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कैंसर से लड़ते हुए डिजिटल मार्केटिंग गुरु बनी गौरी, अब दूसरों को ट्रेंनिग देकर बना रही आत्मनिर्भर
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गौरी कपूर।
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। ब्रेन कैंसर जैसी बीमारी के नाम से ही इंसान की हिम्मत टूट जाती है, लेकिन ऐसी भी शख्सियत होती हैं जो स्वयं इस बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद उससे पार पाकर दूसरों के लिए नजीर बन जाती हैं। शहर के मॉडल टाउन की रहने वाली गौरी कपूर उन्हीं में से एक हैं। गौरी कैंसर को शिकस्त देकर अब लोगों में डिजिटल शिक्षा की अलख जगा रही हैं। लोग उनके जज्बे को सलाम करते हैं। गौरी दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। वह जरूरतमंदों को शिक्षा देने के साथ ही लोगों को रोजगार दे रही हैं।
मॉडल टाउन निवासी गौरी कपूर ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था। इसके बाद वह बंगलुरु की कंपनी में जाकर नौकरी करने लगी। इसी दौरान अक्तूबर, 2016 को उन्हें पता लगा कि वह ब्रेन कैंसर से पीड़ित हैं। इसके बाद वह परेशान हो गईं और इलाज के लिए नौकरी छोड़कर सोनीपत आ गई। घर आने के बाद वह डिप्रेशन में रहने लगी। छह माह तक इसी हालत में रहने के बाद दोबारा हिम्मत जुटाकर आगे बढ़ने की ठान ली। उसने मोबाइल को माध्यम बनाकर उसमें डिजिटल मार्केटिंग के बारे में जानकारी जुटाई। उसने इंटरनेट के माध्यम से ही डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स किया। करीब ढाई साल तक ब्रेन कैंसर से पीड़ित रहीं गौरी आज स्वस्थ हैं और बीमारी से दूर हैं। इसके लिए उन्होंने महिलाओं को तीन बैच में डिजिटल मार्केटिंग के बारे में निशुल्क बताया और उनको ट्रेंड किया। उसके बाद उन्होंने कॉलेजों में जाकर इसके लिए फ्री-वर्कशाप दी। करीब 300 विद्यार्थियों को इसके बारे में अवगत कराया। उसके बाद उन्होंने डिजिटल द्रोणाचार्य के नाम से अपना संस्थान शुरू किया है। जिसमें लगातार युवाओं का डिजिटल मार्केटिंग में ट्रेंड किया जा रहा है।
परिवार से हौसला मिला तो बढ़ी हिम्मत
गौरी कपूर कहती हैं कि जब मुझे पता लगा कि मैं ब्रेन कैंसर से पीड़ित हूं तो अंदर तक टूट गई थी। हालांकि मेरे परिवार ने मुझे हमेशा सहयोग दिया। सदैव मेरा हौसला बढ़ाया। जिससे मुझमें भी हिम्मत पैदा होने लगी। चिकित्सकों ने भी काफी सीख दी। सदैव मुझे ब्रैव गर्ल कहते थे, जिससे मैं मजबूत होती चली गई। इंटरनेट पर बीमारी के कारणों व निदान को लेकर घंटों मोबाइल पर समय बीताने लगी। इसी दौरान मुझे डिजिटल मार्केटिंग के बारे में जानकारी मिली। जिसके बाद यह कोर्स किया।
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अपनी चीजों का करते हैं प्रचार
गौरी कपूर बताती हैं कि डिजिटल मार्केटिंग में अपनी वस्तुएं और सेवाओं की डिजिटल साधनों से मार्केटिंग करना शामिल है। इसमें इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप की मदद ली जाती है। गौरी कहती है कि डिजिटल मार्केटिंग नए ग्राहकों तक जल्दी पहुंचने का सरल माध्यम है। वह द्रोणाचार्य के यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी युवाओं को शिक्षा दे रही हैं।
इंडिया नेशन वाइड अवॉर्ड से हो चुकीं सम्मानित
गौरी कपूर व उनकी टीम में शामिल आकाश व राधिका को मार्केट रिसर्च कंपनी बिजनेस मिंट की तरफ से इस वर्ष का नेशन वाइड अवॉर्ड भी दिया गया है। गौरी कहती हैं कि इससे उन्हें और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
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मॉडल टाउन निवासी गौरी कपूर ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था। इसके बाद वह बंगलुरु की कंपनी में जाकर नौकरी करने लगी। इसी दौरान अक्तूबर, 2016 को उन्हें पता लगा कि वह ब्रेन कैंसर से पीड़ित हैं। इसके बाद वह परेशान हो गईं और इलाज के लिए नौकरी छोड़कर सोनीपत आ गई। घर आने के बाद वह डिप्रेशन में रहने लगी। छह माह तक इसी हालत में रहने के बाद दोबारा हिम्मत जुटाकर आगे बढ़ने की ठान ली। उसने मोबाइल को माध्यम बनाकर उसमें डिजिटल मार्केटिंग के बारे में जानकारी जुटाई। उसने इंटरनेट के माध्यम से ही डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स किया। करीब ढाई साल तक ब्रेन कैंसर से पीड़ित रहीं गौरी आज स्वस्थ हैं और बीमारी से दूर हैं। इसके लिए उन्होंने महिलाओं को तीन बैच में डिजिटल मार्केटिंग के बारे में निशुल्क बताया और उनको ट्रेंड किया। उसके बाद उन्होंने कॉलेजों में जाकर इसके लिए फ्री-वर्कशाप दी। करीब 300 विद्यार्थियों को इसके बारे में अवगत कराया। उसके बाद उन्होंने डिजिटल द्रोणाचार्य के नाम से अपना संस्थान शुरू किया है। जिसमें लगातार युवाओं का डिजिटल मार्केटिंग में ट्रेंड किया जा रहा है।
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परिवार से हौसला मिला तो बढ़ी हिम्मत
गौरी कपूर कहती हैं कि जब मुझे पता लगा कि मैं ब्रेन कैंसर से पीड़ित हूं तो अंदर तक टूट गई थी। हालांकि मेरे परिवार ने मुझे हमेशा सहयोग दिया। सदैव मेरा हौसला बढ़ाया। जिससे मुझमें भी हिम्मत पैदा होने लगी। चिकित्सकों ने भी काफी सीख दी। सदैव मुझे ब्रैव गर्ल कहते थे, जिससे मैं मजबूत होती चली गई। इंटरनेट पर बीमारी के कारणों व निदान को लेकर घंटों मोबाइल पर समय बीताने लगी। इसी दौरान मुझे डिजिटल मार्केटिंग के बारे में जानकारी मिली। जिसके बाद यह कोर्स किया।
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अपनी चीजों का करते हैं प्रचार
गौरी कपूर बताती हैं कि डिजिटल मार्केटिंग में अपनी वस्तुएं और सेवाओं की डिजिटल साधनों से मार्केटिंग करना शामिल है। इसमें इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप की मदद ली जाती है। गौरी कहती है कि डिजिटल मार्केटिंग नए ग्राहकों तक जल्दी पहुंचने का सरल माध्यम है। वह द्रोणाचार्य के यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी युवाओं को शिक्षा दे रही हैं।
इंडिया नेशन वाइड अवॉर्ड से हो चुकीं सम्मानित
गौरी कपूर व उनकी टीम में शामिल आकाश व राधिका को मार्केट रिसर्च कंपनी बिजनेस मिंट की तरफ से इस वर्ष का नेशन वाइड अवॉर्ड भी दिया गया है। गौरी कहती हैं कि इससे उन्हें और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।