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Sonipat News: प्रदोष व निशित काल के चलते आज मनाई जाएगी दिवाली
Mon, 20 Oct 2025 12:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 20 Oct 2025 12:24 AM IST
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सोनीपत। कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि दो दिन 20 व 21 अक्तूबर को रहेगी लेकिन दिवाली 20 अक्तूबर को ही मनाई जाएगी। हर वर्ष दिवाली उत्सव पांच दिन तक मनाया जाता है। इन वर्ष तिथियों के हेरफेर के चलते दिवाली उत्सव 5 के बजाय 6 दिन मनाया जा रहा है।
डॉ. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि दिवाली उत्सव को पंच महापर्व भी कहा जाता है। धनतेरस के साथ शुरू हुआ पंच महापर्व इस बार 23 अक्तूबर भैयादूज तक चलेगा। कई लोग दिवाली को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अमावस्या तिथि की 20 अक्तूबर दोपहर 3:44 बजे प्रारंभ होकर 21 अक्तूबर शाम 5:55 बजे संपन्न होगी।
दिवाली पर प्रदोष एवं निशित काल अनिवार्य होता है। दिवाली की अंधेरी रात को महानिशा काल भी कहा जाता है। ऐसे में दिवाली पर्व 20 अक्तूबर को मनाना उचित रहेगा। मान्यता है कि दिवाली की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वीलोक पर भ्रमण करती हैं। घर के आंगन व मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर उनका स्वागत किया जाता है।
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यह रहेगा शुभ मुहूर्त
दिवाली पर्व 20 अक्तूबर को माता लक्ष्मी व भगवान गणेश की संयुक्त पूजा के लिए तीन शुभ मुहूर्त रहेंगे। पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा श्रद्धालु शाम 7:08 से रात 9:03 बजे के बीच वृषभ काल में भी दिवाली पूजन कर सकते हैं। इसके अलावा दिवाली पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त शाम 7:08 से रात 8:18 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं के पास दिवाली पर्व पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए करीब 1:10 घंटे का यह समय उत्तम रहेगा।
22 अक्तूबर को मनाया जाएगा अन्नकूट पर्व
आमतौर पर दिवाली पर्व के अगले दिन प्रतिपदा तिथि को अन्नकूट पर्व मनाया जाता है लेकिन तिथियों में परिवर्तन के चलते इस वर्ष 22 अक्तूबर को अन्नकूट पर्व मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि 21 अक्तूबर शाम 5:54 बजे से प्रारंभ होकर 22 अक्तूबर को रात 8:16 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 22 अक्तूबर को ही गोवर्धन एवं अन्नकूट पूजन किया जाएगा। गोवर्धन पूजन के लिए दोपहर 3:29 से शाम 6:10 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
23 अक्तूबर को मनाया जाएगा भैयादूज
द्वितीय तिथि को भाई-बहन के प्यार के अटूट रिश्ते का भैयादूज पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 23 अक्तूबर को भैयादूज पर्व मनाया जाएगा। बहनें पूजा-अर्चना कर अपने भाइयों की लंबी आयु व खुशहाल जीवन की कामना करेंगी। इसके बाद उन्हें तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर रस्म को निभाएंगी। द्वितीया तिथि 22 अक्तूबर रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्तूबर रात 10:46 बजे तक रहेगी। भैयादूज पर तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 से 3:28 बजे तक रहेगा।
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डॉ. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि दिवाली उत्सव को पंच महापर्व भी कहा जाता है। धनतेरस के साथ शुरू हुआ पंच महापर्व इस बार 23 अक्तूबर भैयादूज तक चलेगा। कई लोग दिवाली को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अमावस्या तिथि की 20 अक्तूबर दोपहर 3:44 बजे प्रारंभ होकर 21 अक्तूबर शाम 5:55 बजे संपन्न होगी।
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दिवाली पर प्रदोष एवं निशित काल अनिवार्य होता है। दिवाली की अंधेरी रात को महानिशा काल भी कहा जाता है। ऐसे में दिवाली पर्व 20 अक्तूबर को मनाना उचित रहेगा। मान्यता है कि दिवाली की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वीलोक पर भ्रमण करती हैं। घर के आंगन व मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर उनका स्वागत किया जाता है।
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यह रहेगा शुभ मुहूर्त
दिवाली पर्व 20 अक्तूबर को माता लक्ष्मी व भगवान गणेश की संयुक्त पूजा के लिए तीन शुभ मुहूर्त रहेंगे। पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा श्रद्धालु शाम 7:08 से रात 9:03 बजे के बीच वृषभ काल में भी दिवाली पूजन कर सकते हैं। इसके अलावा दिवाली पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त शाम 7:08 से रात 8:18 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं के पास दिवाली पर्व पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए करीब 1:10 घंटे का यह समय उत्तम रहेगा।
22 अक्तूबर को मनाया जाएगा अन्नकूट पर्व
आमतौर पर दिवाली पर्व के अगले दिन प्रतिपदा तिथि को अन्नकूट पर्व मनाया जाता है लेकिन तिथियों में परिवर्तन के चलते इस वर्ष 22 अक्तूबर को अन्नकूट पर्व मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि 21 अक्तूबर शाम 5:54 बजे से प्रारंभ होकर 22 अक्तूबर को रात 8:16 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 22 अक्तूबर को ही गोवर्धन एवं अन्नकूट पूजन किया जाएगा। गोवर्धन पूजन के लिए दोपहर 3:29 से शाम 6:10 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
23 अक्तूबर को मनाया जाएगा भैयादूज
द्वितीय तिथि को भाई-बहन के प्यार के अटूट रिश्ते का भैयादूज पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 23 अक्तूबर को भैयादूज पर्व मनाया जाएगा। बहनें पूजा-अर्चना कर अपने भाइयों की लंबी आयु व खुशहाल जीवन की कामना करेंगी। इसके बाद उन्हें तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर रस्म को निभाएंगी। द्वितीया तिथि 22 अक्तूबर रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्तूबर रात 10:46 बजे तक रहेगी। भैयादूज पर तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 से 3:28 बजे तक रहेगा।