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ऊर्जा संरक्षण आज केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व : कुलपति
Thu, 18 Dec 2025 01:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 18 Dec 2025 01:33 AM IST
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फोटो 01- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोज
सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) और हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (हरेडा) ने मिलकर दो दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। ऊर्जा संरक्षण एवं सतत विकास के लिए कार्यशाला का विषय ‘एकीकृत डिजाइन दृष्टिकोण, ऊर्जा अनुकरण एवं दिन के उजाले का अनुकरण’ रहा।
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने बताया कि ऊर्जा संरक्षण आज केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व बन चुका है। हम जो भवन व अवसंरचनाएं विकसित कर रहे हैं वह दीर्घकालीन राष्ट्रीय संपत्ति है। ऊर्जा संरक्षण, भारतीय वास्तुकला, आधुनिक तकनीक का समन्वय ही आत्मनिर्भर, टिकाऊ, विकसित भारत की मजबूत नींव है।
विकसित भारत वह होगा जहां हम विकास सतत, समावेशी, तकनीकी रूप से उन्नत हों। यदि भारत को 2047 तक वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनना है तो प्रत्येक भवन को उच्च प्रदर्शन वाला, जलवायु अनुकूल, टिकाऊ बनाना अनिवार्य है। भवन केवल ईंट-पत्थर की संरचनाएं नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रगति, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी के सशक्त माध्यम हैं।
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इसके लिए आर्किटेक्ट, इंजीनियर, प्लानर, विशेषज्ञ प्रारंभिक चरण से ही मिलकर कार्य करें। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने व्याख्यान के साथ प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देकर अपने अनुभव साझा किए।
कार्यशाला में प्रो. एसके सिंह, प्रो. विजय शर्मा, प्रो. ज्ञानेंद्र, प्रो. रवि, प्रो. शैलजा, डाॅ. ज्योति, शिखरवार, डाॅ. मनोज पंवार, डाॅ. ललित कुमार, डाॅ. सौरभ जागलान, शोधार्थी विद्यार्थियों मौजूद रहे।
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कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने बताया कि ऊर्जा संरक्षण आज केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय दायित्व बन चुका है। हम जो भवन व अवसंरचनाएं विकसित कर रहे हैं वह दीर्घकालीन राष्ट्रीय संपत्ति है। ऊर्जा संरक्षण, भारतीय वास्तुकला, आधुनिक तकनीक का समन्वय ही आत्मनिर्भर, टिकाऊ, विकसित भारत की मजबूत नींव है।
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विकसित भारत वह होगा जहां हम विकास सतत, समावेशी, तकनीकी रूप से उन्नत हों। यदि भारत को 2047 तक वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनना है तो प्रत्येक भवन को उच्च प्रदर्शन वाला, जलवायु अनुकूल, टिकाऊ बनाना अनिवार्य है। भवन केवल ईंट-पत्थर की संरचनाएं नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रगति, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी के सशक्त माध्यम हैं।
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इसके लिए आर्किटेक्ट, इंजीनियर, प्लानर, विशेषज्ञ प्रारंभिक चरण से ही मिलकर कार्य करें। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने व्याख्यान के साथ प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देकर अपने अनुभव साझा किए।
कार्यशाला में प्रो. एसके सिंह, प्रो. विजय शर्मा, प्रो. ज्ञानेंद्र, प्रो. रवि, प्रो. शैलजा, डाॅ. ज्योति, शिखरवार, डाॅ. मनोज पंवार, डाॅ. ललित कुमार, डाॅ. सौरभ जागलान, शोधार्थी विद्यार्थियों मौजूद रहे।