फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   disease

दूसरों की दुनिया में उजाला कर इस जहां से रुखसत हुई ऋतिका

Sun, 22 Nov 2015 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Sun, 22 Nov 2015 12:27 AM IST
विज्ञापन
जब से होश संभाला, तब से वह हर पल तिल-तिलकर तक मरती रही। मौत को तो वह मात नहीं दे सकी, लेकिन दुनिया से जाने से पहले वह दूसरों के जीवन में जरूर उजाला कर गई। आज शीशा कारोबारी ब्रह्म कॉलोनी निवासी संजय कुमार को अपनी 18 वर्षीय बेटी पर बेहद नाज है। संजय की सिर्फ एक तमन्ना है कि उसे उस शख्स की झलक दिखला दें, जिसे उसकी बेटी की आंखें लगाई गई हैं। ताकि अपनी बेटी की खूबसूरत आंखों को फिर से निहार सके।
विज्ञापन

बकौल संजय उसकी इकलौती संतान रिया उर्फ ऋतिका जब छह माह की थी तब डॉक्टरों ने बताया था कि उसे थैलीसीमिया की बीमारी है। बताया जाता है कि अगर माता-पिता में से किसी को यह बीमारी है तो वह बच्चों में भी हो सकती है। पत्नी प्रमिला को यह बीमारी आंशिक थी, लेकिन रिया इससे ज्यादा पीड़ित रही। पांच साल तक तो हर दो से अढ़ाई माह में रिया को दिल्ली के एक निजी अस्पताल से खून चढ़ाया, लेकिन जब वह बड़ी हुई तो हर 15 दिन बाद खून चढ़वाना पड़ता था। इस तरह हर दो सप्ताह बाद उसे घातक बीमारी का अहसास होता था। फिर भी वह सकारात्मक सोच के साथ रहती थी।
विज्ञापन


मां से मिली प्रेरणा, मरने से पहले किए नेत्रदान
बकौल संजय ऋतिका की मां बेहद धार्मिक प्रवृति की महिला है। बेटी को समझाती थी, जो भगवान ने भाग्य में लिख दिया, उसे कौन टाल सकता है। ऋतिका को भी अहसास हो गया था कि एक दिन उसे जाना है। इसलिए उसने मरने से पहले ही नेत्रदान करने की सहमति दे दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


10 दिन पहले कालेज में मनाया ऋतिका ने जन्मदिन
परिजनों ने बताया कि ऋतिका को चाहे अपनी मौत का अहसास हो गया था, लेकिन उसने जिंदगी को सकारात्मक तरीके से जीना नहीं छोड़ा था। न ही वह उदास रहती थी। इसलिए उसने सोनीपत-पानीपत जिले की सीमा पर स्थित पानीपत के एक इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला भी ले लिया था। नौ नवंबर को उसने अपना 19वां जन्मदिन भी कॉलेज में मनाया था। शुक्रवार को उसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। परिजन उसे दिल्ली स्थित अस्पताल ले गए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।  


दृष्टि सेवा समिति का अहम योगदान
नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए शहर की दृष्टि सेवा समिति का अहम योगदान है। समिति के पदाधिकारी हरभगवान रहेजा ने बताया कि संस्था लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करती रहती है। ऋतिका के अलावा माडल टाउन निवासी प्रॉपर्टी डीलर मोहन टुटेजा ने भी अपनी मां शांतिदेवी की आंखें दान की हैं। इससे पहले मोहन के पिता जयदेव टुटेजा भी नेत्रदान कर चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed