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Sonipat News: तीन योग और 5 राजयोग के महासंयोग में मनेगी दिवाली
Sun, 12 Nov 2023 12:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 12 Nov 2023 12:43 AM IST
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फोटो 01- पंडित अमित शौनक।
सोनीपत। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाने वाली दिवाली पर इस बार 3 योग और 5 राजयोग के महासंयोग बन रहे हैं। दिवाली पर कई दशकों के बाद ये योग और राजयोग बन रहे हैं। इन राजयोग का निर्माण होने से यह पर्व जातकों के लिए बेहद खास रहने वाला है।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि अमावस्या तिथि रविवार को दोपहर ढाई बजे से शुरू होकर अगले दिन सोमवार को दोपहर पौने तीन बजे तक रहेगी। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन हमेशा अमावस्या तिथि के प्रदोष काल में किया जाता है। इस कारण 12 नवंबर को ही प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा होगी।
दशकों के बाद बन रहे ये शुभ योग
पंडित शौनक ने बताया कि दिवाली पर कई दशकों के बाद एक साथ कई शुभ योग और राजयोग बन रहे हैं। इनमें आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग बन रहे हैं। इसके अलावा गज केसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नामक पांच राजयोग बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन राजयोगों का निर्माण शुक्र, बुध, चंद्रमा, गुरु ग्रह की स्थितियों के अनुसार होगा। इन योग व राजयोग के महासंयोग के साथ इस बार की दिवाली बेहद खास रहेगी।
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जातकों पर यह रहेगा प्रभाव
गज केसरी योग : यह जातक को मान-सम्मान और लाभ देने वाला होता है।
हर्ष योग : यह धन में वृद्धि करता है और यश दिलाता है।
उभयचरी योग : यह सूर्यादि योगों में से एक है। इसके प्रभाव से व्यक्ति में साहस व निडरता आती है और नेतृत्व करने की क्षमता मिलती है।
काहल योग : यह अत्यंत दुर्लभ योगों में से एक है। यह योग जिनकी कुंडली में होता है वह अपने जोश और आत्मविश्वास से खूब धन, समृद्धि और सफलता प्राप्त करते हैं।
दुर्धरा योग : यह व्यक्ति को उन्नत अंतर्ज्ञान व मानसिक क्षमता प्रदान करता है। इससे वह चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकता है।
आयुष्मान योग : सुबह से शाम 4:25 बजे तक रहेगा। विधि-विधान से पूजा करने से सौभाग्य व यश की प्राप्ति होती है।
सौभाग्य योग : इस योग का समय शाम 4:25 बजे से 13 नवंबर को दोपहर 3:23 बजे तक रहेगा। यह योग बेहद शुभ व मंगलकारी है। इसमें पूजन करने पर भाग्य में वृद्धि व सुख-समृद्धि आती है।
महालक्ष्मी योग : इस योग में पूजन विधि-विधान से किया जाए तो माता लक्ष्मी का आगमन व स्थायित्व दोनों ही प्राप्त होते हैं।
नोट : शनि अपनी स्वयं की राशि क्रम में विराजमान होकर शश राज योग बना रहे हैं और आयुष्मान व सौभाग्य योग का निर्माण भी कर रहे हैं।
लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त
शुभ चौघड़िया
सुबह उषाकाल मुहूर्त (शुभ) : तड़के 5:02 से सुबह 6:41 बजे तक
चर : सुबह 8:04 से सुबह 9:25 बजे तक
लाभ : सुबह 9:25 से सुबह 10:25 बजे तक
अमृत : सुबह 10:45 से दोपहर 12:06 बजे तक
पूजन का समय
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त : शाम 5:40 से शाम 7:36 बजे तक
वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 5:32 से शाम 7:29 बजे तक
लक्ष्मी पूजन निशिता काल मुहूर्त : रात 11:39 से 12:30 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 52 मिनट रहेगी।
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) : दोपहर 1:26 से 2:47 बजे तक
शाम का मुहूर्त (अमृत, चर) : शाम 5:26 से रात 10:36 बजे तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ) : देर रात्रि 1:44 से तड़के 3:23 बजे तक
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चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि अमावस्या तिथि रविवार को दोपहर ढाई बजे से शुरू होकर अगले दिन सोमवार को दोपहर पौने तीन बजे तक रहेगी। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन हमेशा अमावस्या तिथि के प्रदोष काल में किया जाता है। इस कारण 12 नवंबर को ही प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा होगी।
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दशकों के बाद बन रहे ये शुभ योग
पंडित शौनक ने बताया कि दिवाली पर कई दशकों के बाद एक साथ कई शुभ योग और राजयोग बन रहे हैं। इनमें आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग बन रहे हैं। इसके अलावा गज केसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नामक पांच राजयोग बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन राजयोगों का निर्माण शुक्र, बुध, चंद्रमा, गुरु ग्रह की स्थितियों के अनुसार होगा। इन योग व राजयोग के महासंयोग के साथ इस बार की दिवाली बेहद खास रहेगी।
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जातकों पर यह रहेगा प्रभाव
गज केसरी योग : यह जातक को मान-सम्मान और लाभ देने वाला होता है।
हर्ष योग : यह धन में वृद्धि करता है और यश दिलाता है।
उभयचरी योग : यह सूर्यादि योगों में से एक है। इसके प्रभाव से व्यक्ति में साहस व निडरता आती है और नेतृत्व करने की क्षमता मिलती है।
काहल योग : यह अत्यंत दुर्लभ योगों में से एक है। यह योग जिनकी कुंडली में होता है वह अपने जोश और आत्मविश्वास से खूब धन, समृद्धि और सफलता प्राप्त करते हैं।
दुर्धरा योग : यह व्यक्ति को उन्नत अंतर्ज्ञान व मानसिक क्षमता प्रदान करता है। इससे वह चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकता है।
आयुष्मान योग : सुबह से शाम 4:25 बजे तक रहेगा। विधि-विधान से पूजा करने से सौभाग्य व यश की प्राप्ति होती है।
सौभाग्य योग : इस योग का समय शाम 4:25 बजे से 13 नवंबर को दोपहर 3:23 बजे तक रहेगा। यह योग बेहद शुभ व मंगलकारी है। इसमें पूजन करने पर भाग्य में वृद्धि व सुख-समृद्धि आती है।
महालक्ष्मी योग : इस योग में पूजन विधि-विधान से किया जाए तो माता लक्ष्मी का आगमन व स्थायित्व दोनों ही प्राप्त होते हैं।
नोट : शनि अपनी स्वयं की राशि क्रम में विराजमान होकर शश राज योग बना रहे हैं और आयुष्मान व सौभाग्य योग का निर्माण भी कर रहे हैं।
लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त
शुभ चौघड़िया
सुबह उषाकाल मुहूर्त (शुभ) : तड़के 5:02 से सुबह 6:41 बजे तक
चर : सुबह 8:04 से सुबह 9:25 बजे तक
लाभ : सुबह 9:25 से सुबह 10:25 बजे तक
अमृत : सुबह 10:45 से दोपहर 12:06 बजे तक
पूजन का समय
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त : शाम 5:40 से शाम 7:36 बजे तक
वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 5:32 से शाम 7:29 बजे तक
लक्ष्मी पूजन निशिता काल मुहूर्त : रात 11:39 से 12:30 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 52 मिनट रहेगी।
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) : दोपहर 1:26 से 2:47 बजे तक
शाम का मुहूर्त (अमृत, चर) : शाम 5:26 से रात 10:36 बजे तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ) : देर रात्रि 1:44 से तड़के 3:23 बजे तक

फोटो 01- पंडित अमित शौनक।