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जेएंडके के सोशल चेंज में हरियाणा के जवानों का अहम भूमिका
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत
Updated Sun, 01 Nov 2015 01:04 AM IST
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सीआरपीएफ जम्मू रेंज के एडीजीपी सुरेंद्र कुमार भगत का कहना है कि जम्मू एंड कश्मीर में लॉ एंड ऑडर के साथ सोशल चेंज में सीआरपीएफ के जवानों के जवानों की अहम भूमिका रहती है।
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खासकर हरियाणा के जवान स्थानीय स्तर पर स्कूलों में जागरूकता कैंप व आम लोगों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में आगे रहते हैं। वे शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस पर सीआरपीएफ कैंप सोनीपत में अब तक शहीद हुए प्रदेश के जवानों के परिजनों को सम्मानित कर रहे थे।
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एडीजीपी ने कहा कि देश में फिलहाल सीआरपीएफ के जवानों की संख्या साढ़े तीन लाख से ज्यादा हो गई है, जो चार जोन में तैनात हैं। पहले सीआरपीएफ के जवानों की जम्मू एंड कश्मीर में ड्यूटी स्पेशल ऑपरेशन के लिए लगाई गई थी, लेकिन अब वहां हालात सामान्य हो गए हैं।
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अब मुख्य ड्यूटी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लॉ एंड आर्डर बनाए रखने और सामाजिक बदलाव लाने की रहती है। इस मौके पर आईजी एचएस सिंधु चंडीगढ़ व पुलिस उप महानिरीक्षक महेंद्र कुमार व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
40 शहीदों के परिवार ही पहुंच पाए
सीआरपीएफ की ओर से 65 के करीब शहीदों के परिवारों को फोन करके सम्मान समारोह में आने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन इसमें आधे परिवार की आ पाए। इसके चलते 40 परिवारों को ही सम्मानित किया जा सका।
छुट्टी मंजूर हो गई, सुबह आना था घर : शशिकला
सम्मान समारोह में पहुंची रोहतक जिले के गांव भैंसरू खुर्द गांव निवासी शशिकला ने बताया कि उसके पति रणबीर सहरावत 1987 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए। 1997 में उनकी ड्यूटी आसाम के जलपाईगुड़ी में थी। घर आने के लिए छुट्टी ले रखी थी और सुबह निकलना था।
लेकिन रात को गश्त के दौरान सुरंग विस्फोट में उनकी मौत हो गई। उस समय उनके पति की उम्र करीब 32 साल रही होगी। बेटा भी तीन साल का था। 25 साल की उम्र में मेरा पति शहीद हो गया, लेकिन सीआरपीएफ एक परिवार की तरह है। उसकी हर संभव सहायता की गई।
नहीं, अबकी बार खुद ही खरीद लेना गेहूं
झज्जर जिले के गांव बहराणा से सम्मान समारोह में पहुंची सोना देवी ने बताया कि उसके पति ईश्वर सिंह सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के तौर पर तैनात थे। 31 मई 2005 को बिहार के मोतिहारी जिले में नक्सलवादी एक मकान में छुपे थे। सीआरपीएफ के जवानों ने ऑपरेशन चलाया। आमने-सामने की फायरिंग में उसके पति ने पांच नक्सली मार गिराए। शहीद होने के दो माह पहले एक दिन वे घर आए।
बकौल सोना देवी, मैंने कहा था कि कुछ दिन की छुट्टी ले लो। घर के लिए अनाज खरीद लेंगे, लेकिन ईश्वर सिंह ने कहा कि बाद में छुट्टी लेकर आऊंगा। इस बार खुद ही अनाज खरीद लेना। सोना देवी के बेटे सचिन ने बताया कि वह एसएसबी में तैनात है, जबकि मंजला भाई सीआरपीएफ में ही है, जिसकी ड्यूटी अब श्रीनगर है। सबसे बड़ा भाई नवीन घर पर ही है।
गांव में पति का स्मारक बनवाया जाए : कमला देवी
जींद जिले के गांव छातर से पहुंची कमला देवी ने बताया कि उसके पति सतीश कुमार सीआरपीएफ में सिपाही के तौर पर कार्यरत थे। सात माह पहले 20 मार्च 2015 को उसकी ड्यूटी कठुआ स्थित सीआरपीएफ के कैंप थी। सुबह करीब पौने पांच बजे अचानक दो आतंकियों ने कैंप पर हमला कर दिया। उसके पति ने एक आतंकी को तो मार गिराया, लेकिन दूसरे ने हैंड ग्रेनेड से हमला कर दिया। इसमें उसके पति की मौत हो गई। कमला देवी ने मांग की है कि उसे उसके पति की पूरी पेंशन दी जाए और गांव में उनके पति के नाम से शहीद स्मारक बनवाया जाए।
सुरेंद्र सिंह के नाम पर हो टीचर ट्रेनिंग सेंटर का नामकरण
झज्जर जिले के गांव सिलानी से पहुंचे मुकेश कुमार ने बताया कि उसके बड़े भाई सुरेंद्र कुमार 1979 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए। 1989 में उसके भाई एनएसजी कमांडो बन चुके थे। पंजाब के अजनाला में आंतकवादियों से सीधी मुठभेड़ के दौरान उनकी मौत हो गई। राष्ट्रपति की ओर से उन्हें मरणोपरांत शौर्य पदक दिया गया। सिलानी गांव की पंचायत व झज्जर अर्ध सैनिक बल संगठन की ओर से प्रस्ताव पास करके सिलानी में बन रहे टीचर ट्रेनिंग सेंटर का नाम सुरेंद्र सिंह के नाम पर रखने की सिफारिश की गई है। अब सीआरपीएफ भी प्रदेश के सीएम या शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर सिफारिश करे।
इन शहीदों के परिवार और हुए सम्मानित
सीआरपीएफ के शहीद सोनीपत जिले के गांव पांची जाटान निवासी वेदपाल की सीमा देवी और बिलबिलाना निवासी ओमप्रकाश की पत्नी बीरमति व चिरस्मी गांव निवासी रामकुमार के परिवार, करनाल की शिव कॉलोनी निवासी सूबेसिंह की पत्नी शकुंतला देवी व भूंसली निवासी भगवान सिंह के परिवार व ढींगर माजरा निवासी मनोज कुमार के परिवार, रोहतक जिले के गांव कंसाला निवासी हरिराम की पत्नी कांता देवी, जसिया निवासी प्रताप सिंह की पत्नी सरोज देवी व लडान निवासी जयकरण के परिवार, जींद जिले के गांव धर्मपाल की पत्नी बीरमति और खातर निवासी महाबीर के परिवार, झज्जर जिले के गांव मुनडासा निवासी सुखबीर, शादीपुर निवासी सुजीत कुमार, बेरी निवासी जीसी शर्मा व असदपुर निवासी देवी दत्त के परिवार, पानीपत जिले के गोवली निवासी रामस्वरूप, भिवानी जिले के गांव मानहेरू निवासी बाबूसिंह के परिजनों को भी सम्मानित किया गया।