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डीआरओ पर मुआवजा बढ़ाने के 11 मामले गलत स्वीकार करने का आरोप, सरकार को हो सकता है 60 करोड़ का नुकसान

Wed, 07 Apr 2021 12:25 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 07 Apr 2021 12:25 AM IST
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DRO accused of wrongly accepting 11 cases of increasing compensation
सोनीपत। जठेड़ी, प्रीतमपुरा व बढ़मलिक में एक कंपनी के मुआवजा बढ़ाने के 11 केस को समय बीतने के बाद भी स्वीकार करने का आरोप डीआरओ पर लगा है। जबकि वह कंपनी पहले मुआवजा उठा चुकी है और उसका मुआवजा बढ़ाने का केस डालने का समय निकल चुका है। इससे सरकार को करीब 60 करोड़ रुपये नुकसान होगा। पूरा मामला शासन के संज्ञान में आने के बाद डीआरओ राजकुमार भौरिया को सस्पेंड किया गया है।
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जठेड़ी, प्रीतमपुरा व बढ़मलिक में एक कंपनी की करीब 62 एकड़ जमीन थी, जिसको एचएसआईआईडीसी के लिए अधिग्रहण करने को जून 2006 में नोटिफिकेशन किया गया और नवंबर 2008 में डीआरओ ने अवार्ड निर्धारित कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2009 व 10 में जमीन के मालिक ने पूरी मुआवजा राशि को उठा लिया था और मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए निर्धारित समय के अंदर कोई केस नहीं डाला गया था, लेकिन अक्टूबर 2020 में डीआरओ की कोर्ट में उस कंपनी के 11 केस को मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए स्वीकार कर लिया गया। जबकि जमीन अधिग्रहण के लिए जिस दिन अवार्ड सुनाया जाता है, उसके छह महीने के अंदर मुआवजा राशि बढ़वाने के लिए केस डाला जा सकता है। इस मामले में यह कारण दर्शाया गया कि उनको अवार्ड के बारे में पता हीं नहीं लग सका था। इसमें पूरा मामला मुआवजा राशि उठाए जाने से पकड़ा गया, क्योंकि कंपनी ने अवार्ड के बाद पूरी मुआवजा राशि को उठा लिया था। इससे अवार्ड के बारे में पता नहीं लगने का उसका तर्क झूठा था। इसके बावजूद डीआरओ ने एचएसआईआईडीसी को नोटिस जारी कर दिया।
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कोर्ट में 200 मुकदमे लंबित, 11 प्राथमिकता पर लिए
डीआरओ पर आरोप लगाया गया कि उनकी कोर्ट में पहले से 200 मुकदमे लंबित हैं, लेकिन इन 11 मुकदमों को प्राथमिकता पर लिया जा रहा है और इनमें तारीख भी काफी छोटी लगाकर सुनवाई शुरू कर दी गई। इसके साथ ही डीआरओ पर कंपनी से लाभ लेने का आरोप लगाया गया और इन 11 केसों का फैसला कंपनी के पक्ष में होता है तो सरकार को 60 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही यह भी मामला सामने आया कि सितंबर 2017 में एचएसआईआईडीसी ने मुआवजा राशि के लंबित केस के बारे में डीआरओ कार्यालय से जानकारी मांगी थी और उस समय लंबित केस 24 बताए गए थे, जिनमें यह 11 केस शामिल नहीं थे। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि इस मामले में कोर्ट भी जुलाई 2019 में अवार्ड कर चुका है और उस अवार्ड के बाद भी एक वर्ष से ज्यादा का समय निकल चुका है। इसलिए उस अवार्ड के बाद भी केस डालने का समय निकल चुका है।
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मेरे पास डीआरओ को सस्पेंड करने के आदेश का पत्र आया था। उनको किस लिए सस्पेंड किया गया है, इस बारे में उनको ज्यादा जानकारी नहीं है। - श्यामलाल पूनिया, डीसी
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