक लगा दी है तो अब किसानों की मांग पूरी हो गई है और आंदोलन को खत्म कर देना चाहिए। लेकिन हमने साफ कर दिया कि कानूनों पर रोक नहीं, बल्कि उनको रद्द कराने की मांग है। उनको रद्द कराने के बाद आंदोलन खत्म होगा। सरकार से बातचीत में यह जरूर साफ हो गया कि वह मांगों को पूरा करने की जगह इसपर ज्यादा जोर देने में लगी है कि किसी तरह से आंदोलन को खत्म कराया जाए। हर बार बातचीत होती है, लेकिन हम अपनी तरफ से बातचीत का रास्ता खुला रखेंगे।
अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा
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सरकार लगातार बातचीत के लिए बुलाती है और उसमें समस्या के समाधान की जगह केवल आंदोलन खत्म कराने पर जोर रहता है। लेकिन किसानों का आंदोलन उस समय तक जारी रहेगा, जब तक कृषि कानून रद्द नहीं हो जाते है। इसके साथ ही 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड को लेकर साफ कर दिया गया है कि ट्रैक्टर परेड दिल्ली में जरूर निकाली जाएगी और यह पूरी तरह फाइनल है। लेकिन उसका रूट क्या होगा और किसान किस जगह जाएंगे, यह 17 जनवरी तक साफ करके किसानों को बताया जाएगा। इसको लेकर कुछ अफवाह फैलाई जा रही है, जिनसे किसानों को बचना होगा।
बलबीर सिंह राजेवाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा